भारत के प्रमुख बंदरगाह की सूची | भारत में कितने बंदरगाह (पोर्ट) है | Bharat Ke Pramukh Bandargah

भारत के प्रमुख बंदरगाह

भारत के लगभग 7517 किमी. लंबे तट पर 13 मुख्य बड़े बंदरगाह तथा 200 से अधिक छोटे एवं मध्यम दर्जे के बंदरगाह हैं।
बड़े बंदरगाहों का नियंत्रण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है जबकि छोटे व मंझोले बंदरगाहों का नियंत्रण संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है, जिनका प्रबंधन एवं प्रशासन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।
मुंबई, कांडला, न्यू मंगलौर एवं कोच्चि पश्चिमी तट पर तथा कोलकाता, हल्दिया, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्नई व तूतीकोरिन पूर्वी तट पर स्थित मुख्य बंदरगाह हैं।
Bharat Ke Pramukh Bandargah
भारत का लगभग 75% व्यापार मुख्य बंदरगाहों द्वारा होता है जबकि शेष व्यापार मध्यम तथा छोटे आकार के पत्तनों के माध्यम से किया जाता है।

भारत में 13 बड़े बन्दरगाह

कांडला (Kandla)
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गुजरात में कच्छ की खाड़ी के तट पर स्थित, यह एक ज्वारीय बंदरगाह है। यहां पर सरकार ने मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित किया। 4 अक्टूबर, 2017 को केन्द्रीय मंत्रीमंडल द्वारा कांडला बंदरगाह का नाम परिवर्तित कर दीनदयाल बंदरगाह कर दिया गया है। यह प्राकृतिक बन्दगाह है। यहाँ पर मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Zone) स्थापित किया गया है। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है। इसीलिए मुंबई को 'भारत के द्वार' की संज्ञा दी गयी हैं।

मुंबई (Mumbai)
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यह देश का सबसे बड़ा, वर्ष-पर्यन्त खुला रहने वाला प्राकृतिक बंदरगाह एवं पत्तन है, जो प्राकृतिक कटान में सालसेट द्वीप पर स्थित है। यहाँ से मुख्यतः सूती एवं ऊनी कपड़े, चमड़े का सामान, पेट्रोलियम, मैगनीज, मशीन, इंजीनियरिंग सामान आदि का निर्यात किया जाता है। यह देश का सबसे बड़ा बंदरगाह है। यह पत्तन मध्यपूर्व, भूमध्य सागरीय देशों, उत्तरी अफ्रीका, उत्तर अमेरिका तथा यूरोप के देशों के सामान्य मार्ग के निकट स्थित है जहाँ से देश के विदेशी व्यापार का अधिकांश भाग संचालित किया जाता है। यह पत्तन 20 कि.मी. लंबा तथा 6-10 कि.मी. चौडा है। जिसमें 54 गोदियाँ और देश का विशालतम टर्मिनल हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के भाग मुंबई पत्तन की पृष्ठभूमि की रचना करते हैं।

न्हावा शेवा (न्यू मुंबई) (Nhava Sheva {Navi Mumbai})
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इसका नया नामकरण जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह है। यह पूर्णतः यंत्रचालित बंदरगाह है, जो मुंबई बंदरगाह पर दबाव कम करने हेतु न्यू मुंबई में आधुनिक शैली से विकसित किया गया बंदरगाह है। यह भारत का आधुनिकतम पत्तन हैं, जहाँ सर्वत्र अत्याधुनिक कम्प्यूटर नियंत्रित तकनीकों का प्रयोग किया गया हैं। मुम्बई पोर्ट का भार कम करने हेतु। यहाँ से सूतीवस्त्र का निर्यात किया जाता है।
इसे वर्ष 1988-89 में देश का 12वां बड़ा बंदरगाह घोषित किया गया। यह भारत का विशालतम कंटेनर पत्तन है।

मोरमुगाओ (Mormugao)
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गोवा की जुआरी नदी की एस्चुयरी में स्थित यह बंदरगाह वर्ष 1970 तक देश का सबसे बड़ा निर्यातकर्ता बंदरगाह था। क्योंकि पूर्व में जापान को लौह- अयस्क का ही निर्यात होता था किंतु वर्तमान में मैगनीज, सीमेंट, उर्वरक, कॉफी, नारियल, काजू, नमक (खनिज नमक) आदि का भी निर्यात होता है। इसका पोताश्रय प्राकृतिक हैं। यहां से निर्यात आयात की तुलना में अधिक होता हैं।

न्यू मंगलौर (New Mangalore)
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मोरमुगाओ व कोच्चि के मध्य कर्नाटक में स्थित यह बंदरगाह आकार की दृष्टि से अपेक्षाकत छोटा है।
यहाँ से मुख्यतः लौह-अयस्क (कर्नाटक की कुद्रेमुख खान से निष्कासित), ग्रेनाइट, काजू, कहवा, लकड़ी, मछली, चंदन का तेल आदि का निर्यात होता है। इस बंदरगाह में कुद्रेमुख को लौह अयस्क के निर्यात की सुविधा विशेष रूप से उपलब्ध कराई गई हैं। प्राकृतिक बन्दरगाह। यहाँ से लौह अयस्क जापान को निर्यात होता है।

कोचिन (कोच्चि ) (Kochi)
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बेवनाद कयाल, जिसे अरब सागर की रानी (क्वीन ऑफ अरेबियन सी) के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, इसके मुहाने पर स्थित कोच्चि पत्तन भी एक प्राकृतिक पत्तन है। यह एक प्राकृतिक बंदरगाह हैं। इस पत्तन को स्वेज-कोलंबो मार्ग के पास अवस्थित होने का लाभ प्राप्त है। पूरब का वेनिस कहा जाने वाला यह बंदरगाह केरल के मालाबार तट के वेलिगंटन द्वीप पर स्थित है। इसकी गोदी वर्ष भर खुली रहती है। इस बंदरगाह के निकट एक जलयान-निर्माणशाला व पेट्रोलियम शोधनशाला स्थापित की गई है। पालघाट दर्रे से होकर बनाये गये रेलमार्ग द्वारा यह दक्षिण भारत के भीतरी भागों से जुड़ा हैं।

तूतीकोरिन (Tuticorin)
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भारत के दक्षिणी-पूर्वी छोर पर तमिलनाडु में स्थित है। यह कृत्रिम बन्दरगाह है। 27 जनवरी, 2011 को तूतीकोरिन पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर चिदंबरनार पोर्ट ट्रस्ट किया गया। यह मन्नार की खाड़ी में स्थित हैं। इसकी पृष्ठभूमि खनिज, पशु और कृषि-संसाधनों से युक्त हैं।
श्री वी.ओ, चिदंबरनार पिल्लै ने 1906 में प्रथम स्वदेशी भारतीय नौवहन सेवा तूतीकोरिन से कोलंबो के बीच प्रारम्भ की थी।

चेन्नई (Chennai)
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भारत के प्राचीनतम् बंदरगाहों में से एक है। यह एक कृत्रिम पत्तन है जिसे वर्ष 1859 में बनाया गया था। तट पर पानी की कमी रहने के कारण बड़े जलयान तट तक नहीं आ पाते थे, जिसे बाद में कृत्रिम रूप से गहरा किया गया, यहाँ से पेट्रोलियम उत्पाद, उवर्रक, लौह-अयस्क, मैगनीज, अभ्रक, कोयला, मशीनें, सूती और रेशमी कपड़े, चमड़ा, रबड़, तम्बाकू, तेल, हल्दी आदि का आयात-निर्यात किया जाता है। मुंबई के बाद चेन्नई देश का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है। यह कृत्रिम बन्दरगाह है। पूर्वी तट पर स्थित भारत का सबसे पुराना बन्दरगाह। यहाँ पोतों की सुरक्षा के लिए समुद्र में दीवार बनायी गयी है।

विशाखापत्तनम (Visakhapatnam)
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यह देश का सबसे गहरा बंदरगाह हैं, जहां लौह अयस्क के निर्यात के लिए बाहरी बंदरगाह बनाया गया है। इसका पोताश्रय प्राकृतिक हैं। पोताश्रय में डॉलफिन नोज (Dolphin Nose) नामक पहाड़ी भाग निकल आने से यह मानसून पवन के झकोरों से सुरक्षित रहता हैं। यहां से आयात की अपेक्षा निर्यात अधिक होता हैं।
काकीनाड़ा तट पर आंध्र प्रदेश में स्थित इस बंदरगाह के पास पोत निर्माण व मरम्मत उद्योग भी स्थापित हैं। यहाँ से लौह-अयस्क, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, लकड़ी, कोयला, चमड़ा आदि का आयात-निर्यात किया जाता है। यहाँ से लौह अयस्क जापान को निर्यात किया जाता है। यह सबसे गहरा बंदरगाह माना जाता है।

पाराद्वीप (Paradip)
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इसकी स्थापना 1962 ई. में की गई थी। यह ओडिशा राज्य में कटक से 100 किमी. दूर महानदी के डेल्टा पर स्थित है। यहाँ से मुख्यत: जापान को कच्चा लोहा निर्यात किया जाता हैं। यह निर्यात-प्रधान बंदरगाह है। इसका पोताश्रय सबसे गहरा है। यह एक कृत्रिम बंदरगाह हैं।

कोलकाता-हल्दिया (Kolkata-Haldia)
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यह बंदरगाह हुगली नदी पर अवस्थित है जो बंगाल की खाड़ी से 128 किमी. की दूरी पर स्थित हैं। मुम्बई पत्तन की भांति इसका विकास भी अंग्रेजों द्वारा किया गया था। इसका पृष्ठ प्रदेश सबसे अधिक है। यह भारत का पहला बन्दरगाह है जो नदी पर स्थित है।
कोलकाता पत्तन हुगली नदी द्वारा लाई गई गाद की समस्या से भी जूझता रहा है जो कि उसे समुद्र से जुड़ने का मार्ग प्रदान करती है। इसके पृष्ठ प्रदेश के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्य आते हैं। इन सबके अतिरिक्त, यह पत्तन हमारे भूटान और नेपाल जैसे स्थलरुद्ध पड़ोसी देशों को भी सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
कोलकाता को ब्रिटिश भारत की राजधानी होने के प्रारंभिक लाभ प्राप्त थे। इस पत्तन ने विशाखापट्नम, पाराद्वीप और उसकी अनुषंगी पत्तन हल्दिया जैसी अन्य पत्तनों की ओर निर्यात के दिक्परिवर्तन के कारण अपनी सार्थकता काफ़ी हद तक खो दी है।
हल्दिया, कोलकाता से 105 किमी. दूर स्थित है। यह एक पूर्णतः प्राकृतिक बंदरगाह है। यह एक नदीय पत्तन है। कांडला की भांति यह भी एक ज्वारीय पत्तन है। इस बंदरगाह पर जल के स्तर को बढ़ाने के लिए फरक्का नामक स्थान पर एक बांध बनाया गया है। इसका विकास कोलकाता के सहायक बंदरगाह के रूप में किया गया है।

एन्नोर (Ennore)
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यह तमिलनाडु के तट पर चेन्नई के उत्तर में स्थित है। इसका परिचालन सन् 2001 से शुरू हुआ। भारत का सबसे नया तथा बारहवां बन्दरगाह है। चेन्नई के भार को कम करने के लिए इसका निर्माण किया गया है। इसे एशियाई विकास बैंक की सहायता से विकसित किया गया है। यह देश का सबसे बड़ा कम्प्यूटराइज्ड बंदरगाह और देश का प्रथम पब्लिक कंपनी (मिनीरत्न) बंदरगाह है। यह देश का प्रथम निजी क्षेत्र में स्थापित बंदरगाह है। यह चेन्नई से 24 किमी. उत्तर में स्थित है। 21 फरवरी, 2014 को एन्नौर बंदरगाह का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी व आधुनिक तमिलनाडु के निर्माता के. कामराज के नाम पर कामराज पोर्ट लिमिटेड बंदरगाह किया गया था।

पोर्ट-ब्लेयर (Port-Blair)
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अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित पोर्ट ब्लेयर बंदरगाह को केंद्र सरकार ने 1 जून, 2010 से बड़े बंदरगाहों की श्रेणी में सम्मिलित किया। इससे देश में बड़े बंदरगाहों की कुल संख्या अब 13 हो गई है।
इन बंदरगाहों का प्रबंधन मेजर पोर्ट ट्रस्ट अधिनियम के अंतर्गत पोर्ट ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता है।

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भारत के प्रमुख बन्दरगाह

नाम

राज्य\केन्द्र

शासित प्रदेश

नदी खाड़ी

एवं समद्र

कोलकाता

प. बंगाल

हुगली नदी

मुम्बई

महाराष्ट्र

अरब सागर

चेन्नई

तमिलनाडु

बंगाल की खाड़ी

कोच्चि

केरल

अरब सागर

विशाखापत्तनम

आन्ध्र प्रदेश

बंगाल की खाड़ी

पारादीप

ओडिशा

बंगाल की खाड़ी

तूतीकोरिन

तमिलनाडु

बंगाल की खाड़ी

मर्मागोवा

गोवा

अरब सागर

कांडला

गुजरात

अरब सागर

न्यू मंगलूरु

कर्नाटक

अरब सागर

न्हावाशेवा (जेएल. नेहरू)

महारास्ट्र

अरब सागर

एनोर

तमिलनाडु

बंगाल की खाड़ी

पोर्ट ब्लेयर

अंडमान

बंगाल की खाड़ी


पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह

पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह

बंदरगाह

विशेषताएँ

कांडला

यह गुजरात में स्थित ज्वारीय बंदरगाह है। वर्तमान में इस बंदरगाह का नाम दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट हो गया है।

उत्तर भारत को माल आपूर्ति करने वाला यह सबसे बड़ा बंदरगाह है।

यहाँ पर आयात-निर्यात की मुख्य वस्तुओं में कच्चा तेल, तेल के विभिन्न उत्पाद, उर्वरक, खाद्यान्न, नमक, कपास, सीमेंट, चीनी तथा खाद्य तेल प्रमुख हैं।

मुंबई

मुंबई भारत के पश्चिमी तट पर सालसेट द्वीप पर स्थित वर्ष पर्यंत खुला रहने वाला यह एक प्राकृतिक बंदरगाह है।

यह भारत का विशालतम टर्मिनल है।

सभी बंदरगाहों से होने वाले कुल व्यापार का 20% से भी अधिक व्यापार इसी बंदरगाह से होता है।

यहाँ एक मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित किया गया है। यहाँ से मुख्यतः सूती एवं ऊनी कपड़े, चमड़े का सामान, पेट्रोलियम, मशीन, इंजीनियरिंग सामान आदि का निर्यात किया जाता है।

न्हावाशेवा या न्यू

मुंबई

इसे जवाहरलाल नेहरू पत्तन के नाम से भी जाना जाता है।

यह भारत का आधुनिक पत्तन है, जहाँ सर्वत्र अत्याधुनिक कंप्यूटर नियंत्रित तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

मार्मागाओ या मार्मागावो

यह बंदरगाह गोवा में स्थित है।

यह एश्चुअरी (नदमुख के मुहाने) पर स्थित एक प्राकृतिक बंदरगाह के रूप में है।

यहाँ से मुख्यत: लौह अयस्क का निर्यात किया जाता है।

न्यू मंगलौर

यह बंदरगाह कर्नाटक में स्थित है।

इस बंदरगाह में कुंद्रेमुख के लौह अयस्क के निर्यात की सुविधा विशेष रूप से उपलब्ध कराई गई है।

कोचीन

यह केरल के तट पर स्थित भारत का एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह है।

अरब सागर की रानी बेवनाद कयाल को कहा जाता है। इसी के मुहाने पर कोचीन एक प्राकृतिक बंदरगाह के रूप में स्थित है।

यहाँ से चाय, काजू, रबड़, मछली, कहवा तथा गरम मसालों का निर्यात किया जाता है।

खनिज तेल एवं रासायनिक पदार्थों का भी यहाँ से आयात होता है।


पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह

पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह

बंदरगाह

विशेषताएँ

कोलकाता

यह पूर्वी तट का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह है।

यह पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी से 128 किमी. अंदर की ओर हुगली नदी के किनारे पर स्थित है।

यह बंदरगाह अंग्रेजों के शासन के समय से ही विकसित है।

इस बंदरगाह से मुख्यत: पटसन उत्पादों, पशुओं की अस्थियों, बिजली का सामान, चमड़े का सामान, लोहा-इस्पात, मशीनरी, अभ्रक, चाय तथा लकड़ी का निर्यात किया जाता है।

यहाँ के मुख्य आयात मैंगनीज़, सीमेंट, कच्चा तेल, खाद्यान्न, उर्वरक मशीनरी आदि हैं।

पारादीप

यह बंदरगाह ओडिशा में स्थित है।

यहाँ से ओडिशा का लौह अयस्क जापान आदि देशों को निर्यात किया जाता है।

विशाखापत्तनम

यह बंदरगाह आंध्र प्रदेश के तट पर सबसे गहरा प्राकृतिक बंदरगाह है।

यह एक भू-आबद्ध पत्तन है, जिसे ठोस चट्टान और बालू को काटकर एक नहर द्वारा समुद्र से

जोड़ा गया है।

यहाँ 'डॉल्फिन नोज' नामक पहाड़ी निकली हुई है जिससे यह बंदरगाह मानसून के प्रभाव से बचा रहता है।

यहाँ से मैंगनीज़, लौह-अयस्क, गरम मसाले आदि निर्यात किये जाते हैं।

चेन्नई

यह तमिलनाडु में स्थित कृत्रिम बंदरगाह है।

यहाँ से तेल उत्पादों, उर्वरकों, लौह-अयस्क तथा दैनिक जीवन की वस्तुओं का व्यापार होता है।

एन्नौर

यह एक नया बंदरगाह है, जो तमिलनाडु में स्थित है।

वर्तमान में इस बंदरगाह का नाम कामारजार पोर्ट लिमिटेड है।

तूतीकोरिन

यह तमिलनाडु में स्थित कृत्रिम बंदरगाह है।

27 जनवरी, 2011 को तूतीकोरिन पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर 'चिंदबरनार पोर्ट ट्रस्ट' कर दिया गया।

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