रसायन विज्ञान | रसायन विज्ञान की परिभाषा | chemistry in hindi

रसायन विज्ञान

विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत द्रव्यों की संरचना, ऊष्मा और ऊर्जा के कारण इनमें होने वाले परिवर्तन एवं इनकी पारस्परिक क्रिया-प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जाता है, रसायन विज्ञान कहलाता है।
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Chemistry (रसायन विज्ञान) शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द कीमिया (Chemia) से हुई है, जिसका अर्थ होता है- काला रंग।

रसायन विज्ञान के जनक

एंटोनी लौरेंट लेवोसियर (Antoine Laurent Lavoisier) को आधुनिक रसायन विज्ञान का जन्मदाता कहा जाता है।
father of chemistry

रसायन विज्ञान की शाखाएं

रसायन विज्ञान को पुनः इसके अंतर्गत पढ़े जाने वाले द्रव्यों एवं अभिक्रियाओं की प्रकृति के आधार पर चार भागों में बाँटा जाता है-
  1. भौतिक रसायन (Physical chemistry)
  2. अकार्बनिक रसायन (Inorganic chemistry)
  3. कार्बनिक रसायन (Organic chemistry)
  4. नाभिकीय रसायन (Nuclear chemistry)

भौतिक रसायन (Physical Chemistry)

रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत तत्व की रासायनिक संरचना पर इसके भौतिक गुणों की निर्भरता और रासायनिक प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप होने वाले भौतिक परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है, भौतिक रसायन कहलाता है।
इसके अंतर्गत हम द्रव्य की अवस्थाएँ, शुद्ध द्रव्य एवं मिश्रण, द्रव्यों का गलनांक हिमांक, विलयन की सान्द्रता, द्रव्यों की क्षारीयता अम्लता आदि के बारे में पढ़ते हैं।

अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry)

रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत कार्बन के अतिरिक्त अन्य सभी तत्वों के यौगिकों के बारे में अध्ययन किया जाता है, अकार्बनिक रसायन कहलाता है।
इसके अंतर्गत मुख्यतः हम तत्वों का आवर्त सारणी में स्थान, उनकी परमाण्विक एवं आण्विक संरचना, उनके रासायनिक गुण, उनकी क्रियाशीलता, उनकी स्थिरता, संयोजकता आदि का अध्ययन करते हैं।

कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry)

रसायन विज्ञान की इस शाखा के अंतर्गत कार्बन तत्व से बने विभिन्न यौगिकों के बारे में अध्ययन किया जाता है।
इसके अंतर्गत कार्बन परमाणुओं की लंबी श्रृंखलाओं के कारण बने सैकड़ों यौगिकों जैसे ईथर, कार्बोहाइड्रेट, अल्कोहल, कीटोन आदि का अध्ययन किया जाता है।

नाभिकीय रसायन (Nuclear chemistry or Radio chemistry)

रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत रेडियो सक्रिय तत्वों (Radioactive elements) का अध्ययन किया जाता है, नाभिकीय रसायन या रेडियो रसायन कहलाता है।

रसायन विज्ञान


भौतिक रसायन
अभिक्रियाएँ अवस्थाएँ अवस्था परिवर्तन

अकार्बनिक रसायन
आवर्त सारणी तत्वों की मूल प्रवृत्ति परमाणु की संरचना

कार्बनिक रसायन
कार्बन लंबी श्रृंखलाओं वाले यौगिक

रेडियो रसायन
रेडियोएक्टिव पदार्थ नाभिकीय विखण्डन नाभिकीय संलयन मिश्रण

रसायन विज्ञान जीवन में महत्व

विषय प्रवेश रसायन विज्ञान मात्र रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन में भी रचा-बसा है। जुकाम से लेकर कैंसर तक की दवाएँ, सौंदर्य प्रसाधन, विभिन्न प्रकार की प्लास्टिक, नहाने, कपड़े धोने का साबुन, रबड़ सभी कुछ रसायन का ही चमत्कार है। दूध का दही बनाना, कपड़ों से मैल निकालना, पानी को फिटकरी डालकर स्वच्छ करना, ईधन जलना आदि रासायनिक प्रक्रियाएँ हैं, जो हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं।

रासायनिक संयोजन के नियम

अठारवीं सदी के बाद रासयनिक विज्ञान में अत्याधिक उन्नति की है। इससे ऊष्मा की प्रकृति और किस प्रकार वस्तुएं जलती है को जानने में आनंद आया। मुख्य उन्नति रासायनिक तुला का सावधानी से प्रयोग करके होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान में होने वाले परिवर्तन का पता लगा सकते हैं। महान फ्रेंच रसायनविद एंटिमिनी लेवाइजर ने रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए तुला का प्रयोग किया। उसने मरकरी को बन्द फ्लास्क में जिसमें हवा थी गर्म किया। बहुत दिनों के बाद मरकरी ऑक्साइड का लाल पदार्थ प्राप्त हुआ। फ्लास्क में बची गैस के द्रव्यमान में कमी आ गई। शेष गैस न तो दहन न ही जीवन में सहायक है। फ्लास्क में बची हुई गैस की नाइट्रोजन के रूप में पहचान हुई। मरकरी के साथ संयुक्त होने वाली गैस ऑक्सीजन थी। आगे उसने इस प्रयोग को सावधानी से मरकरी (II) आक्साइड की तुली हुई मात्रा के साथ किया। उसने पाया कि लाल रंग के मरकरी (II) आक्साइड को प्रबलता से गर्म करने पर मरकरी और आक्सलीन में विघटित हो जाता है उसने मरकरी और आक्सजीन में विघटित हो जाता है उसने मरकरी और आक्सीजन दोनों को तोला और पाया कि दोनों का संयुक्त द्रव्यमान लिए गए मरकरी (II) आक्साइड के द्रव्यमान के बराबर था। लेवाइजर ने अंतिम निष्कर्ष निकाला कि “प्रत्येक रासायनिक अभिक्रिया में सभी अभिकर्मकों का सम्पूर्ण द्रव्यमान सभी उत्पादों के सम्पूर्ण द्रव्यमान के बराबर होता है। यह द्रव्यमान-संरक्षण का नियम माना जाता है।
रसायनविदों द्वारा अभिकर्मकों और उत्पादों का सही द्रव्यमानों का पता लगाने के बाद विज्ञान में शीघ्रता से उन्नति हुई। फ्रेन्च रसायविदो क्लाउडे बर्थोलेट और जोसेफ प्राडस्ट ने दो तत्वों जो कि संयुक्त होकर यौगिक बनाते हैं के अनुपातों (द्रव्यमान) पर कार्य किया। सावधानी से कार्य करने के बाद प्राउस्ट ने 1808 में निश्चित या स्थिर अनुपात का नियम दिया। "दिये गये रासायनिक यौगिक में तत्वों के द्रव्यमानों का अनुपात जो कि संयुक्त होते हैं निश्चित होता है और यौगिक के स्रोत और विरचन पर निर्भर नहीं करता है।"
उदाहरण के लिए शुद्ध जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमानों का अनुपात 1:8 होता है। दूसरे शब्दों में द्रव्यमान के रूप में शुद्ध जल में हाइड्रोजन 11.11% और ऑक्सीजन 88.89% होती है चाहे जल को कुआं, नदी या तलाब से लिया गया है। इस प्रकार यदि 9.0 ग्राम जल का विघटन किया जाए तो हमेंशा 1.0 ग्राम हाइड्रोजन और 8.0 ग्राम ऑक्सीजन प्राप्त होती है। यदि 3.0 ग्राम हाइड्रोजन को 8.0 ग्राम ऑक्सीजन के साथ मिश्रित करते हैं और मिश्रण को जलाया जाता है तो 9.0 ग्राम जल बनता है और 2.0 ग्राम हाइड्रोजन अन अनिभिकृत बच जाती है। इसी प्रकार सोडियम क्लोराइड में 60.66% क्लोरीन और 39.34% सोडियम द्रव्यमान के रूप में होते है चाहे हम इसे लवण खदानों, समुद्र के जल या सोडियम और क्लोरीन से बनाये। वास्तव में इस वाक्य में "शुद्ध" मुख्य शब्द है। पुनः प्रयोगात्मक परिणाम वैज्ञानिक विचारों की विशिष्टता होती है। वास्तव में आधुनिक विज्ञान प्रयोगात्मक अनुसंधान पर निर्भर करती है पुनः परिणाम अप्रत्यक्ष रूप सत्य की तरफ संकेत करते हैं जो कि छिपे होते हैं। वैज्ञानिक हमेशा इस सत्य पर अनुसंधान करते हैं और इस प्रकार बहुत से सिद्धांत और नियमों की खोज की। इस सत्य की खोज विज्ञान के विकास में अहम कार्य करती है।
डाल्टन परमाणु सिद्धांत केवल द्रव्यमान संरक्षण और स्थिर अनुपात के नियमों का उल्लेख करता है लेकिन नए की भी कल्पना करता है। उसने अपने सिद्धांत के आधार पर गुणित अनुपात नियम दिया। इस नियम के अनुसार "यदि दो तत्व संयोजित होकर एक से अधिक यौगिक बनाते हैं, तो एक तत्व के साथ दूसरे तत्व के संयुक्त होने वाले द्रव्यमान छोटे पूर्णांकों के अनुपात में होते हैं।" उदाहरण के लिए कार्बन और आक्सीजन दो यौगिक कार्बन मोनोक्साइड और कार्बनडाई आक्साइड बनाते हैं। कार्बन मोनोक्साइड में प्रत्येक 1.0000 ग्राम कार्बन के लिए 1.3321 ग्राम ऑक्सीजन होती है जबकि कार्बनडाई ऑक्साइड में प्रत्येक 1.0000 ग्राम कार्बन के लिए 2.6642 ग्राम ऑक्सीजन होती है। दूसरे शब्दों में कार्बनडाईआक्साइड में कार्बनमोनोआक्साइड (2 x1.3321 = 2.6642) की तुलना में दिये गये कार्बन के द्रव्यमान में दो गुणा आक्सीजन होती है। परमाणु सिद्धांत यह उल्लेख करता है कि दिये गये कार्बन परमाणुओं में कार्बनमोनोक्साइड की तुलना में कार्बनडाईआक्साइड में आक्सीजन परमाणुओं की संख्या दो गुणी होती है। परमाणु सिद्धांत से उत्पन्न गुणित अनुपात रसायनविदो के लिए इस सिद्धांत की वैधता को स्वीकार करने में महत्वपूर्ण था।


FAQ :

1. रसायन विज्ञान के जनक कौन हैं?
लेवोसियर (Lavoisier) को आधुनिक रसायन विज्ञान का जन्मदाता कहा जाता है।

2. रसायन विज्ञान क्या है ? (What is Chemistry In Hindi)?
विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत द्रव्यों की संरचना, ऊष्मा और ऊर्जा के कारण इनमें होने वाले परिवर्तन एवं इनकी पारस्परिक क्रिया-प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जाता है, रसायन विज्ञान कहलाता है।

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