पर्वत | पर्वत किसे कहते हैं | परिभाषा | parvat kise kahate hain | Mountains in hindi

पर्वत (Mountains)

पर्वत ऐसे सुस्पष्ट उच्च भूमि (Highland) हैं, जिनमें एक या एक से अधिक शिखर होते हैं। इनका ढाल तीव्र व शिखर-क्षेत्र संकुचित होता है। निम्न भाग में इसका ढाल 25° से 35° तक होता है, पर शिखरों के समीप ढाल अधिक तीव्र या खड़ी हुआ करती है। ये पृथ्वी की सतह पर द्वितीयक क्रम (Second order) के उच्चावच हैं, जो निकटवर्ती क्षेत्रों की तुलना में सामान्यतः 1,000 मी. से अधिक ऊँचे होते हैं।

पर्वत शिखर : किसी पर्वत के सर्वोच्च नुकीले भाग, जो आस-पास के प्रदेश से तथा पर्वत के अन्य भागों से ऊँचा हो, उसे पर्वत शिखर (Mountain Peak) कहा जाता है।


निम्न ऊँचाई वाले पर्वत को पहाड़ी कहते हैं। अर्थात् पर्वतों के वे लघु रूप जिनका क्षेत्रीय विस्तार कम तथा ऊँचाई 1,000 मी. से कम होती है, पहाड़ी कहलाते हैं। किसी पर्वत या पहाड़ी का सर्वोच्च भाग चोटी अथवा पर्वत शिखर (Peak) कहलाता है।
धरातल पर आकार एवं स्वरूप की भिन्नता के अनुसार विभिन्न प्रकार की पर्वतीय स्थलाकृतियाँ पायी जाती हैं -

पर्वत के रूप

पर्वत कटक (Mountain Ridge)
लम्बे और सँकरे पर्वत को पर्वत कटक कहते हैं। जिसकी ढाल धीमी या तीव्र (खड़ी) हो सकती है। इनकी उत्पत्ति में चट्टानों के स्तरों में वलन का सर्वाधिक योगदान होता है और इनके एक ओर का ढाल तीव्र तथा दूसरी ओर का ढाल सामान्य होता है। इनमें अनेक दर्रे मिलते हैं।

पर्वत श्रेणी (Mountain Range)
कटकों और शिखरों के ऐसे समूह जो प्रायः समांतर हों और एक ही युग में तथा एक ही प्रक्रियाओं द्वारा निर्मित होते हैं, पर्वत श्रेणी कहलाते हैं; जैसे- हिमालय पर्वत श्रेणी।

पर्वत श्रृंखला (Mountain Chain)
दो या अधिक पर्वत श्रेणियाँ अथवा पर्वत प्रणालियाँ जो अलग-अलग युगों में अलग-अलग प्रक्रियाओं से निर्मित होने के पश्चात् एक लम्बी एवं सँकरी पंक्ति में सामानान्तर रूप से विस्तृत हो जाती हैं, पर्वत श्रृंखला कहलाती हैं; जैसे अप्लेशियन पर्वतमाला, रॉकी पर्वतमाला आदि।

पर्वत क्रम तन्त्र (Mountain System)
जब कई पर्वत श्रेणियाँ एक ही प्रक्रियाओं द्वारा निर्मित हों तथा क्रमवार स्थित हों तो उनसे पर्वत प्रणाली का निर्माण होता है। पर्वत श्रृंखला के विपरीत इसमें एक ही युग में निर्मित पर्वतों को ही शामिल किया जाता है। जैसे-रॉकी पर्वत क्रम/तंत्र।

कॉर्डिलेरा या पर्वत समूह या प्रदेश (Cordillera)
जब विभिन्न युगों में निर्मित पर्वत श्रेणियाँ, पर्वत श्रृंखलाएँ तथा पर्वत तन्त्र एक में मिल जाते हैं, तो उसे कॉर्डिलेरा कहा जाता है; जैसे- उत्तरी अमेरिका तथा दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट पर सभी पर्वतों के क्रमों को अमेरिकी पर्वत प्रदेश या समूह कहा जाता हैं। इस पर्वतीय समूह को प्रशान्त कॉर्डिलेरा भी कहते हैं।

पर्वतों का वर्गीकरण (Classification of Mountains)

निर्माण प्रक्रिया के आधार पर
  • मोडदार या वलित पर्वत
  • ब्लॉक पर्वत
  • गुम्बदाकार पर्वत
  • संग्रहित पर्वत
  • मिश्रित अथवा जटिल पर्वत
  • अवशिष्ट पर्वत

पर्वत निर्माणकारी घटना के आधार पर
  • प्री कैम्ब्रियन युग के पर्वत
  • कैलिडोनियन पर्वत
  • हर्सीनियन पर्वत
  • अल्पाइन पर्वत

मोड़दार वलित पर्वत (Fold Mountains)

ये संपीडन की शक्तियों द्वारा निर्मित पर्वत हैं। जब चट्टानों में पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों द्वारा मोड़ या वलन पड़ जाते हैं तो उसे मोड़दार पर्वत कहा जाता है।
  • मोड़दार पर्वत विश्व के सबसे ऊँचे तथा सर्वाधिक विस्तृत पर्वत हैं। ये पर्वत लहरदार होते हैं तथा इनमें अनेक अभिनतियाँ व अपनतियाँ पायी जाती हैं। हिमालय, आल्प्स, यूराल, रॉकी, एंडीज, एटलस आदि प्रमुख मोड़दार पर्वत हैं।

अवरोधी या ब्लॉक पर्वत (Block Mountains)

इनका निर्माण तनाव तथा खिंचाव की शक्तियों द्वारा होता है। इनसे भ्रंश या दरारें बनती हैं, जिससे धरातल का कुछ भाग धंस जाता है तथा कुछ भाग ऊपर उठ जाता है। दरारों के समीप के ऊँचे उठे भाग अवरोधी या ब्लॉक पर्वत कहलाते हैं।
भ्रंशों के निर्माण से संबद्ध होने के कारण इसे भ्रंशोंत्य पर्वत भी कहा जाता है।

प्रमुख ब्लॉक पर्वत (Block Mountain)

वॉस्जेस

फ्रांस (यूरोप)

ब्लैक फॉरेस्ट

जर्मनी (यूरोप)

विन्ध्य पर्वत

भारत (एशिया)

सतपुड़ा पर्वत

भारत (एशिया)

सियरा नेवादा

सं.रा. अमेरिका (उत्तरी अमेरिका)

हॉर्ज

जर्मनी (यूरोप)

साल्ट रेंज

पाकिस्तान (एशिया)

रूवेन्जोरी

युगाण्डा-लो. ग, कांगो (अफ्रीका)


गुम्बदाकार पर्वत (Dome Mountains)

ज्वालामुखी क्रिया एवं स्थल में उभार के कारण इनकी उत्पत्ति होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका का सिनसिनाटी उभार, ब्लैक हिल्सबिगहॉर्न इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रमुख गुम्बदाकार पर्वत

हेनरी पर्वत

उटाह, (संयुक्त राज्य अमेरिका)

ब्लैक हिल्स

दक्षिणी डकोटा, (संयुक्त राज्य अमेरिका)

एडिरॉण्डेक पर्वत

न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका)


संग्रहित या संचयित पर्वत (Mountains of Accumulation)

ज्वालामुखी के उद्गार से निकले लावा, विखंडित पदार्थ तथा राखचूर्ण आदि के क्रमबद्ध अथवा असंबद्ध एकत्रीकरण के फलस्वरूप इन पर्वतों का निर्माण होता है। अत: इन्हें ज्वालामुखी पर्वत भी कहा जाता है। जापान का फ्यूजीयामा और इक्वेडोर का कोटोपैक्सी इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

मिश्रित पर्वत या जटिल पर्वत (Complex Mountains)

जब किसी पर्वत में बनावट संबन्धी अनेक जटिलताएँ पायी जाती है तथा सामान्यत: चट्टानों के मिश्रित रूप पाये जाते हैं, तो इस प्रकार के पर्वत का निर्माण होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका सियरा नेवादा व एनाकोंडा श्रेणी इसके प्रमुख उदाहरण है।

अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountains)

जब अपरदनकारी शक्तियों द्वारा मौलिक पर्वत में घर्षण या कटाव होता है, तो इसके अवशिष्ट कटकर नीचे गिर जाता है। इस प्रकार उनके अवशिष्ट से निर्मित पर्वत को अवशिष्ट या घर्षित पर्वत कहा जाता है। भारत के विंध्याचल, अरावली, सतपुड़ा, महादेव, पश्चिमी घाट, पर्वी घाट, पारसनाथ आदि अवशिष्ट पर्वतों के उदाहरण हैं।
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पर्वत निर्माणकारी घटनाओं के आधार पर पर्वतों का वर्गीकरण

1. प्री-कैम्बियन या कैम्ब्रियन युग के पूर्व के पर्वत

  • ये प्राचीनतम पर्वत हैं, परन्तु अत्यधिक अनाच्छादन के कारण ये अवशिष्ट रूप में ही मिलते हैं। इस काल के दौरान उत्तरी अमेरिका में लॉरेंशियन पर्वत तथा एल्गोमा पर्वत का निर्माण हुआ था। यूरोप महाद्वीप में भी फेनोस्केडिया व स्कॉटलैंड में प्री-कैम्ब्रियन पर्वतीकरण के उदाहरण पाये गये हैं। भारत में अरावली पर्वत इसी युग के पर्वत का उदाहरण है।

फेनोस्कैडिया

[फनिया (Fennia : Finland) + स्कैडिया (Scandia : Scandinavia)]

यह नॉर्डिक क्षेत्र का प्रायद्वीपीय भाग है जिसमें स्कैंडिनेविया प्रायद्वीप फिनलैंड, कारेलिया तथा कोला प्रायद्वीप शामिल हैं। भूविज्ञान की दृष्टि से यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र की आधारी चट्टानें आर्कियन ग्रेनाइट एवं नीस चट्टानों से निर्मित हैं।


2. कैलिडोनियन पर्वत

  • स्कॉटलैंड के प्राचीन पर्वत कैलिडोनिया के नाम पर इस युग के पर्वतों को कैलिडोनियन क्रम के पर्वत कहा गया है। कैलिडोनियन पर्वतीकरण की क्रिया पैल्योजोइक महाकल्य के विभिन्न युगों (विशेषकर सिलूरियन व डिवोनियन युगों) में सम्पन्न हुई।
  • इस समय निर्मित पर्वतों में यूरोप में स्कॉटलैंड व आयरलैंड के पर्वत, स्कैंडिनेवियन पर्वत तथा भारत के विंध्याचल, महादेव व सतपुडा पर्वत प्रमुख हैं। इनमें से अधिकतर पर्वत अब घर्षित या अवशिष्ट पर्वत के रूप में बचे हुए हैं।

3. हर्सीनियन पर्वत

  • कैलिडोनियन पर्वतीकरण के पश्चात् एक शांत काल आरंभ हुआ जो कार्बोनिफेरस युग तक रहा। उसके पश्चात् पैल्योजोइक कल्प के अंतिम चरण में पर्मियन व कार्बोनिफेरस युगों में इन पर्वतों का उद्गम हुआ। जर्मनी के हॉर्ज पर्वत को आधार बनाकर इस काल के पर्वतों का यह नामकरण किया गया है।
  • यूरोप में ब्रिटेन के पर्वत, फ्रांस का ब्रिटेनी पर्वत, वॉस्जेस, ब्लैक फॉरेस्ट, फ्रेंकेनवाल्ड पर्वत एवं एशिया में अल्ताई, तिएनशान, नानशान, अलाई व ट्रांस अलाई, अमूर व गोबी के पर्वत इस युग के पर्वतों में प्रमुख हैं। उत्तरी अमेरिका में अप्लेशियन पर्वत हर्सीनियन काल के प्रमुख पर्वत हैं।

4. अल्पाइन पर्वत

  • हर्सीनियन पर्वतीकरण के पश्चात् एक लंबा शांत काल रहा जो मेसोजोइक महाकल्प के अन्त तक रहा। इस महाकल्प के अंतिम समय में पर्वतीकरण की प्रक्रिया पुनः प्रारम्भ हो गई। परन्तु अधिकांश पर्वत इसके बाद के सेनोजोइक महाकल्प अर्थात् टर्शियरी युग के विभिन्न युगों इयोसीन, ओलिगोसीन, मायोसीन व प्लायोसीन में ही निर्मित हो सके। इसीलिए अल्पाइन पर्वतों को टर्शियरी पर्वत भी कहा जाता है।
  • इस समय के पर्वतों को अल्पाइन क्रम के पर्वत का नाम यूरोप के आल्प्स पर्वत के नाम पर दिया गया है। अल्पाइन पर्वतीकरण के फलस्वरूप प्रायः सभी महाद्वीप में विस्तृत तथा उच्च मोड़दार पर्वतों का निर्माण हुआ है तथा कुछ प्राचीन पर्वतों का उत्थान भी हुआ है।
  • उत्तरी अमेरिका में रॉकी पर्वत, द. अमेरिका में एंडीज पर्वत, यूरोप में अल्पाइन पर्वत क्रम मुख्यतः (आल्प्स, डिनारिक आल्प्स, कारपेथियन, पिरेनीज, बाल्कन, कॉकेशस, कैंटाब्रियन, एपेन्नाइन आदि), अफ्रीका के एटलस पर्वत, एशिया में हिमालय व पामीर की गाँठ से निकलने वाले नवीन मोड़दार पर्वत (जाग्रोस, एलबुर्ज, कुनलुन, काराकोरम आदि), म्यांमार का अराकानयोमा, पूर्वी एशिया के मोड़दार पर्वत, ऑस्ट्रेलिया का ग्रेट डिवाइडिंग रेंज आदि इसी युग के पर्वत हैं।
  • अल्पाइन पर्वतीकरण अभी भी भू-संतुलन की दृष्टि से अस्थिर हैं, क्योंकि यहाँ अभी भी उत्थान जारी है।

विश्व के सर्वाधिक ऊँचे 8 पर्वत

पर्वत

ऊँचाई (मी.में)

अवस्थिति

माउण्ट एवरेस्ट

8848 मी.

नेपाल-तिब्बत सीमा पर

के - 2

8611 मी.

भारत (पाक अधिकृत कश्मीर)

कंचन जंगा

8586 मी.

भारत-नेपाल सीमा पर

ल्होत्से

8516 मी.

नेपाल-तिब्बत सीमा

मकालू

8462 मी.

नेपाल-तिब्बत सीमा

चोओयू

8201 मी.

नेपाल-तिब्बत सीमा

धौलागिरि

8167 मी.

नेपाल

मनास्लू

8156 मी.

नेपाल


विश्व की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ

पर्वत श्रेणी

स्थिति

सर्वोच्च बिंदु

कॉर्डिलेरा-डि-लॉस एंडीज

प.- द. अमेरिका

एकांकागुआ

रॉकी पर्वत श्रेणी

प.-उ. अमेरिका

माउंट एल्बर्ट

 हिमालय-काराकोरम-हिन्दुकुश

द.-मध्य एशिया

माउंट एवरेस्ट

ग्रेट डिवाइडिंग रेंज श्रेणी

पूर्वी ऑस्ट्रेलिया

कोस्युस्को

ट्रान्स अंटार्कटिका पर्वत

अंटार्कटिका

माउंट विन्सन मैंसिफ

तिएनशान श्रेणी

द . मध्य एशिया

पीक पोवेडा

अल्टाई माउंटेन्स श्रेणी

मध्य एशिया

गोरा वेलुखा

यूराल पर्वत श्रेणी

मध्य रूस

गोरा नैरोड्नाया

कमचटका स्थित श्रेणी

पूर्वी रूस

क्ल्यूचेसकाया सोपक

एटलस पर्वत श्रेणी

उ.- प. अफ्रीका

जेवेल टाउब्काल

बर्खोयान्स्क पर्वत श्रेणी

पूर्वी रूस

गोरा मास खाया

पश्चिमी घाट श्रेणी

पश्चिमी भारत

अनाइमुदी

सियरा माद्रे ओरिएंटल

मैक्सिको

ओरीजावा

जाग्रोस पर्वत श्रेणी

ईरान

जाड कुह

एल्बुर्ज श्रेणी

ईरान

देमावंद

स्कैंडिनेवियन रेंज

पश्चिमी नॉर्वे

गैलढोपिजेन

पश्चिमी सियरा माद्रे

मैक्सिको

नेवाडो डि कोलिम

ड्रेकेन्सबर्ग श्रेणी

द.-पूर्व अफ्रीका

दवानाएन्टलेन्याना

कॉकेशस श्रेणी

रूस

एल्ब्रुस

अलास्का श्रेणी

अलास्का

माउंट मैकिन्ले

कास्केड रेंज श्रेणी

सं.रा.अमेरिका, कनाडा

माउंट रेनियर

एपेनाइन श्रेणी

इटली

कोर्नो ग्रैण्डे

अप्लेशियन्स श्रेणी

पूर्वी सं.रा.अमेरिका, कनाडा

माउंट मिशेल

आल्प्स

मध्यवर्ती यूरोप

माउंट ब्लैंक

सियरा माद्रे डेल सुर

मैक्सिको

टियोटेपेक

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