धातु और अधातु में अंतर | dhatu adhatu mein antar

धातु और अधातु में अंतर

हमने हमारे पर्यावरण में बहुत से पदार्थ ऐसे देखे होंगे जो चमकदार, कठोर तथा मजबूत होते हैं, जैसे कि लोहा, एल्युमीनियम। हमारे घरों में इनसे बनी अनेक चीजें दिख जाती हैं। हमने कुछ ऐसे भी पदार्थ देखे होंगे जो कि नरम, कमजोर और नाजुक होते हैं, जैसे कि शीशा आदि। आप इन वस्तुओं को इनके गुणों के आधार पर आसानी से विभेदित कर सकते हैं।
आवर्त सारणी के सभी तत्वों को भी इन गुणों के आधार पर मुख्यतः दो वर्गों में विभेदित किया गया है-
  1. धातु (Metal)
  2. अधातु (Non metal)
निम्न गुणों के आधार पर धातु एवं अधातु में विभेदन किया जा सकता है।

धातु और अधातु में अंतर

धातु

अधातु

धातु आघातवर्ध्य होते है। इनको पीट कर पतली चादर बनाई जा सकती है। ये तन्य भी होते हैं। और तारों के रूप में खींचा जा सकता है। (अपवाद : Na, Bi)

अधातु न तो आघातवर्ध्य होते हैं और न तन्य। उदाहरण के लिये - लकड़ी और कोयला।

सभी धातुओं में धात्विक चमक होती है।

इनमें धात्विक चमक नहीं होती है।

धातु आमतौर पर कठोर होते हैं।

अधातु धातु की अपेक्षाकृत नर्म होते हैं।

ये सामान्य ताप पर ठोस और तरल अवस्था में होते हैं।

अधातु ठोस, द्रव या गैस किसी भी अवस्था में हो सकते हैं।

धातु चोट मारने पर एक विशिष्ट ध्वनि उत्पन्न करते हैं। उदाहरणार्थ – स्कूल की घंटी।

अधातु ध्वनि उत्पन्न नहीं करते है।

इनका घनत्व उच्च होता है।

इनका घनत्व कम होता है।

ये विद्युत के सुचालक होते हैं।

ये विद्युत के कुचालक होते हैं।

धातु धनायन होते हैं।

धातु ऋण आयन होते हैं।

धातु जल के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस देते हैं।

अधातु जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

धातु वायु के साथ अभिक्रिया कर क्षारीय ऑक्साइड बनाते हैं I Mgo,Zno

अधातु वायु के साथ अभिक्रिया कर उदासीन या अम्लीय ऑक्साइड बनाते हैं। उदासीन ऑक्साइड CO,NO अम्लीय ऑक्साइड CO2, NO2

धातु तन अम्ल के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस देते हैं।

अधातु तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

धातु हैलोजन के साथ अभिक्रिया कर वैद्युत संयोजी हेलाइड बनाते हैं। जैसे NaCI,MgCl2

अधातु हैलोजन के साथ अभिक्रिया कर सह संयोजी हेलाइड का निर्माण करते हैं। HCI,HBr

सभी धातुएं चमकीले होते है।

अधातु में कोई चमक नहीं होती है।

धातु के क्वथनांक एवं गलनांक उच्च होते है।

अधातु का गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होते है।

सामान्य ताप पर धातु ठोस अवस्था में पायी जाती है।

सामान्य ताप पर धातु गैस या ठोस अवस्था में पायी जाती है।

धातु के उदाहरण : सोडियम, पोटेशियम, लोहा, तांबा, इत्यादि।

धातु के उदाहरण : ओक्सीजन, सल्फर, क्लोरिन, ब्रोमीन, इत्यादि।


धातु (Metals) 

आवर्त सारणी (periodic table) के अधिकांश तत्वों में धात्विक गुण पाये जाते हैं, जैसे- लोहा, सोना, सोडियम, कैल्सियम आदि।
आवर्त सारणी में धातु तत्वों को मुख्य रूप से बॉयी तरफ और बीच में स्थान दिया गया है, अर्थात वर्ग IA IIA (क्षारीय धातु) वर्ग IB, VIIIBn(संक्रमण धातु) आदि मुख्य धात्विक तत्व हैं।
  • धातु प्राय: ठोस होते हैं। अपवाद पारा द्रव अवस्था में पाया जाता है।
  • धातु कठोर होते हैं। अपवाद सोडियम जिसे चाकू से काटा जा सकता है। Gaएवंcs ऐसे धातु है ,जो हथेली पर रखने पर पिघल जाते हैं।
  • धातु में एक विशेष प्रकार की चमक होती है।
  • धातु ऊष्मा एवं विद्युत का सुचालक होता है।
  • धातु आघातवर्धनीय होते हैं अर्थात उन्हें पीट कर इनकी पतली चादर बनाई जा सकती है।
  • धातु तन्यता के गुण दिखाते हैं अर्थात इनसे तार बनाए जा सकते हैं।
  • धातु को पीटने पर एक विशेष प्रकार की गुंज उत्पन्न होती है।
  • धातु ध्वनिक होते हैं। उदाहरण - सोडियम जिंक कैल्शियम

धातुओं के गुण (Properties of Metals)

धातुओं के गुणों को दो वर्गों में बाँट कर देखा जा सकता है
  1. धातुओं के भौतिक गुण (Physical properties of metals)
  2. धातुओं के रासायनिक गुण (Chemical properties of metals)

धातुओं के भौतिक गुण (Physical properties of metals)

1. चमकदार सतह (Shining surface)

2. ठोस अवस्था (Solid state) अपवाद स्वरूप पारा (Murcury) कमरे के ताप में द्रव अवस्था में पाया जाने वाला धातु है।

3. उच्च गलनांक (High melting point) सभी धातुओं का गलनांक अत्यधिक होता है, अतः उन्हें ठोस से द्रव अवस्था में लाने के लिए उच्च ताप की आवश्यकता होती है।

4. अत्यधिक घनत्व (High Density) सभी धातुओं का घनत्व अत्यधिक होता है, अर्थात उनके प्रति इकाई आयतन में परमाणुओं की मात्रा अत्यधिक होती है, तथा वायु का अवकाश कम होता है।

5. बड़ी परमाण्विक त्रिज्या (Large atmomic radius) अधातुओं की तुलना में धातुओं के परमाणुओं का आकार बड़ा होता है।

6. अभंगुरता - धातुओं में अभंगुरता का गुण होता है, जिसके कारण इनको पीटने पर ये टूटते नहीं बल्कि फैलने लगते हैं।
एक ही स्थानीय तापमान पर, लकड़ी की किसी वस्तु की अपेक्षा लोहे की वस्तु को छूने पर लोहे की वस्तु अधिक ठंडी प्रतीत होती है- लोहा एक धातु है जो लकड़ी जो कि एक अधातु है की अपेक्षा ऊष्मा का अधिक अच्छा चालक होता है। अतः लोहे की वस्तु को छून पर स्पर्श-स्थल का ताप पिण्ड में संवाहित हो जाता है और शीतल-स्पर्श का अनुभव होता है। लकड़ी की वस्तु ताप का कुसंवाहक है, अतः इसके स्पर्श से इसका ताप शरीर में प्रवेश करने लगता है, जिससे शीतलता का अनुभव नहीं होता है।

24 कैरेट सोना 
कैरेट माप की इकाई है, जिसके द्वारा बहुमूल्य धातुओं और हीरों की तौल ली जाती है। सोना की विशुद्धता भी कैरेट में व्यक्त की जाती है। 24 कैरेट सोना विशुद्ध सोना माना जाता है, जिसमें किसी धातु की मिलावट नहीं रहती है। परन्तु यह मुलायम होता है कि आभूषण बनाने के कार्य में इसका उपयोग, किसी कठोर धातु के साथ मिश्र धातु बनाये बिना, नहीं किया जा सकता है। आभूषण बनाने के लिए सामान्यतः तांबे के साथ इसकी मिश्र-धातु तैयार की जाती है।

7. विद्युत के सुचालक (Conductor of Electricity)
धातु विद्युत के सुचालक होते हैं, इसलिए इनसे विद्युत के तार एवं अन्य उपकरण बनाए जाते हैं।

8. ऊष्मा के सुचालक (Conductor of Heat) 
धातु ऊष्मा के भी सुचालक होते हैं, इसलिए विभिन्न प्रकार के बर्तन बनाने में इनका उपयोग किया जाता है।

धातुओं के रासायनिक गुण (Chemical properties of metals)

1. निम्न आयनीकरण ऊर्जा (Low inonizing energy) : अधातुओं की तुलना में धातुओं की आयनीकरण ऊर्जा कम होती है, अतः इन्हें आसानी से आयनीकृत किया जा सकता है।

2. निम्न विद्युतऋणता (Low electronegativity) : अधातुओं की तुलना में इनकी विद्युतऋणता भी कम होती है, क्योंकि इनके संयोजी कोश के इलेक्ट्रोन आसानी से निकाले जा सकते हैं।

3. अधिकांश धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड प्रदान करते हैं।
जंग लगने पर लोहे की छड़ का भार बढ़ जाता है : जंग लगना एक रासायनिक प्रतिक्रिया है जिसमें लोहा आर्द्रता की उपस्थिति में ऑक्सीजन अवशोषित करता है और लौह ऑक्साइड के रूप में परिवर्तित हो जाता है। जंग लगने पर लोहे के भार में उतनी ही वृद्धि होती है, जितना यह ऑक्सीजन अवशोषित करता है। अतः जंग लगा लोहा लौह-ऑक्साइड (लोहा+ऑक्सीजन) है, जिसका भार जंगरहित लोहे से निश्चय ही अधिक होगा।

4. धातुओं की ऑक्सीजन से क्रिया (Reactions with Oxygen) : लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऑक्साइड बनाती हैं।
उदाहरण
  • 4AI+3O2 🠒 2A12O3 

5. धातुओं की जल से अभिक्रिया (Reactions with water) : धातुओं की जल से अभिक्रिया कराने पर हाइड्रोजन गैस और धातु ऑक्साइड उत्पन्न होता है।
उदाहरण 
  • 2Na(s) + 2H2O(1) 🠒 2NaOH(aq) + H2(g) + Heat 

6. धातुओं की अम्ल के साथ अभिक्रिया (Reactions with Acid) 
धातुएँ अम्ल से क्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस का निर्माण करती हैं। 
उदाहरण
  • 2Mg (s) + 2HCI (aq) 🠒 2MgCI(aq) + H2(g) 

धातुओं की क्रियाशीलता का क्रम (Reactivity order of Metals)
सभी धातुएँ उपयुक्त अभिक्रियाएँ करेंगी परंतु उनकी क्रियाशीलता कम या ज्यादा हो सकती है. क्रियाशीलता की यह कमी कई कारणों पर निर्भर करती है जैसे धातुओं की भिन्न-भिन्न आयनीकरण ऊर्जा, परमाणुओं का भिन्न-भिन्न आकार, संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉनों की भिन्न-भिन्न संख्या, नाभिक से संयोजी कोश की दूरी आदि। इन तथ्यों के आधार पर धातुओं की क्रियाशीलता के आरोही क्रम को इस प्रकार दिखाया जा सकता है-
  • gold < silver < murcury < copper < Hydrogen < Led < Iron <Zinc <Aluminium<Magnesium <Calcium < Sodium<Potassium
इस प्रकार हम देख सकते हैं कि धातुओं में पोटैशियम सबसे अधिक क्रियाशील तथा सोना सबसे कम क्रियाशील धातु है।

धातुओं के उपयोग (Uses of Metals)

धातुओं के उपर्युक्त गुणों के कारण इनका उपयोग अनेक कार्यों के लिए किया जाता है। जैसे कल-कारखानों की अधिकतर मशीनें धातुओं से बनी होती है। 
सोने जैसे कुछ धातुओ की अभंगुरता एवं तन्यता का लाभ उठाकार इनके आभूषण बनाए जाते हैं। 
ताँबे के तार बनाए जाते हैं, जो विद्युत का सुचालक होने के साथ-साथ जल्दी टूटता भी नहीं है।
ऊष्मा का कुचालक होने के कारण इनसे बर्तन बनाये जाते हैं। आदि। 

क्षारीय धातु (Alkali metals) 
क्षारीय धातुओं में अन्य धातुओं की तुलना में कुछ विशेष गुण होते हैं।

आर्वत सारणी में इनका स्थान (There position in Periodic Table) : आवर्त सारणी में क्षारीय धातुओं को बॉयी तरफ अर्थात वर्ग IA में रखा गया है। 

क्षारीय धातुओं के उदाहरण (Examples of Alkali Metals)
  1. लीथियम (Lithium) (Li)
  2. सोडियम (Sodium) (Na) 
  3. पोटैशियम (Potassium) (K) 
  4. रूबीडियम (Rubidium) (Ru) 
  5. सीजियम (Cesium) (Cs)
  6. फ्रन्शियम (Francium) (Fr) 

क्षारीय धातओं के सामान्य गुण (Common Properties of Alkali Metals)
  • इनका घनत्व अन्य धातुओं की तुलना में कम होता है। 
  • इनमें संयोजी कोश में एक ही इलेक्ट्रॉन होता है। 
  • इनकी परमाण्विक त्रिज्या उनके आवर्त में सबसे अधिक होती है। 
  • इनकी आयनिक ऊर्जा अन्य धातुओं एवं अधातुओं की तुलना में अत्यधिक कम होती है। 
  • इनकी विद्युतऋणता अन्य धातुओं की तुलना में कम होती है। 
  • ये अन्य धातुओं की अपेक्षा अधिक क्रियाशील होते हैं।
  • सोडियम तो इतना अधिक क्रियाशील होता है कि खुले में रखने पर क्रिया कर लेता है इसलिए इसे सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी तेल में डूबा कर रखा जाता है। 

अधातु (Non Metals) 

आवर्त सारणी के कुछ तत्व अधातु हैं। इन्हें मुख्यतः आवर्त सारणी में दाहिने तरफ ऊपर की ओर स्थान (इनका p उपकक्षक आधा भरा होता है) मिला है।
  • अधातु तीनों अवस्था में पाए जाते हैं। ब्रोमीन ही केवल ऐसा अधातु है जो द्रव अवस्था में पाया जाता है।
  • अधातु मुलायम होते हैं अपवाद हीरा जो कि कार्बन का एक अपरूप है प्रकृति में पाए जाने सबसे कठोर पदार्थ है।
  • अधातु में धातु की तरह चमक नहीं होते चमक नहीं होता है। अपवाद आयोडीन में धातु की तरह ही चमक होती है।
  • धातुऊष्मा एवं विद्युत का सुचालक नहीं होता है।अपवाद ग्रेफाइट जो कार्बन का एक अपरूप हैविद्युत का सुचालक होता है।
  • अधातु आघातवर्धनीय नहीं होते हैं।
  • अधातु तन्यता के गुण नहीं दिखाते हैं।
  • अधातु को पीटने पर गूंजता हुआ स्वर उत्पन्न नहीं होता है, अर्थात अधातु ध्वनिक नहीं होते हैं। उदाहरण - कार्बन ऑक्सीजन हाइड्रोजन क्लोरीन हिलियम फास्फोरस आदि।

अधातुओ के  उदाहरण (Examples of Nonmetals)
  • हाइड्रोजन (Hydrogen) 
  • कार्बन (Carbon)
  • नाइट्रोजन (Nitrogen)
  • ऑक्सीजन (Oxygen)
  • फॉस्फोरस (Phosphorus)
  • सल्फर (Sulfur)
  • सेलेनियम (Selenium) 

अधातुओं के भौतिक गुण

  1. उच्च आयनीकरण ऊर्जा (High ionizing energies) : इनकी आयनीकरण ऊर्जा धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है, अतः ये विद्युत चालन के लिए उपयुक्त नहीं होते।
  2. उच्च विद्युतऋणता (High electronegativity) 
  3. ऊष्मा के दुर्बल चालक या कुचालक 
  4. विद्युत के दुर्बल चालक या कुचालक 
  5. ये ठोकर लगने पर टूट जाते हैं। 
  6. इनमें धात्विक चमक नहीं होती।
  7. ये आसानी से इलेक्ट्रोन ग्रहण करके स्थायित्व की अवस्था में आने की कोशिश करते हैं। 
  8. ये ठोस, द्रव, गैस किसी भी अवस्था में पाये जाते हैं।
  9. अधिकांश अधातुएँ ऑक्साइड प्रदान करते हैं जो जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं।

अधातुओं के रासायनिक गुण (Chemical properties of Nonmetals)
1. अधातुओं की धातुओं से क्रिया : उच्च विद्युतऋणात्मकता वाले अधातु धातुओं का ऑक्सीकृत करके उनके ऑक्साइड बना देते हैं।
उदाहरण
  • 2Mg(s) + O2 (g) 🠒 2MgO(s)  

2. निम्न विद्युतऋणात्मकता वाले अधातु धातुओं के यौगिकों से क्रिया करके विच्छेदन (Reduction) कर देते हैं। 
उदाहरण 
  • Fe2O3(s) + 3C(s) 🠒 2Fe (s)+3CO(g)

सारांश
  • आवर्त सारणी में धातु तत्वों को मुख्य रूप से बॉयी तरफ और बीच में स्थान दिया गया है, अर्थात वर्ग IA IIA (क्षारीय धातु) वर्ग IB, VIIIB (संक्रमण धातु) आदि मुख्य धात्विक तत्व हैं। 
  • लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऑक्साइड बनाती हैं। 
  • आवर्त सारणी में क्षारीय धातुओं को बॉयी तरफ अर्थात वर्ग IA में रखा गया है। 
  • सोडियम की अत्यधिक क्रियाशीलता के कारण इसे मिट्टी के तेल में डूबा कर रखा जाता है।
  • उच्च विद्युतऋणात्मकता वाले अधातु धातुओं का ऑक्सीकृत करके उनके ऑक्साइड बना देते हैं।
dhatu aur adhatu mein antar

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