सामवेद | samved

सामवेद samved

ऋग्वेदिक श्लोकों को गाने के लिए चुनकर धुनों में बांटा गया इसी पुर्नव्यवस्थित संकलन का नाम 'सामवेद' पड़ा। इसमें दी गयी ऋचाएं उपासना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के अवसर पर स्पष्ट तथा लयबद्ध रूप से गाई जाती थी।
'साम' का अर्थ 'संगीत' या 'गान' होता है। इसमें यज्ञों के अवसर पर गाये जाने वाले मन्त्रों का संग्रह है। इस मन्त्रों को गाने वाला 'उदगाता' कहलाता था। सामवेद के दो मुख्य भाग है - आर्चिक एवं गान। सामवेद से ही सर्वप्रथम सात स्वरों (स...रे...गा...मा...प...ध...नि...) की जानकारी प्राप्त होती है इसलिए इसे भारतीय संगीत का जनक माना जाता है। सामवेद के मन्त्र सूर्य देवता को समर्पित है।

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सामवेद की प्रमुख शाखायें-

  • कौथुमीय
  • जैमिनीय
  • राणायनीय

वैदिक संहिताओं में सामवेद का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि “वेदानां सामवेदोऽस्मि"। ऋग्वेद के गाये जाने वाले मन्त्र “साम" कहलाते हैं। “ऋच्यध्यूढंसाम" (सायण) अर्थात् ऋचा पर ही साम आश्रित है। उदगाता नामक ऋत्विक् यज्ञ के अवसर पर देवता के स्तुति-परक इन मन्त्रों को विविध स्वरों में गाता है। सामवेद के दो प्रधान भाग हैं- आर्चिक तथा गान। ऋक् - समूह को आर्चिक कहते हैं। इसके भी दो भाग हैं - पूर्वार्चिक और उत्तारार्चिक। पूर्वार्चिक में छः प्रपाठक (अध्याय) हैं। प्रत्येक प्रपाठक में दो अर्धप्रपाठक या खण्ड हैं। प्रत्येक खण्ड में एक "दशति" है, जिसमें प्रायः दस ऋचाएँ होती हैं। उत्तरार्चिक में नौ (9) प्रपाठक हैं। इसके पहले पाँच प्रपाठकों में दो भाग हैं जो अर्ध प्रपाठक कहे जाते हैं। अन्तिम चार प्रपाठकों (छः से नौ) में तीन-तीन अर्धप्रपाठक (अध्याय) हैं। दोनों आर्चिकों की सम्मिलित मन्त्र संख्या 1875 है। ऋग्वेद की 1504 ऋचाएँ सामवेद में उद्धृत हैं। सामान्यतया 75 मन्त्र सामवेद के अपने हैं। सामवेद का दूसरा भाग है गान। ऋग्वेद के भिन्न-भिन्न मण्डलों के ऋषियों के द्वारा दृष्ट ऋचाएँ एक देवता वाचक होने से सामवेद के इस भाग में एकत्र संकलित की गई हैं और इस संकलन को पर्व या काण्ड के नाम से अभिहित करते हैं। जैसे-आग्नेय पर्व। इस पर्व के अन्तर्गत अग्नि विषयक मन्त्रों का समवाय उपस्थित किया गया है। इसी प्रकार ऐन्द्रपर्व, पवमान पर्व, आरण्यक पर्व हैं।
इनके अतिरिक्त महानाम्नन्यार्चिक नामक खण्ड भी है। इस वेद के विभाजन को जटिलता के कारण सम्पूर्ण संहिता में आरम्भ से ही मन्त्र संख्या दी गई है इस वेद की सर्वाधिक प्रचलित शाखा रामायणीय शाखा है। अन्य प्रसिद्ध शाखाएँ कौथुम और जैमिनीय हैं।
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  • सामवेद काव्य पदों का संकलन है जो अधिकतर ऋग्वेद से लिए गए है।
  • सामवेद की रचना ऋग्वेद में दिए गए मंत्रो को गाने योग्य बनाने हेतु के उद्देश्य से की थी।
  • हिन्दू धर्म के प्राचीनतम ग्रन्थ वेदों में से एक।
  • इसमें गाई जा सकने वाली ऋचाओं का संकलन है।
  • इसमें मुख्यतःसूर्य की स्थति के मंत्र है।
  • सामवेद के मंत्रों को गाने वाला पुरोहित उदगाता कहलाता था।
  • यह चारों वेदों में सबसे छोटा है।
  • यह वेद भारतीय संगीत का जनक माना जाता है।
  • सामवेद को भारत की प्रथम संगीतात्मक पुस्तक होने का गौरव प्राप्त है।

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