आर्य समाज के संस्थापक कौन है? | arya samaj ke sansthapak kaun hai

आर्य समाज के संस्थापक

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती है, स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज का लक्ष्य वैदिक मूल्यों की पुनर्स्थापना करना था। आर्य समाज ने वैदिक धर्म पर प्रहार करने वालों के प्रति आक्रामक रूप धारण किया। वैदिक धर्म की रक्षा करते हुए उन्होंने मुस्लिम और ईसाई धर्म प्रचारकों की आक्रामकता का उनकी ही शैली में उत्तर दिया। जिन हिन्दुओं ने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया था, उनके लिए अपने धर्म में वापस लौटने के सभी मार्ग हिन्दू समाज ने अवरुद्ध कर दिए थे परन्तु दयानन्द सरस्वती ने अपने शुद्धि आन्दोलन के द्वारा ऐसे लोगों के लिए अपनी शुद्धि करा के फिर से हिन्दू बनने का रास्ता साफ़ कर दिया। आर्य समाज को इस बात का श्रेय दिया जा सकता है कि उसने हिन्दुओं में व्याप्त हीनभावना का उन्मूलन करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। आर्य समाज द्वारा स्थापित विद्यालयों और पाठशालाओं में वैदिक मूल्यों के संरक्षण का समुचित प्रबन्ध किया गया और संस्कृत भाषा व देवनागरी लिपि को विशेष महत्व दिया गया। स्वामीजी ने स्वराज और स्वदेशी की महत्ता को दर्शाया। उन्होंने अंग्रेज़ों के स्वदेश प्रेम और उनकी स्वदेशी की भावना की प्रशंसा की। स्वामीजी ने देशवासियों के लिए विदेशी सुराज की तुलना में दोषपूर्ण स्वराज को श्रेयस्कर माना। स्वामी दयानन्द सरस्वती भारतीय सामाजिक परिष्कार हेतु विदेशी शासकों व सुधारकों की सहायता और उनका मार्ग-दर्शन आवश्यक नहीं समझते थे अपितु इस विषय में भी उन्होंने भारतीयों को आत्म-निर्भर होने का उपदेश दिया।
दयानन्द सरस्वती के अनुयायी स्वामी श्रद्धानन्द ने भारतीयों को पश्चिम की अंधी नकल न करने का उपदेश दिया। दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेजों की स्थापना कर दयानन्द सरस्वती के अनुयायियों ने भारतीयों को भारतीय मूल्यों का संरक्षण करने वाली आधुनिक शिक्षा का विकास किया। स्वामी श्रद्धानन्द ने वैदिक मूल्यों को आदर्श बनाकर हरद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की।
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