ताप प्रदूषण | कारक | प्रभाव | उपाय | Thermal Pollution | thermal pradushan

ताप प्रदूषण (Thermal Pollution)

ताप प्रदूषण तब होता है जब किसी जल निकाय अथवा वायुमंडल की वायु का तापमान बढ़ या घट जाता है। वायु तापमान की अपेक्षा जल का तापमान सामान्यतः अधिक स्थिर होता है, अत: तापमान में तीव्र और एकाएक परिवर्तन के प्रति जलीय जीवों में अनुकूलन नहीं पाया जाता। तापमान में मात्र 1°C की कमी या वृद्धि जलीय जीवों के लिये घातक हो जाती है।

ताप प्रदूषण के प्रमुख कारक (Major Factors of Thermal Pollution)

ताप प्रदूषण तब होता है जब अपशिष्ट ऊष्मा को जल निकाय के भीतर छोड़ दिया जाता है। वनाग्नि व ज्वालामुखी जैसी प्राकृतिक घटना भी ताप प्रदूषण के लिये ज़िम्मेदार हैं।

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ताप प्रदूषण के निम्नलिखित कारण हैं-
  • परमाणु ऊर्जा संयंत्र।
  • कोयला दहन बिजली संयंत्र।
  • औद्योगिक कचरा व अपवाह। 
  • तटीय इलाकों में वनोन्मूलन।
  • मृदा अपरदन।
ताप प्रदूषण के मानवीय कारणों में वनोन्मूलन, वाष्प जेनरेटरों से गर्म जल को बाहर छोड़ा जाना, धातु प्रगालक, संसाधन मिलें, पेट्रोलियम शोध कारखाने, पेपर मिलें, रसायन संयंत्र आदि शीतलन हेतु जल का प्रयोग करते हैं। अंतत: यह पानी गर्म हो जाता है और ऐसी उद्योग इकाइयों से बहि:स्रावों के रूप में जब यह जल बाहर निकलता है तो उस जल निकाय का तापमान बदल जाता है। इस कारण जल निकाय में घुली ऑक्सीजन का सांद्रण भी घट जाता है क्योंकि गर्म जल में ऑक्सीजन कम घुलनशील होती है।

ताप प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Thermal Pollution)

प्रत्येक प्रजाति एक अनुकूलतम तापमान परास में ही जीवित रह सकती है। कुछ जीवों के लिये जैसे कि कुछ मछलियों के लिये यह तापमान परास बहुत कम होता है, जिससे जल के तापमान में थोड़ा भी परिवर्तन समस्याएँ पैदा कर देता है। उदाहरणत: झीलों की मछलियाँ उस स्थान से दूर हट जाती हैं जहाँ का तापमान सामान्य से 1.5°C भी अधिक हो जाता है मगर नदियों की मछलियाँ 3°C की तापमान वृद्धि सहन कर सकती हैं। उष्णतर जल में मछलियों पर संकट आ सकता है, उस स्थिति में परभक्षियों द्वारा उनका पकड़ा जाना आसान हो जाता है।
तापमान परिवर्तन से जलीय निकाय के भीतर अन्य जीव स्वरूपों के लिये भी दशाएँ बदल जाती हैं जिनके कारण इन जल निकायों के समस्त बायोम में परिवर्तन आ जाता है। ताप प्रदूषण सुपोषण क्रिया को बढ़ावा देता है।

तापीय प्रदूषण के नियंत्रण के उपाय (Measures to Control Thermal Pollution)

  • नाभिकीय संयंत्रों पर नियंत्रण
  • पौधरोपण करना (तटीय क्षेत्रों में)
  • मृदा अपरदन को रोकना (इससे जल को पर्याप्त सूर्य का प्रकाश व ऑक्सीजन प्राप्त होगी)
  • कूलिंग टावर (ये वेस्ट ऊर्जा को वायुमंडल में वाष्प के माध्यम से छोड़ते हैं।)
  • सह-उत्पादन (Co-generation)- इस प्रक्रिया में औद्योगिक जल अपवाह को ठंडा करके घरेलू उपयोग में प्रयोग किया जाता है।
  • कूलिंग तालाब
  • कृत्रिम झील का निर्माण

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