जीव विज्ञान | Biology in Hindi

जीव विज्ञान Biology in Hindi

जीव विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत समस्त जीवधारियों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। जीवधारियों की उत्पत्ति, उनका विकास, कार्यकलाप, उनकी रचना, वातावरण का उन पर प्रभाव तथा उनकी पारम्परिक क्रियाएँ और यहाँ तक कि उनकी मृत्यु, सभी जीव विज्ञान के अन्तर्गत अध्ययन किए जाने वाले विषय हैं। एक महान जीव विज्ञानी चार्ल्स राबर्ट डार्विन (1809-1882) एक पानी के जहाज की यात्रा पर 5 वर्ष की यात्रा के दौरान अनोखे-अनोखे जीव जन्तु और पेड़-पौधे देखे। उनकी जिज्ञासा जागी कि इतने विभिन्न प्रकार के जीव कैसे बने और उन्होंने जीव के विकास के सिद्धान्त (Theory of Evolution-Natural Selection Theory) की स्थापना की।
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अरस्तू (Aristotle; 384-322 BC) यूनान के एक महान दार्शनिक थे तथा इन्होंने जीव विज्ञान के क्षेत्र में काफी अध्ययन किया। इसलिए उन्हें जीव विज्ञान का जनक (Father of Biology) कहा जाता है, लेकिन जीवधारियों के अध्ययन के लिए बायोलॉजी (Biology; Bios-life; logos-study or discourse) शब्द का प्रयोग सबसे पहले फ्रांसीसी प्रकृति वैज्ञानिक लैमार्क (1744-1829) ने किया।

जीव जगत का वर्गीकरण (Classification Of Biology In Hindi)

  • सभी जीव जगत (Organism) को अरस्तू ने जन्तु समूह तथा वनस्पति समूह में जबकि लीनियस ने जन्तु जगत तथा पादप जगत में बाँटा।
  • लीनियस ने आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली की नींव डाली, अतः इनको आधुनिक वर्गीकरण का पिता (Father of Modern Taxonomy) कहते हैं।
  • आर एच व्हिटेकर (1969 ई.) ने समस्त जीवों को पाँच जगतों- मोनेरा, प्रोटिस्टा, फन्जाई, प्लान्टी तथा एनिमेलिया में बाँटा।
मोनेरा (Monera) जगत के जीवों में संगठित केन्द्रक या कोशिकांगों का अभाव होता है। जैसे- जीवाणु, नील-हरित शैवाल, माइकोप्लाज्मा।
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मोनेरा (Monera)

प्रोटिस्टा (Protista) में एक कोशिकीय, यूकैरियोटिक जीव रखे गए हैं। जैसे- एककोशिकीय शैवाल, प्रोटोजोआ, डायटम आदि।
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प्रोटिस्टा (Protista)

कवक (Fungi) विषमपोषी, यूकैरियोटिक जीव हैं। इनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है। इनका शरीर कवक तन्तुओं का बना होता है। जैसे-यीस्ट, मशरूम, पेनिसिलियम।
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कवक (Fungi)

पादप जगत (Plantae) में सेलुलोज की कोशिका भित्ति युक्त बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक जीव रखे गए हैं। ये प्रकाश-संश्लेषण के लिए पर्णहरिम (Chlorophyll) का प्रयोग करते हैं। इस जगत को थैलोफाइटा (शैवाल), के लिए ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, अनावृतबीजी शिश (Gymnosperms) तथा आवृतबीजी (Angiosperm) में बाँटा गया है।
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पादप जगत (Plantae)

जन्तु जगत (Animalia) में यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय और विषमपोषी जीवों को रखा गया है। इनकी कोशिकाओं में कोशिका भित्ति का अभाव होता है। इसे अकशेरुकी (Invertebrata) तथा कशेरुकी (Vertebrata) में बाँटा गया है।
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जन्तु जगत (Animalia)

जीवों के नामकरण की द्विनाम पद्धति

कैरोलस लीनियस नामक वैज्ञानिक जिन्हें वर्गिकी का जन्मदाता (Father of Taxonomy) भी कहा जाता है, ने जीवों की द्विनाम पद्धति का प्रचलन 1753 ई. में किया। इस पद्धति के अनुसार, प्रत्येक जीवधारी का नाम लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर बनता है। पहला शब्द वंश नाम (Generic name) तथा दूसरा शब्द जाति नाम (Species name) कहलाता है।
वंश तथा जाति नामों के बाद उस वर्गिकीविद (वैज्ञानिक) का नाम लिखा जाता है, जिसने सबसे पहले उस जाति को खोजा या जिसने इस जाति को सबसे पहले वर्तमान नाम प्रदान किया। जैसे-मानव का वैज्ञानिक नाम होमो सैपियन्स लिन (Homo Sapiens Linn) है। वास्तव में होमो (Homo) उस वंश का नाम है, जिसकी एक जाति सैपियन्स है। लिन (Linn) वास्तव में लीनियस (Linnaeus) शब्द का संक्षिप्त रूप है। इसका अर्थ यह है कि सबसे पहले लीनियस ने इस जाति को होमोसैपियन्स नाम से पुकारा था।

कुछ जीवधारियों के वैज्ञानिक नाम

मेंढक (Frog)

Rana tigrina

मनुष्य (Man)

Homo sapiens

गाय (Cow)

Bos indicus

बिल्ली (Cat)

Felis domestica

कुत्ता (Dog)

Canis familiaris

मक्खी (Housefly)

Musca domestica


इस प्रकार सभी क्रम एक साथ मिलकर निम्नलिखित टैक्सानोमिक पदानुक्रम बनाती हैं-

किंगडम (Kingdom)
डिवीज़न/फाइलम (Division/Phylum)
वर्ग (Class)
ऑर्डर (Order)
कुटुंब (Family)
जीनस (Genus)
जाति (Species)

जीव विज्ञान की शाखाएँ

नई तकनीकों और नए उपकरणों के विकास ने जीव विज्ञान की नई-नई शाखाओं को जन्म दिया है। इन शाखाओं को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-
  1. मौलिक जीवविज्ञान (Basic Biology)
  2. अनुप्रयोगिक जीवविज्ञान (Applied Biology)

मौलिक जीव विज्ञान (Basic Biology)
  • वनस्पति शास्त्र (Botany)
  • प्राणी शास्त्र (Zoology)
  • सक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology)

जीव विज्ञान की प्रमुख शाखाओं के जनक

जीव विज्ञान की प्रमुख शाखाओं के जनक

शाखा

जनक

जीव विज्ञान

अरस्तू

जन्तु विज्ञान

अरस्तू

वनस्पति विज्ञान

थियोफ्रेस्टस

वर्गिकी

लीनियस

आनुवंशिकी

ग्रेगर मेंडल

जीवाश्मिकी

लियोनार्डो डी विन्सी

चिकित्सा शास्त्र

हिप्पोक्रेट्स

सूक्ष्म जीव विज्ञान

लुई पाश्चर

आधुनिक भ्रूण विज्ञान

वॉन बेयर

जीवाणु विज्ञान

ल्यूवेनहॉक

कवक विज्ञान

माइकेली

प्रतिरक्षा विज्ञान

एडवर्ड जेनर

कोशिका विज्ञान

राबर्ट हुक

भारतीय पारिस्थितिकी

आर. मिश्रा

भारतीय ब्रायोलॉजी

आर.एस. कश्यप

भारतीय शैवाल विज्ञान

एम.ओ.ए. आंयगर


जीव विज्ञान की विभिन्न शाखाएँ

मौलिक जीव विज्ञान (Basic Biology)
जीवविज्ञान की वे शाखाएँ जिनके अन्तर्गत पेड़-पौधों, प्राणियों अथवा सूक्ष्मजीवों के बारे में मौलिक अध्ययन किया जाता है इस श्रेणी में आती हैं।
इन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है-
  1. वनस्पति शास्त्र (Botany)
  2. जन्तुविज्ञान (Zoology)
  3. सूक्ष्म जीव विज्ञान (Microbiology)

1. वनस्पति शास्त्र (Botany)
वनस्पतिशास्त्र के अन्तर्गत पेड़-पोधे (पादपों) के बारे में संपूर्ण अध्ययन किया जाता है।
इसकी विभिन्न शाखाएँ इस प्रकार है
  • शारीरिकी (Anatomy) पौधों की आन्तरिक संरचना का अध्ययन
  • कोशिका विज्ञान (Cytology) कोशिकागों की संरचना का अध्ययन
  • कोशिका जैविकी (Cell biology) कोशिकागों की संरचना एवं कार्यों का अध्ययन
  • पारिस्थितिकी (Ecology) पादपों एवं उनके वातावरण के सम्बन्धों का अध्ययन
  • भ्रूणविज्ञान (Embryology) पादप भ्रूण के विकास का अध्ययन
  • वृक्ष विज्ञान (Dendrology) वृक्षों का गहन अध्ययन
  • पराग विज्ञान (Palanology) आवृत्त एवं अनावृत्तबीजी पौधों के परागकणों का अध्ययन
  • पादप जीवाश्म विज्ञान (Paleobotany) पादप जीवाश्मों का अध्ययन
  • पादप कार्यकी (Plant physiology) पादप के विभिन्न अंगों के कार्यों का अध्ययन
  • वर्गीकी (Taxonomy) पादपों के वर्गीकरण प्रणाली का अध्ययन
  • शैवाल विज्ञान (Algology) शैवाल समूह का व्यापक अध्ययन
  • ब्रायोलॉजी (Bryology) ब्रायोफाइटा समूह का व्यापक अध्ययन
  • टेरिडोलॉजी (Teridology) फर्न आदि का अध्ययन

2. जन्तुविज्ञान (Zoology)
अरस्तू को जीवविज्ञान का पिता माना जाता है। जन्तु विज्ञान अथवा प्राणी शास्त्र विज्ञान के अन्तर्गत प्राणी जगत के सम्पूर्ण प्राणियों के विषय में अध्ययन किया जाता है।
इसकी विभिन्न शाखाएँ निम्न प्रकार हैं-
  • औतिकी (Histology)
  • भ्रूण विज्ञान (Embryology)
  • आनुवांशिकी (Genetics)
  • प्राणी कार्यिकी (Animal physiology)
  • प्राणी जीवाश्म विज्ञान (Palbeeontology)
  • कोशिका विज्ञान (Cytology)
  • कोशिका जैविकी (Cell biology)
  • अन्तः स्राविकी (Endocrinology)
  • हरपेटोलॉजी (Herpetology) सरीसृपों का अध्ययन।
  • इक्थियोलॉजी (Ichthyology) मत्स्य (fishes) का अध्ययन।
  • प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology) रोगों के प्रति शारीरिक प्रतिरक्षा से सम्बन्धित अध्ययन।
  • ओडोन्टोलॉजी (Odontology) दाँतों का अध्ययन।
  • विष विज्ञान (Toxicology) विषैले पदार्थों व उनका जन्तुओं के शरीर पर प्रभाव का अध्ययन।
  • ऑफिओलॉजी (Ophiology) सर्पो (snakes) का अध्ययन।
  • लेपिडोप्टेरोलॉजी (Lepidopterology) मॉथ एवं तितली का अध्ययन।
  • मैमलॉजी (Mammalogy) स्तनधारियों का अध्ययन।
  • मायोलॉजी (Myology) पेशियों का अध्ययन।
  • न्यूरोलॉजी (Neurology) तन्त्रिका तन्त्र का अध्ययन।
  • ऑन्कोलॉजी (Oncology) कैन्सर एवं गाँठ (tumour) का अध्यन।
  • ऑर्निथोलॉजी (Ornithology) पक्षियों का अध्ययन।
  • सेरीकल्चर (Sericulture) रेशम उत्पादन का अध्ययन।

3. सूक्ष्म जीव विज्ञान (Microbiology)
जीव विज्ञान की इस शाखा में सूक्ष्मजीवों; जैसे जीवाणु, विषाणु माइकोप्लाज्मा आदि का अध्ययन करते हैं। इसकी कुछ शाखाएँ निम्न प्रकार हैं-
  • जीवाणु विज्ञान जीवाणुओं का अध्ययन
  • विषाणु विज्ञान विषाणुओं का अध्ययन

अनुप्रायोगिक जीव विज्ञान (Applied Biology)

जीव विज्ञान की इस शाखा में उन विषयों का अध्ययन किया जाता है जो कि मानव समाज के उत्थान में उपयोगी है। इन्हें मुख्य रुप से चार भागों में बाँटा गया है-
  1. कृषि विज्ञान (Agriculture)
  2. चिकित्सा विज्ञान (Medical Science)
  3. पशु चिकित्सा विज्ञान (Veterinary Science)
  4. औषधि विज्ञान (Pharmacy)

कृषि विज्ञान (Agriculture)
इसके अन्तर्गत मानव उपयोग में आने वाले पादपों एवं जन्तुओं का पालन पोषण करके उनके उत्पादों के प्रयोगों का अध्ययन किया जाता है।

चिकित्सा विज्ञान (Medical Science)
मानव शरीर में होने वाले रोगों एवं विकारों उनके कारण एवं उपचारों का अध्ययन विज्ञान की इस अनुप्रायोगिक शाखा में किया जाता है। हिप्पोक्रेट्स को आधुनिक चिकित्सा पद्धति का जनक माना जाता हैं।

पशु चिकित्सा विज्ञान (Veterinary Science)
पशुओं में होने वाली बीमारियों उनके कारण एवं उपचार का अध्ययन इस विज्ञान के अन्तर्गत किया जाता है।

औषधि विज्ञान (Pharmacy)
इसके अन्तर्गत औषधि निर्माण, औषधि प्रभाव, गुण तथा वितरण से सम्बन्धित अध्ययन किया जाता है।
  1. औषधि निर्माण-विज्ञान (Pharmaceutics) इसमें औषधियों के निर्माण सम्बन्धी अध्ययन किया जाता है।
  2. औषधि प्रभाव-विज्ञान (Pharmacology) विभिन्न औषधियों के प्रभाव सम्बन्धी अध्ययन इसके अन्तर्गत किए जाते हैं।

जीव विज्ञान का दुरुपयोग

जीव विज्ञान की कई नई तकनीकों का मानव द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। इनमें से निम्न दो उदाहरण इस प्रकार हैं।
  • ऐम्नियोसेन्टेसिस (Amniocentesis) गर्भ एम्निओटिक द्रव में तैरता रहता है। इस विधि में इन्जेक्शन की सहायता से माता के गर्भाशय में से इस द्रव का सैम्पल ले लिया जाता है। द्रव में स्थित कोशिकाओं को संवर्धन किया जाता है। इसके बाद कोशिकाओं के गुणसूत्रों का निरीक्षण करके उनमें अपसामान्यताओं (Abnormalities) का अध्ययन करते हैं। इस विधि द्वारा गर्भावस्था के प्रारम्भ में ही गर्भ की उपापचयी अव्यवस्थाओं (metabolic and genetic errors) का बोध हो जाता है। किसी घातक या गम्भीर अव्यवस्था की दशा में गर्भ को गिरा देते हैं। इस प्रकार जन्म से पूर्व गर्भ के रोग निदान को ऐम्नियोसेन्टेसिस परीक्षण द्वारा सम्भव हैं।
  • जैव हथियार (Bioweapons) कुछ जीवाणुओं का प्रयोग कुछ देश अपने दुश्मन देशों में बीमारियाँ फैलाने के लिए करते हैं। ये जीवाणु जैव प्रतिरक्षी विरोधी होते है तथा महामारी (epidemic) फैला देते है। इस प्रकार से जीवाणुओं का प्रयोग एक हथियार के रूप में करके विज्ञान का दुरुपयोग किया जा रहा है।

BRANCHES OF BIOLOGY IN HINDI

John Ray

प्रमुख वैज्ञानिक थे, जिन्होंने जीवधारियों के वर्गीकरण को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

Taxonomy

जीव विज्ञान की शाखा, जिसमें जीवों को अध्ययन के द्वारा निश्चित समूह या वर्ग में रखा जाता हैं।

Morphology

इसमें जीवों के बाह्य आकार, स्वरूप का अध्ययन किया जाता हैं।

Anatomy

जीवों की आंतरिक संरचना का अध्ययन।

Histology

जीवों के विभिन्न प्रकार के ऊतकों का अध्ययन।

Physiology

जीवों के अन्दर होने वाले जैविक क्रियाओं का अध्ययन।

Cytology

कोशिकाओं का अध्ययन।

Molecular Biology

आनुवंशिक पदार्थों का अध्ययन।

Embryology

इस शाखा में युग्मक जनन, निषेचन, Zygote तथा Embryo के रचना का अध्ययन किया जाता हैं।

Genetics

जीवों में पायी जाने वाली विभन्नता, समानता एवं आनुवंशिकता का अध्ययन किया जाता है।

एन्जियोलॉजी

रूधिर वाहिनी के अध्ययन।

Palaeontology

इसमें जीवाश्मों (Fossils) का अध्ययन किया जाता हैं।

Exobiology

इसमें अंतर्गत पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर जीवन की सम्भावनाओं का अध्ययन।

Apiculture

मधुमक्खियों के पालन से संबंधित अध्ययन।

Sericulture

सिल्क पैदा करने वाले कीड़ों को पालने व सिल्क निकालने की विधियों का अध्ययन।

Pisciculture

मत्स्य पालन का अध्ययन।

Forensic Science

इसमें रूधिर वर्ग, finger prints इत्यादि का अध्ययन कर अपराध का पता लगाने में किया जाता हैं।

Ecology

पारिस्थतिकी तंत्र का अध्ययन।

Eugenics

इसमें आनुवंशिकता के आधार पर मानव जाति के श्रेष्ठ बनाये जाने की विधियों का अध्ययन करते हैं।

Euthenics

मनुष्य की आधुनिक पीढ़ी का अच्छे पालन-पोषण द्वारा सुधार का अध्ययन।

Entomology

इसमें कीटों का अध्ययन।

Mycology

कवकों का अध्ययन।

Phycology

शैवालों का अध्ययन।

Dendrology

वृक्षों एवं झाड़ियों का अध्ययन।

Anthology

पुष्पों का अध्ययन।

Ornithology

पक्षियों का अध्ययन।

Pomology

फलों का विज्ञान।

Ichthyology

मछलियों का अध्ययन।

Ophiology

सर्पो का अध्ययन-सर्प विज्ञान।

Arboriculture

सजावटी वृक्ष तथा झाड़ियों का अध्ययन।

Agronomy

शस्य, खेतों में उगायी जाने वाली फसलों एवं मिट्टी का अध्ययन।

Olericulture

सब्जियों का अध्ययन।

Osteology

अस्थि एवं कंकाल तंत्र का अध्ययन।

Sarcology

पेशियों का अध्ययन।

Chondrology

उपास्थि का अध्ययन।

Cryogenics

जन्तुओं के शरीर पर शीत (Cold) का अध्ययन।

Myrmecology

चींटियों का अध्ययन।

Herpatology

सरीसृपों की अध्ययन।

Arachnology

मकड़ियों का अध्ययन।

Saurology

छिपकलियों का अध्ययन।

Ethnology

मनुष्य की जातियों का अध्ययन।

Kalology

मानवीय सौंदर्य का अध्ययन।

Gerontology

प्राणियों के शरीर पर आयु के प्रभाव का अध्ययन।

Hypnology

नींद का अध्ययन।


कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
  • जीव विज्ञान को विज्ञान की एक अलग शाखा में स्थापित करने का श्रेय अरस्तु (Aristotle 384BC-322BC) को जाता है।
  • Father of Biology - Aristotle (अरस्तु)
  • जीव विज्ञान शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1801 ई. में "लैमार्क" और "ट्रेविरेनस (जर्मनी)" नामक दो वैज्ञानिकों ने किया था।
  • जीव विज्ञान की मुख्य शाखाएँ है- वनस्पति विज्ञान (Botany), तथा प्राणी विज्ञान (Zoology)
  • Father of Botany- Theophrastus (थियोफ्रेस्टस -370BC - 285BC)
  • Book - "Historia Plantarum” के लेखक Theophrastus हैं, जिन्होंने इसमें 500 किस्म के पौधों का वर्णन किया हैं।
  • इसी प्रकार अरस्तु (Aristotle) ने अपनी पुस्तक "Historia Animalium” में लगभग 500 जन्तुओं का वर्णन किया हैं।
  • Father of Zoology - Aristotle.
  • मानव से संबंधित बीमारियों के सम्बन्ध में सर्वप्रथम Hippocrates (460BC-370BC) ने लेख लिखा।
  • Father of Medicine - Hippocrates.
  • जीव मंडल में जंतुओं की लगभग 12 लाख जातियों को सम्मिलित किया गया है।
  • केवल प्लाण्टी जगत के सदस्यों में vacule पायी जाती है।

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