ऑटोफैगी (AUTOPHAGY)

ऑटोफैगी

2016 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जापान के वैज्ञानिक योशिनोरी ओहसुमी को 'ऑटोफेगी के लिए मेकेनिज्म की खोज' के लिए दिया गया।

क्या है ऑटोफैगी

ऑटोफैगी (AUTOPHAGY) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'ऑटो' जिसका अर्थ स्वयं तथा 'फैगी' शब्द जिसका अर्थ भक्षण से हुयी है। अतः ऑटोफैगी का मतलब स्वतः भक्षण से है। ऑटोफैगी सामान्य मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो शरीर में कोशिकाओं के विनाश के लिए जिम्मेदार है। यह समस्थापन तथा सामान्य कार्यों को प्रोटीन अवक्रमण के द्वारा जारी रखती है तथा नष्ट हुए कोशिका अंगक के बदले नए कोशिका का निर्माण करती है। इसकी अवधारणा 1960 के दशक में तब सामने आयी जब शोधकर्ताओं ने देखा कि कोशिकाएं अपने तत्वों को मेंब्रान में जोड़कर उसे खुद नष्ट कर देती हैं।
1990 के दशक में योशिनोरी ने ऑटोफेगी के आवश्यक जीन की पहचान के लिए बेकर की यिस्ट का उपयोग किया। उन्होंने यिस्ट में ऑटोफैगी की प्रक्रिया को सही तरीके से दर्शाकर यह बताया कि हमारी कोशिकाओं में भी इसी तंत्र का इस्तेमाल होता है। उनकी इस खोज से हमें इस तथ्य की गहरी समझ मिली कि कोशिकाएं अपनी सामग्रियों यानी कंटेंट का पुनर्चक्रण कैसे करती हैं। _शरीर में कोशिकीय तनाव के दौरान स्वभोजिता (ऑटोफैगी) की प्रक्रिया बढ़ जाती है तथा अंततोगत्वा यह प्रक्रिया संपन्न होती है। पोषक तत्वों का अभाव या वृद्धि कारक के कारण कोशिकीय तनाव उत्पन्न होता है। इस प्रकार ऑटोफैगी (स्वभोजिता) अन्त:कोशिकीय मूलभूत अंग के लिए एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करती है तथा अधःस्तर जो ऊर्जा को उत्पन्न कर सकती है, तथा यह कोशिकाओं के निरंतर जीवित रहने के लिए अतिआवश्यक है।
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ऑटोफैगी (स्वभोजिता) तथा कोशिका मृत्यु

कुछ निश्चित दशाओं के अन्तर्गत ऑटोफैगी, कोशिकाओं को मारती (kill) है। ये योजनाबद्ध कोशिका मृत्यु (Programmed Cell death) के रूप हैं तथा इसे ऑटोफैगिक (स्वभोजिता) कोशिका मृत्यु भी कहा जाता है। योजनाबद्ध कोशिका मृत्यु को एपोप्टोसिस कहा जाता है।
विभिन्न तरीके के साथ ऑटोफैगी को नानएपोप्टोसिस सेल डेथ (गैर योजनाबद्ध कोशिका मृत्यु) तथा एपोप्टोसिस के बीच मध्यस्थता के रूप में परिभाषित किया जाता है। ऑटोफैगी, मुख्य रूप से कोशिकीय घटकों के उत्पाद को तथा टूटे हुए या नष्ट हुए अनावश्यक कोशिकीय अंग तथा दूसरे कोशिकीय संघटकों के बीच सामन्जस्य स्थापित करती है।
अवक्रमण के कुछ बड़े तरीके हैं जिसमें प्रोटियासम (एक प्रोटीन जो अन्य प्रोटीनों को तोड़ती है) शामिल होती है जो अल्पायु वाले प्रोटीन्स को तोड़ती है।

ऑटोफैगी तथा तनाव

ऑटोफैगी कोशिकाओं के आंतरिक तनाव में नष्ट हुए कोशिका अंगक का संचय करती है तथा यह कोशिकाओं को संक्रामक बीमारियों या जैविक आक्रमण का सामना करने में सक्षम बनाती है। सभी यूकैरियोटिक तत्व में ऑटोफैगी को देखा जाता है जिसमें कवक, पौधे, अवपंक फफूंदी, सूत्रकृमि, फलमक्खियां तथा कीट, कुतरने वाले जानवर (प्रयोगशाला मूस तथा चूहे) तथा मानव शामिल होते हैं।

ऑटोफैगी के प्रकार

अनेक प्रकार के ऑटोफैगी हैं जो निम्न हैं
  • माइक्रोऑटोफैगी (सूक्ष्मस्वभोजिता): इस प्रक्रिया में कोशिका द्रव्य के अवयव लाइसोसोम झिल्ली के द्वारा स्वतः उठाए जाते हैं।
  • मैक्रोऑटोफैगी (बड़ा स्वभोजिता): ऑटोफैगी (स्वभोजिता) माइक्रोऑटोफैगी-40 (सूक्ष्म स्वभोजिता) से मिलकर बनी होती है। (लाइसोसोम झिल्ली तथा चैपरोन मेडीएटेड ऑटोफैगी (सहचरी मध्यस्थता स्वभोजिता) को शामिल करती है जिसमें वलन के द्वारा कोशिका का सीधा-सीधा घिराव होता है जिससे सहचरी मध्यस्थ स्वभोजिता में प्रोटीन्स विशिष्ट मान्य संकेतों के सहारे लाइसोसोम में, चैपरोन काम्प्लेक्स 41 (सहचरी निगरानी जटिलता) बंधन के द्वारा स्थानान्तरित हो जाते हैं।
स्वास्थ्य तथा बीमारी में आटोफैगी के द्वारा इसका पहचान तथा इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है, तथा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में आटोफैगी के आण्विक लक्षण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं तथा सारी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में बहुत ही सहायक होते हैं। कोशिका विज्ञान तथा रोग की दशा में इसके द्वारा दिए गये संकेत बहुत लाभकारी सिद्ध होते हैं। शुरुआती समय में आटोफैगी की पहचान तनाव को कोशिका के द्वारा दिया जाने वाला प्रतिवाद था, लेकिन वर्तमान में हम जानते हैं कि यह सारा तंत्र आधार स्तर पर चलता है।
यूवीक्यूटिन प्रोटीया सोम तंत्र जो कम अवधि के प्रीटोनो को तोड़ती है, इसके विपरीत ऑटोफैगी लम्बी अवधि के प्रोटीनों को तोड़ती है तथा यह वह प्रक्रिया है, जो सम्पूर्ण कोशिका अंगक को नष्ट करने में सक्षम है जैसेमाइटोकाण्ड्रिया, पेरोक्सीसोम्स तथा अन्तःप्रदव्ययी जालिका। इस प्रकार आटोफैगी कोशिकीय समस्थापन रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इसके अतिरिक्त आटोफैगी विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं में भाग लेती है, जैसे, कोशिका विभेदन, भ्रूणता जहां कोशिका द्रव्य के अधिक भाग के निपटान की आवश्यकता होती है। विभिन्न प्रकार के तनाव के प्रतिक्रिया में ऑटोफैगी तेजी से कोशिकाओं में प्रवेश करती है जो हानिकारक जीवाणुओं से सुरक्षा के महत्व को बताती है तथा कोशिकीय क्षति तथा बढ़ती उम्र से सम्बन्धित बहुत सी बीमारियों से निपटने में सक्षम होती है, क्योंकि ऑटोफैगी प्रवाह में ढील देना का मतलब प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बहुत बड़ी संख्या में मानवीय रोगों को आमंत्रित करना है। ऑटोफैगी विशेष रूप से चिकित्सकीय हस्तक्षेप के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है।
ऑटोफैगी का बीमारियों के संबंध में भूमिका तथा अत्यन्त गहरे ज्ञान की पहली समझ वेकलिन-I के सर्वेक्षण से प्राप्त हुआ जो बी.ई.सी.एन-I जीन का एक उत्पाद है जो मानव के स्तन कैंसर तथा गर्भाशय कैंसर के समय अधिक मात्रा में उत्परिवर्तित होती है। बी.ई.सी.एन. 1, यीस्ट ए. टी.जी. की सजात होती है जो ऑटोफैगी के प्रारम्भ में ही प्रत्येक कदम को विनियमित करती है। इन खोजों ने आटोफैगी की कैंसर 43 में भूमिका को लेकर जनता में एक इच्छा को जागृत कर दिया है।

ऑटोफेगी के उपयोग

  • कैंसर के उपचार में
  • उम्रसंबंधी बीमारियों के उपचार में
  • कोशिका संबंधी बीमारियों के इलाज में
  • मस्तिष्ककुरुपता, देर से शारीरिक विकास के इलाज में
  • कुष्ठता, पार्किन्सन बीमारी के इलाज में।

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