नीति युक्त में कौन सा समास है? | neetiyukt mein kaun sa samas hai

नीति युक्त में कौन सा समास है?

नीति युक्त शब्द में तत्पुरुष समास होता है।

नीति युक्त में कौन सा समास है?

नीति युक्त शब्द में तत्पुरुष समास होता है।


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नीतियुक्त शब्द का समास-विग्रह होगा
समास-विग्रह 
नीतियुक्त  - नीति से युक्त
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नीतियुक्त में समास का उपभेद तृतीया तत्पुरूष (करण तत्पुरूष) समास है

करण तत्पुरुष समास के बारे में 

इसमें पहला पद करण कारक के चिन्ह (परसर्ग) (से) से युक्त होता है, उसमें करण तत्पुरुष समास होता है। करण कारक का चिन्ह या परसर्ग 'से' या के द्वारा होता है। जो प्रमुख रूप से अंग्रेजी के 'विथ' का अर्थ देता है, अर्थात् वह जुड़ाव का सूचक होता है, तथा अधिकांशतः क्रिया के साधन का बोध कराता है। उदाहरणार्थ-'हस्तलिखित'। इसका विग्रह होगा- ‘हाथ से लिखा हुआ', इसमें लिखना क्रिया के साधन हाथ का बोध हो रहा है तथा इसका पूर्व पद ‘से' करण परसर्ग से युक्त है, अतः ‘हस्तलिखित' में करण तत्पुरुष है।
इस प्रकार के समास में करण कारक की विभक्ति से तथा द्वारा लुप्त हो जाती हैं।

नीतियुक्त - नीति से युक्त
Neetiyukt mein kaun sa Samas hai?

नीति युक्त में तत्पुरुष समास होता है और आप तत्पुरुष समास के बारे में और तत्पुरुष समास की परिभाषा पढ़ सकते है जिससे आपको समझने में सहायता मिलेगी

तत्पुरुष समास

(i) तत्पुरुष समास में दूसरा पद (पर पद) प्रधान होता है अर्थात् विभक्ति का लिंग , वचन दूसरे पद के अनुसार होता है।
(ii) इसका विग्रह करने पर कर्ता व सम्बोधन की विभक्तियों (ने , हे, ओ, अरे) के अतिरिक्त किसी भी कारक की विभक्ति प्रयुक्त होती है तथा विभक्तियों के अनुसार ही इसके उपभेद होते हैं।

जैसे-
(क) कर्म तत्पुरुष (को)
कृष्णार्पण → कृष्ण को अर्पण नेत्र
सुखद → नेत्रों को सुखद
वन - गमन → वन को गमन
जेब कतरा → जेब को कतरने वाला
प्राप्तोदक →  उदक को प्राप्त

(ख) करण तत्पुरुष (से / के द्वारा)
ईश्वर - प्रदत्त → ईश्वर से प्रदत्त
हस्तलिखित → हस्त (हाथ) से लिखित
तुलसीकृत → तुलसी द्वारा रचित
दयार्द्र → दया से आर्द्र
रत्न जड़ित → रत्नों से जड़ित

(ग) सम्प्रदान तत्पुरुष (के लिए)
हवन - सामग्री → हवन के लिए सामग्री
विद्यालय → विद्या के लिए आलय
गुरु - दक्षिणा → गुरु के लिए दक्षिणा
बलि - पशु → बलि के लिए पशु

(घ) अपादान तत्पुरुष (से पृथक)
ऋण मुक्त → ऋण से मुक्त
पदच्युत → पद से च्युत
मार्ग भ्रष्ट → मार्ग से भ्रष्ट
धर्म - विमुख → धर्म से विमुख
देश निकाला→ देश से निकाला

(च) सम्बन्ध तत्पुरुष (का, के, की)
मन्त्रिपरिषद → मन्त्रियों की परिषद
प्रेम - सागर → प्रेम का सागर
राजमाता → राजा की माता
अमचूर → आम का चूर्ण
रामचरित → राम का चरित

(छ) अधिकरण तत्पुरुष (में, पे, पर)
वनवास → वन में वास
जीवदया → जीवों पर दया
ध्यान - मग्न → ध्यान में मग्न
घुडसवार → घोडे पर सवार
घृतान्न → घी में पक्का अन्न
कवि पुंगव → कवियों में श्रेष्ठ

समास के बारे में 

"समास' शब्द मूलतः संस्कृत का शब्द है। उत्पत्ति के आधार पर 'समास' दो शब्दों ‘सम और आस' से मिलकर बना है। इसमें सम का अर्थ होता है-समान रूप से और आस का अर्थ होता है-बैठाना या आसन या पास। इस प्रकार समास का शाब्दिक अर्थ हुआ समान रूप से बैठाना। अब प्रश्न उठता है कि यह बैठाना किसका? उत्तर प्राप्त होता है-विभिन्न पदों का या शब्दों का। इस प्रकार 'समास' का अर्थ हुआ-दो या दो से अधिक पदों (शब्दों) को मिलाकर उन्हें समानतः एक रूप प्रदान करना। दूसरे शब्दों में, दो या दो से अधिक पदों (शब्दों) को मिलाकर जब एक पद (शब्द) बना दिया जाता है, तब उस मेल को ‘समास' कहा जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हमने मेल या योग से बने पद या शब्द को 'समास' नहीं कहा, बल्कि मेल या योग को 'समास' कहा जाता है।
उदाहरण के लिए एक शब्द है- 'गृहागत'। इसमें दो पद हैं- 'गृह और आगत', किन्तु इसका अर्थ 'गृह और आगत' नहीं होगा। इसका अर्थ होगा गृह को आगत। यहां 'गृह को आगत' से 'गृहागत' सामासिक पद बना है। अब हम यदि किसी से यह पूछेगे कि बताइए गृहागत' में कौन सा समास है, तो वह सर्वप्रथम 'गृहागत' में मिले हुए पदों को अलग-अलग करेगा, तभी वह सामासिक नियमों के आधार पर यह बता पायेगा कि 'गृहागत' में उक्त समास है। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह भी है कि 'गृहागत' और 'गृह को आगत' दोनों का अर्थ एक ही है। अतः स्पष्ट है कि जब दो या दो से अधिक पदों को मिलाया जाता है, तो उन सभी पदों की विभक्ति, प्रत्ययों, परसर्गों या योजक-चिन्हों आदि का लोप हो जाता है। ऊपर के उदाहरण ‘गृहागत' में दोनों पदों के बीच ‘को' नामक परसर्ग का लोप हो गया है।
परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि संधि का विच्छेद होता है और समास का विग्रह। सन्धि होने पर किसी एक या दो वर्गों में विकार हो जाता है, परन्तु समास होने पर अनेक शब्द मिलकर एक शब्द बन जाते हैं और बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है। विग्रह का अर्थ होता है-अलग-अलग करना। जब किसी सामासिक शब्द को अलगअलग कर स्पष्ट किया जाता है, तो उसे 'समास विग्रह' कहा जाता है। उदाहरण के लिए 'देशभक्ति' सामासिक शब्द है क्योंकि यहाँ दो पदों ‘देश और भक्ति' का मेल या योग है, जब इसका विग्रह किया जाएगा तब होगा-देश के लिए भक्ति, अतः यह 'देशभक्ति' का समास विग्रह है।
हिन्दी में 'समास' की पहचान और उसके स्वरूप विग्रह आदि को समझने के लिए यह आवश्यक है कि विद्यार्थी विभिन्न समासों की परिभाषा को भली-भाँति समझ लें। इसीलिए यहाँ हम प्रत्येक 'समास' को विस्तार पूर्वक समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
समास का सरल अर्थ 'संक्षिप्तीकरण' है। जब दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से एक नया एवं सार्थक शब्द बनता है तो उस नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहा जाता है। जैसे: 'रसोई के लिये घर' को हम संक्षिप्त रूप में 'रसोईघर' भी कह सकते हैं। समास का प्रयोग 'संस्कृत' तथा अन्य भारतीय भाषाओं में बहुत अधिक होता है।

Important Question of Neetiyukt

नीतियुक्त इस समास का उदाहरण है ?
नीतियुक्त शब्द का अर्थ क्या है?
समास विग्रह of नीतियुक्त
नीति से युक्त का समस्त पद है
नीतियुक्त समास क्या होगा ?
नीतियुक्त किस समास का उदाहरण है ?
नीतियुक्त का विग्रह क्या होगा ?
करण तत्पुरुष समास समास के उदाहरण
What is samas of Neetiyukt in hindi?
Know below समास विग्रह of Neetiyukt in hindi grammar. Another word for likewise - Neetiyukt ?
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