CSD का Full Form क्या है? CSD का पूरा नाम क्या है इन हिंदी?

CSD full form

CSD का Full Form “Canteen Stores Department” (कैंटीन भण्डार विभाग) होता है। यह भारतीय आर्मी का एक महत्वपूर्ण अंग है यहां पर भंडारण का कार्य किया जाता है और इसे सैन्य बलों द्वारा ही संचालित किया जाता है। CSD का पूरा नाम कैंटीन भण्डार विभाग होता है।
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CSD क्या है।

CSD का मुख्य उद्देश्य बाजार दरों की तुलना में सस्ते दरों पर उच्च गुणवत्तायुक्त वस्तुओं को सैनिकों तक मुहैया करवाना है। मंत्रालय द्वारा अक्तूबर 1977 में जारी मूल्य निर्धारण नीति के अनुसार, विक्रय मूल्य “इन्टो वेअरहाऊस कॉस्ट" पर निर्भर करता है जिसमें लगभग एक से बारह प्रतिशत के मुनाफों के अलावा आवक किराया, ढुलाई शुल्क, बीमा एवं अन्य आकस्मिक प्रभारों को शामिल करना चाहिए। CSD द्वारा चित्रात्मक रूप में कीमत-सूची, जिसमें वस्तुओं के फोटोग्राफ एवं मूल्य शामिल होते है, को वर्ष में दो बार प्रकाशित किया जाता है। मूल्य सूची की पुनरीक्षण दर्शाती है कि उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य के मुकाबले सस्ती कीमतों पर उपभोक्ता सामान उपलब्ध कराने में सीएसडी काफी सक्षम रहा है। तथापि, कई मामलों में मूल्य नीति का गलत लागू करना लेखापरीक्षा के दौरान प्रकाश में आया जिसकी नीचे चर्चा की गई है।

अनुचित तरीके से वस्तुओं/चीजों की कीमतों का निर्धारण किया जाना
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट में मूल्य नीतियों के गलत उपयोग के कई मामले देखे गए। लेखापरीक्षा द्वारा दर्शाई गई कमियों/दोष को ध्यान में लेते हुए, पीएसी ने अपने 48वीं प्रतिवेदन में सिफारिश की कि वास्तविक लागत खर्च तथा मौजूदा कर प्रावधानों को विचार में लेते हुए सही एवं पारदर्शी तरीके से वस्तुओं/चीजों के मूल्य को निर्धारण करने के लिए मंत्रालय को CSD पर दबाव डालना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं तक आशयित लाभ पहुँचाया जा सके।

CSD की शुरूआत

द्वितीय विश्व युद्ध की शुरूआत के साथ, सरकार ने कैंटीन सेवाओं को अपने अधीन करते हुए 1 जुलाई 1942 में उसकी स्थापना की जिसे 1948 में कैंटीन भंडार विभाग (CSD) के रूप में पुनर्नामित किया गया। चूंकि ठेकेदारों द्वारा खुदरा व्यापार चलाया जा रहा था, यूनिट या फार्मेशन द्वारा ठेकेदारों से कैंटीन के दायित्वों को अपने अधीन लेने के लिए तीनों सेवाओं द्वारा संयुक्त रूप से इस मुद्दे को लिया गया जिससे कि, सैनिकों के कल्याण के लिए यूनिट/फार्मेशन के अंदर ही कैंटीन भंडारो के विक्रय से मिलने वाले मुनाफे को बरकरार रखा जा सके। सरकार द्वारा प्रस्ताव को सहमति प्रदान की गई और इस तरह यूनिट द्वारा संचालित कैंटीन (यूआरसी) की संकल्पना अस्तित्व में आई। सीएसडी से प्राप्त होने वाली निधि को भारत की समेकित निधि (सीएफआई) के साथ विलय के पश्चात सीएसडी 1 अप्रैल 1977 से रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के अधीन एक सुसज्जित संगठन बन गया।
अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए, सीएसडी रक्षा मंत्रालय से विभिन्न ‘शीर्षों' के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में बजट आबंटन प्राप्त करती है तथा साप्ताहिक आधार पर रक्षा लेखा नियंत्रक (सीडीए), सीएसडी के द्वारा निधि को निर्गमित किया जाता है। दैनिक आधार पर एरिया डिपो द्वारा सीएसडी की विक्रय प्राप्ति को सीएफआई में जमा किया जाता है। व्यवसायिक कार्यों एवं प्रशासन के लिए व्यय करने हेतु डिपो को समर्थ बनाने के लिए सीडीए (सीएसडी) द्वारा मुहैया करवाई गई निधि में से डिपो प्रबंधक को आवश्यकता अनुसार पेशगी प्रदान की जाती है।
“सशस्त्र सेवा सेवार्थ" के सिद्धांत अनुसार सेवा कार्मिकों, रक्षा सिविलियनों तथा अन्य लाभार्थियों को बाज़ार दर की तुलना में सस्ते दर पर गुणवत्ता युक्त उपभोक्ता वस्तुओं को मुहैया करवाना ही सीएसडी का कार्य है। 4167 यूनिट रन कैंटीन (यूआरसी), जिसमें कुछ बिल्कुल दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं, के नेटवर्क के द्वारा सीएसडी अपने सभी लाभार्थियों की माँग को पूरा करता है। मार्च 2016 तक सीएसडी में सूचीबद्ध उपभोक्ता वस्तुओं की संख्या 5548 थीं। वर्ष 2015-16 के दौरान सीएसडी का विक्रय ₹15781.37 करोड़ हुआ था।
अन्य लाभार्थी: तटरक्षक बल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, बार्डर रोड संगठन एवं असम राइफल्स।

CSD की संगठनात्मक संरचना

संगठन के शीर्ष में एक नियंत्रण बोर्ड, कैन्टीन सेवाएँ (बीओसीसीएस) है, जिसके सभापति रक्षा मंत्री होते हैं। बीओसीसीएस सीएसडी के लिए रागग्र नीतियों को बनाती है और गुनाफों के संवितरण के लिए सरकार को सलाह देती है। बोर्ड को एक कार्यकारी समिति द्वारा सहायता प्रदान की जाती है जो हर तिमाही में सीएसडी के प्रकार्य की समीक्षा करती है। सीएसडी का प्रबंधन प्रशासन बोर्ड (बीओए) के हाथों में निहित होता है, जिसमें सभापति के रूप में महाप्रबंधक (जीएम) एवं रक्षा मंत्रालय (वित्तीय), सेना मुख्यालय (क्वार्टर मास्टर जनरल (क्यूएमजी) शाखा), वायु सेना एवं नौसेना के प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं। महाप्रबंधक सीएसडी के दैनिक प्रबंधन के लिए जिम्मेवार होते हैं एवं क्यूएमजी के जरिए बीओसीसीएस को वे रिपोर्ट करते हैं। सीएसडी का संचालन मुंबई स्थित उसके मुख्य कार्यालय, पाँच मंडलीय (आंचलिक) कार्यालयों एवं पूरे देश में फैले हुए 34 एरिया डिपो तथा मुबंई स्थित बेस डिपो द्वारा होता है।  सीएसडी द्वारा बनाई जाने वाली नीतियों तथा उसकी कार्यपद्धति के पुनरीक्षण को तीन स्तरीय समितियों की संरचना के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है।
सीएसडी द्वारा बनाई जाने वाली नीतियों तथा उसकी कार्यपद्धति के पुनरीक्षण को तीन स्तरीय समितियों की संरचना के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है। इन समितियों के कार्य, दायित्व एवं बनावट को नीचे चार्ट के द्वारा सार रूप में दर्शाया गया है:
समितियों के कार्य, दायित्व तथा बनावट
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CSD का व्यापार संचालन एवं नेटवर्क

उपभोक्ता वस्तुओं जिन्हें सामान्य भंडार (जीएस) सामग्री, शराब, खाद्यान्न व निश्चित माँग (एएफडी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, बाजार के सर्वेक्षण के बाद तथा बीओए द्वारा अनुमोदन के पश्चात सीएसडी की इन्वैंट्री सूची में शामिल किया जाता है। सीएसडी संबंधित विक्रेताओं से अनुमोदित की गई वस्तुओं की खरीद करता है। भंडारों को बेस डिपो, मुबंई एवं 34 एरिया डिपो में ग्रहण किया जाता है। यूआरसी के नेटवर्क के माध्यम से लाभार्थियों को वस्तु बेची जाती है, जो माँगप्रत्र के द्वारा अपने संलग्न एरिया डिपो से वस्तुओं को प्राप्त करता है। मंत्रालय/सेना फार्मेशन द्वारा निर्धारित की गई नीतियों पर यूआरसी की कार्यविधि चलती है।

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