हाइड्रोजन (Hydrogen) Hydrogen in hindi

हाइड्रोजन (Hydrogen)

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है। यह अन्य सभी तत्वों से हल्का होता है। इसका संकेत (symbol) 'H' तथा परमाणु संख्या 1 होता है। इसका परमाणु द्रव्यमान 1.008 होता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 15' होता है। इसे आवर्त सारणी के उपवर्ग I A में रखा गया है। यह 'S' – ब्लॉक का सदस्य है। कुछ मामले में हाइड्रोजन की समानता हैलोजन् के साथ होने के कारण इसे इन तत्वों के साथ उपवर्ग VII A में भी रख दिया गया है। प्रथम तत्व होने के कारण हाइड्रोजन का आवर्त सारणी में स्थान कुछ विचित्र-सा है पृथ्वी पर पाये जाने वाले तत्वों में हाइड्रोजन का 9वाँ स्थान है।
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सूर्य और तारों का आधा भाग हाइड्रोजन का बना है। हाइड्रोजन को भविष्य का ईधन कहा जाता है। इसके नाभिक में सिर्फ एक प्रोटॉन (Proton) होता है। यह आवर्त सारणी का एकमात्र ऐसा तत्व है, जिसके नाभिक में न्यूट्रॉन नहीं पाया जाता है। इसकी खोज 1766 ई० में हेनरी कैवेंडिस ने की। हाइड्रोजन सभी अम्लों का अनिवार्य अंग है। (DAVY) का कथन)
  • हाइड्रोजन ब्रह्मांड (विश्व) में सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्त्व है।
  • हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्त्व है, जिसका परमाणु क्रमांक 1 होता है।
  • हाइड्रोजन की खोज सन् 1776 ई. में हेनरी केवेंडिश ने की थी।
  • हाइड्रोजन के कुछ गुणों की समानताएँ क्षार धातुओं तथा कुछ गुणों की समानताएँ हैलोजन्स से होती हैं। अतः हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में एक उचित स्थान नहीं दिया जा सका है, जो आवर्त सारणी का एक दोष है।

हाइड्रोजन के प्रकार (Types of hydrogen)

पारमाणविक हाइड्रोजन (Atomic hydrogen)
  • हाइड्रोजन गैस (H2) को सामान्य दाब व 4000-4500°C ताप पर दो टंगस्टन छड़ों के बीच विद्युत आर्क के माध्यम से प्रवाहित करने पर पारमाणविक हाइड्रोजन प्राप्त होता है।
  • पारमाणविक हाइड्रोजन का जीवन काल 0.3 सेकंड होता है। अतः यह तुरंत ही आणविक हाइड्रोजन (H2) में परिवर्तित हो जाता है तथा अत्यधिक ऊर्जा निर्मुक्त करता है। इस ऊर्जा का प्रयोग काटने व वेल्डिंग हेतु किया जाता है।
नवजात हाइड्रोजन (Newborn hydrogen): यह रासायनिक अभिक्रियाओं में किसी यौगिक द्वारा तुरंत ही निकाली हुई हाइड्रोजन होती है जो आणविक हाइड्रोजन से अधिक क्रियाशील होती है।

ऑर्थो हाइड्रोजन (Ortho hydrogen): डाइ हाइड्रोजन के एक अणु में हाइड्रोजन (H) के दो परमाणु होते हैं। दोनों परमाणुओं के नाभिक यदि एक ही दिशा में चक्रण गति (Spin motion) करते हैं तो इस रूप को ऑर्थो हाइड्रोजन कहते हैं।

पैरा हाइड्रोजन (Para hydrogen): डाइ हाइड्रोजन के अणु में हाइड्रोजन (H) के दोनों परमाणुओं के नाभिक यदि विपरीत दिशा में चक्रण गति करते हैं तो इस रूप को पैरा हाइड्रोजन कहते हैं।

हाइड्रोजन निर्माण की विधि

1. लाल तप्त लोहे पर भाप प्रवाहित करने पर हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है।
3Fe+4H2O-Fe304+4H2

2. हाइड्रोलिथ की जल से प्रतिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है।
CaH2+2H2O-Ca(OH)2+H2↑

3. सोडियम की जल के साथ प्रतिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस प्राप्त होती है।
2Na+2H2O-2NaOH+H2↑

हाइड्रोजन के उपयोग

  • अन्य गैसों के साथ मिश्रित कर ईंधन के रूप में
  • वनस्पति घी के निर्माण में
  • गैसोलिन के उत्पादन में
  • हल्की गैस होने के कारण बैलून में भरने में इसका उपयोग होता है
  • द्रव हाइड्रोजन रॉकेट ईंधन के रूप में प्रयुक्त होता है।

ड्रयूटेरियम : ड्यूटेरियम को भारी हाइड्रोजन कहा जाता है। ड्यूटेरियम का उपयोग कार्बनिक प्रतिक्रियाओं की क्रियाविधि समझाने में तथा नाभिकीय प्रतिक्रियाओं (Nuclear Reactions) में बमबारी के लिए होता है।

भारी जल : ड्यूटेरियम के ऑक्साइड को भारी जल कहा जाता है, क्योंकि इसमें ड्येटेरियम (D) होता है, जो हाइड्रोजन का एक भारी समस्थानिक है। भारी जल को भारी कहा जाता है, क्योंकि इसका घनत्व साधारण जल से अधिक होता है। भारी जल का उपयोग ड्यूटेरियम के अनेक यौगिकों के निर्माण में तथा यूरेनियम के नाभिकीय विखण्डन में तीव्रगामी न्यूट्रानों को मंद करने के लिए न्यूट्रॉन मंदक (Neutron Moderator) के रूप में होता है।

विशेषः-
हाइड्रोजन पेरॉक्साइड की संरचना एक खुली हुई पुस्तक की तरह होती है, जिसके खुले हुए दोनों पृष्ठों के मध्य 94° का कोण होता है और अक्ष पर दो ऑक्सीजन परमाणु तथा दोनों पृष्ठों पर एक-एक हाइड्रोजन परमाणु होते हैं तथा H-0. कोण 97° का होता है।

जलः जल एक यौगिक है। शुद्ध जल उदासीन होता है, अर्थात् इसका pH मान 7 होता है। शुद्ध जल विद्युत् का कुचालक होता है जबकि अम्लीय जल विद्युत् का सुचालक होता है। जल शून्य डिग्री (O°) सेण्टीग्रेड पर सफेद बर्फ में परिवर्तित हो जाता है। वर्षा जल सर्वाधिक शुद्ध जल होता है। सम्पूर्ण जल का 97% भाग समुद्री वातावरण में पाया जाता है, शेष बचा हुआ 3% भाग ही स्वच्छ जल के रूप में जाना जाता है। जल का बर्फ में परिणत होना तथा वाष्प में परिवर्तित होना भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है।

विशेषः-
  • केतली में जल उबालने पर उसकी आंतरिक परत में सफेद रंग की परत जम जाती है, जो कैल्सियम व मैग्नीशियम के कार्बोनेट्स होते हैं।
  • जल हाइड्रोजन बन्ध (Hydrogen Bond) के कारण द्रव अवस्था में पाया जाता है।
  • जल का शुद्धीकरण पोटैशियम परमैंगनेट, क्लोरीन गैस, पोटाश एलम आदि द्वारा किया जाता है।
  • पॉली वाटर (Poly water): पॉली वाटर सामान्य जल को बाल की आकर की नलिका से गुजाकर बनाया जाता है। यह पृथ्वी पर एक खतरनाक वस्तु मानी जाती है।

हाइड्रोजन गैस [Hydrogen (H2) gas]

  • यह एक रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन गैस है जो अत्यधिक ज्वलनशील होती है।
  • यह ज्ञात सर्वाधिक हल्का तत्त्व है, जिसका घनत्व वायु का होता है। साधारण ताप व दाब पर 1 लीटर हाइड्रोजन का वज़न केवल 0.0899 ग्राम होता है।
  • धातुओं (Na, K, Ca आदि) पर जल की क्रिया, जल (H2O) के विद्युत अपघटन तथा अम्ल, क्षार की क्रिया से हाइड्रोजन प्राप्त की जाती है।
  • हाइड्रोजन को जलाने पर जल (H2O) प्राप्त होता है।
  • प्रयोगशाला में दानेदार जस्ता (Granulated zinc) पर सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया द्वारा हाइड्रोजन प्राप्त की जाती है।
  • व्यापारिक स्तर पर जल के वैद्युत अपघटन द्वारा, कोक हाइड्रो कार्बन पर भाप की क्रिया द्वारा, तप्त लोहे पर भाप व जल गैस प्रवाहित करके हाइड्रोजन (H2) गैस प्राप्त की जाती है।
उपयोग (Uses)
  • उच्च दाब पर वनस्पति तेल, निकिल उत्प्रेरक की उपस्थिति में जब हाइड्रोजन से संयोग करते हैं तो वनस्पति घी में बदल जाते हैं, यह प्रक्रिया तेलों का हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation of oil) कहलाती है।
  • हैबर विधि द्वारा अमोनिया के निर्माण में हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है।
  • अंतरिक्ष अनुसंधानों में रॉकेट ईंधनों के रूप में द्रव ऑक्सीजन व द्रव हाइड्रोजन का प्रयोग किया जाता है।
  • धातुओं को काटने व वेल्डिंग करने हेतु हाइड्रोजन का प्रयोग 'ऑक्सी हाइड्रोजन टॉर्च' के रूप में किया जाता है।
  • ईंधन सेल, संश्लेषित पेट्रोल (Synthetic petrol) आदि बनाने में डाई हाइड्रोजन का प्रयोग किया जाता है।
  • सामान्यतः गुब्बारे में हाइड्रोजन गैस भरी जाती है।

भारी हाइड्रोजन/ड्यूटीरियम [Heavey hydrogen/deuterium (D)]
यूरे (Urey) नामक वैज्ञानिक ने अपने प्रयोगों द्वारा बताया कि साधारण हाइड्रोजन में लगभग 0.0156% भारी हाइड्रोजन (D2) होता है।
भारी हाइड्रोजन (D2) तथा भारी जल (D2O) की खोज के लिये यूरे को 1934 में नोबेल पुरस्कार दिया गया।
साधारण जल के 6000 भागों में लगभग 1 भाग भारी जल (D2O) का होता है अतः भारी जल का विद्युत अपघटन करके, भारी जल की सोडियम धातु से अभिक्रिया कराकर, लाल तप्त (Red hot) लोहे पर भारी जल का वाष्प प्रवाहित करके ड्यूटीरियम गैस (D2) प्राप्त की जाती है।

समस्थानिक प्रभाव (Isotope effect)
एक ही तत्त्व के समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं किंतु ड्यूटीरियम का परमाणु द्रव्यमान (2) हाइड्रोजन (1) की तुलना में अधिक होने के कारण हाइड्रोजन की अपेक्षा ड्यूटीरियम की रासायनिक अभिक्रियाओं की दर धीमी होती है, यह घटना ‘समस्थानिक प्रभाव' (Isotope effect) कहलाती है।
उपयोग (Uses)
  • नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion) क्रिया में, कृत्रिम विघटन प्रक्रियाओं में ड्यूटीरियम का प्रयोग एक भारी प्रक्षेप्य (Heavy projectile) के रूप में किया जाता है।
  • विभिन्न जैव रासायनिक क्रियाओं में ड्यूटीरियम का प्रयोग सूचक (Tracer) के रूप में किया जाता है।
  • नाभिकीय रिएक्टरों में ड्यूटीरियम का प्रयोग मंदक के रूप में किया जाता है।

मृदु जल (Soft water)
  • वह जल जो साबुन के साथ आसानी से झाग देता है, मृदु जल कहलाता है।
  • भार के अनुसार जल में 11.11% हाइड्रोजन पाया जाता है।

कठोर जल (Hard water)
  • वह जल जो साबुन के साथ आसानी से झाग नहीं देता है, कठोर जल कहलाता है।
  • जल की कठोरता दो प्रकार की होती है:
  • अस्थायी कठोरता
  • स्थायी कठोरता

अस्थायी कठोरता (Temporary hardness)
  • जल की अस्थायी कठोरता, जल को उबालने से दूर की जा सकती है।
  • जल की अस्थायी कठोरता उसमें उपस्थित कैल्सियम व मैग्नीशियम के बाईकार्बोनेट के कारण होती है।
  • जल में बुझा चूना Ca(OH)2 मिला देने पर भी अस्थायी कठोरता दूर हो जाती है।

स्थायी कठोरता (Permanent hardness)
  • जल की स्थायी कठोरता उसमें उपस्थित कैल्सियम व मैग्नीशियम के सल्फेट व क्लोराइड के कारण होती है।
  • यदि जल की कठोरता उसे उबालने पर दूर नहीं की जा सकती तो इसे स्थायी कठोरता कहते हैं।
  • जल की स्थायी कठोरता दूर करने की मुख्य विधि परम्यूटिट विधि (Permutit Method) है। परम्यूटिट, सोडियम जिओलाइट (Na2AI2Si2O8.xH2O) को कहा जाता है।
  • जल में सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) मिलाकर उबालने से स्थायी कठोरता व अस्थायी कठोरता दोनों दूर की जा सकती हैं।

हाइड्रोजन परॉक्साइड [Hydrogen peroxide (H2O2)]

  • शुद्ध हाइड्रोजन परॉक्साइड हल्का नीला (Pale blue) रंग का गाढ़ा द्रव होता है।
  • थीनार्ड (J.L. Thenard) ने बेरियम परॉक्साइड पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया द्वारा सर्वप्रथम हाइड्रोजन परॉक्साइड प्राप्त किया तथा इसका नाम 'ऑक्सीजिनेटिड वाटर' रखा।
  • व्यापारिक स्तर पर 2-एथिल एंथ्राक्विनोल के स्वतः ऑक्सीकरण द्वारा तथा सल्फ्यूरिक अम्ल के वैद्युत अपघटन द्वारा हाइड्रोजन परॉक्साइड प्राप्त की जाती है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड त्वचा पर फफोले डाल देती है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अवकारक दोनों की भाँति कार्य करता है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड अपने ऑक्सीकारक गुण के कारण विरंजक (Bleaching agent) का कार्य करता है। यह रेशम, ऊन, बाल, हाथी दाँत आदि का विरंजन कर देता है।
उपयोग (Uses)
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग तनु विलयन कीटनाशी (Germicide) के रूप में, प्रतिरोधी (Antiseptic) के रूप में घाव धोने, कान व दाँत साफ करने, गरारे करने आदि में किया जाता है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग रॉकेट, जेट आदि के ईंधन तथा किसी अन्य ईंधन के ऑक्सीकारक के रूप में किया जाता है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग भोज्य पदार्थ परिरक्षक (Food preservative) के रूप में किया जाता है।
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग काले पड़े पुराने तेल चित्रों (Oil paintings) का रंग उभारने में किया जाता है।

हाइड्रोजन के समस्थानिक

हाईड्रोजन के तीन समस्थानिक होते है-
  1. प्रोटियम
  2. ड्यूटीरियम
  3. ट्राईटियम

हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था

संसार जीवाश्म सुरक्षित कोष शीघ्र गति से समाप्त हो रहा है। इस असमंजस का सामना करने के लिए वैज्ञनिकों ने आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन का अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत में प्राप्त करने की विधि को उत्पन्न करने के लिए अथक प्रयास किए हैं। हाइड्रोजन गैस ऑटोमोबाइल्स में गैसोलीन की जगह प्रयोग हो सकती है। वास्तव में, इंजन में कुछ रूपांतर करके और ऑक्सीजन का उपयोग ईंधन सैलों में विद्युत उत्पन्न करने के लिए इन तरीकों से हाइड्रोजन के उपयोग का अधिक लाभ है कि अभिक्रियाएं प्रदूषण से मुक्त होती है हाइड्रोजन चलित ईंधन और ईंधन सेलों में बनने वाला अतिय उत्पाद पानी होगा जैसे कि हाइड्रोजन गैस का हवा में जलना वास्तव में हाइड्रोजन की अर्थव्यवस्था की सफलता निर्भर करेगी, हम किस प्रकार कम खर्च में हाइड्रोजन का उत्पादन करते हैं और किस प्रकार आसानी से इसका भंडारण कर सकते हैं।
यद्यपि बड़े पैमाने पर पानी के विद्युत अपघटन से हाइड्रोजन प्राप्त करने में अत्यधिक ऊर्जा खर्च होती है, यदि वैज्ञानिक पानी के अणुओं का विखंडन करने के लिए कोई प्रायोगिक विधि का प्रयोग कर सकते है तो हम समुद्र के पानी से अत्यधिक मात्रा में हाइड्रोजन प्राप्त कर सकते हैं। आजकल सूर्य ऊर्जा के उपयोग के विकास का एक तरीका है।
इस प्रणाली में उत्प्रेरक (एक संकुल अणु, जिसमें एक या अधिक संक्रमण तत्व जैसे रुथैनियम होते हैं) सूर्य विकिरण से एक फोटान अवशोषित करता है और ऊर्जीय रूप से उत्तेजित हो जाता है। उत्तेजित अवस्था में उत्प्रेरक पानी के अणु का हाइड्रोजन में अपचयन करने में सक्षम होता है।

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