विक्रय संवर्धन किसे कहते हैं? | vikray samvardhan kise kahate hain

विक्रय संवर्धन

विक्रय संवर्धन दो शब्दों से बना है; विक्रय जिसका अर्थ बिक्री से है और संवर्धन जिसका अर्थ बढ़ाना है। इस तरह विक्रय संवर्धन का अर्थ बिक्री बढ़ाने से लिया जाता है। बिक्री बढ़ाने वाली अथवा उसकी वृद्धि में सहायता करने वाली प्रत्येक क्रिया अथवा निर्णय विक्रय संवर्धन कहलाता है। उदाहरण के लिए जब आप साबुन खरीदने जाते हैं तो दुकानदार आपसे कहता है कि दो साबुन खरीदने पर एक अतिरिक्त साबुन मुफ्त मिलेगा।
vikray samvardhan kise kahate hain
आप इस बात से आकर्षित होते हैं क्योंकि ऐसा करने से आप एक साबुन की कीमत बचा पाते हैं। यह बिक्री बढ़ाने का एक तरीका है। इसी तरह आपने सुना होगा साबुन के अंदर सोना पाओ, लखपति बनो, विदेश यात्रा का मौका जीतो, एक किलो के पैकेट पर तीस प्रतिशत अतिरिक्त, कार्ड खुरचो और इनाम पाओ आदि।
इसके अलावा आपने यह भी देखा होगा कि किसी उत्पाद के साथ लंच बॉक्स, पैन्सिल बॉक्स, शैम्पू पाउच, चायपत्ती के साथ कप मुफ्त आदि दिए जाते हैं। यह सब उत्पाद की बिक्री बढ़ाने व लाभ प्राप्त करने के तरीके होते हैं। चार्ल्स. एम. एडवर्ड्स एवं विलियम एच. हॉवर्ड के अनुसार “प्रत्येक वह क्रिया जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बिक्री को बढ़ाने में लाभकारी सहयोग करती है, विक्रय संवर्धन में सम्मिलित की जाती है।

विक्रय संवर्धन के उद्देश्य

आधुनिक समय में विक्रय संवर्धन का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। उपभोक्ता को आकर्षित करने के लिए विक्रय संवर्धन को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। विक्रय संवर्धन का प्रमुख लक्ष्य हर सम्भव लाभार्जन करना होता है चाहे वह दीर्घ अवधि में हो या अल्प अवधि में। विक्रय संवर्धन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं-
  • नए उत्पाद या सेवा का बाजार में परिचय करने में सहायता पहुँचाना : इस कार्य हेतु कम्पनियां नए उत्पाद के मुफ्त नमूने बाँटती हैं। इनको प्रयोग करने के पश्चात् उपभोक्ता में इनके प्रति रुचि जागती है और फिर वे उपयोग हेतु उत्पाद को खरीदते हैं। इसके अलावा नए उत्पाद की गुणवत्ता, विभिन्न उपयोग, मूल्य आदि के बारे में जानकारी भी विक्रय संवर्धन के द्वारा दी जाती है।
  • पुराने उत्पादों को नए कलेवर या आकार में प्रस्तुत करना।
  • किसी कम्पनी द्वारा नए क्षेत्रों में प्रवेश करने हेतु विक्रय संवर्धन का सहारा लिया जाता है। किसी साबुन बनाने वाली कम्पनी द्वारा शैम्पू के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए कूपन एवं मुफ्त नमूने जैसे विक्रय संवर्धन के तरीकों का प्रयोग किया जाता है।
  • नए उपभोक्ताओं को आकर्षित करना और पुराने उपभोक्ताओं को बनाए रखना : विक्रय संवर्धन किसी नए उत्पाद के लिए नए ग्राहक बनाने में सहायता करता है। बाजार जाने पर उपभोक्ता इन उत्पादों की तरफ आकर्षित होते हैं जो छूट, उपहार, इनाम आदि प्रदान करते हैं। इनसे प्रभावित होकर उपभोक्ता वस्तुएं खरीदता है। इस तरह यह पुराने उपभोक्ताओं को बनाए रखता है और साथ ही नए उपभोक्ताओं को वस्तुएं खरीदने के लिए प्रेरित करता है।
  • मौसमी उत्पादों की बिक्री को बनाए रखना : कुछ ऐसे उत्पाद जैसे फ्रिज, पंखे, कूलर, ए.सी., रूम हीटर, सनस्क्रीन, ग्लिसरीन साबुन आदि उत्पाद जिनका उपयोग एक विशिष्ट मौसम में ही होता है, की बिक्री बनाए रखने हेतु उत्पादककर्ता और डीलर बेमौसमी छूट देते हैं, जैसे सर्दी के मौसम में फ्रिज के दाम अपेक्षाकृत कम होते हैं।
  • प्रतियोगी चुनौतियों का सामना करना : वर्तमान समय में व्यापार को प्रतियोगिताओं का सामना करना पड़ता है। बाजार में निरंतर नए उत्पाद आ रहे हैं और पुराने उत्पादों में सुधार हो रहे हैं। अतः बाजार में विक्रेता और उत्पादनकर्ता की हिस्सेदारी बनाये रखने हेतु विक्रय संवर्धन आवश्यक है।
  • उपभोक्ता में उत्पाद की स्मृति बनाए रखना : विक्रय संवर्धन का एक प्रमुख उद्देश्य होता है कि उपभोक्ता के मस्तिष्क में उत्पाद की स्मृति को बनाए रखना। हालांकि यह कार्य विज्ञापन के द्वारा भी होता है परंतु संवर्धन गतिविधियों के द्वारा इस उद्देश्य की प्राप्ति में सहायता होती है।
  • थोक विक्रेता और फुटकर विक्रेता को अधिक सुविधाएं जैसे उधार पर क्रय करना, नकद छूट, मुफ्त उपहार इत्यादि प्रदान कर उत्पाद को अधिक खरीदने हेतु प्ररित करने के लिए विक्रय संवर्धन का सहारा लिया जाता है।
  • इसके अलावा विक्रय संवर्धन के अन्य उद्देश्य हैं जैसे ब्रांड चेतना में वृद्धि एवं निष्ठा बनाना, उत्पाद के क्रय की निरंतरता बनाए रखना, विशिष्ट उपभोक्ता समूह का ध्यान आकर्षित करना, ब्रांड के उपयोग को आगे बढ़ाना तथा शोध हेतु नाम एवं पते प्राप्त करना।

विक्रय संवर्धन की विभिन्न तकनीकें

विक्रय संवर्धन के लिए जिन तरीकों को अपनाया जाता है, उन्हें विक्रय संवर्धन तकनीक कहते हैं। विक्रय संवर्धन तकनीक को दो श्रेणियों में बाँटा गया है:-
  1. उपभोक्ता संवर्धन तकनीक
  2. व्यापार संवर्धन तकनीक

उपभोक्ता संवर्धन तकनीक
इसके अंतर्गत उन उपायों को अपनाया जाता है जिससे उपभोक्ता उन वस्तुओं को क्रय करने के लिए दुकानदार तक पहुँचने के लिए प्रेरित होता है। उपभोक्ता संवर्धन के अंतर्गत निम्नलिखित तरीकों को परिस्थिति एवं सुविधा के अनुसार अपनाया जाता है

मुफ्त नमूने
आपने बाजार से सामान खरीदते समय विभिन्न वस्तुएं जैसे शैम्पू, कॉफी, डिटरजेंट के पाउच आदि के नमूने मुफ्त में पाए होंगे। कभी-कभी सामान खरीदे बिना भी दुकानदार उपभोक्ताओं को मुफ्त नमूने बाँटता है। उपभोक्ता नमूनों का उपभोग कर स्वतः ही वस्तु के गुण से प्रभावित होकर उस वस्तु का स्थायी ग्राहक बन जाता है। नए उत्पादों के प्रचार हेतु भी इस विधि का प्रयोग किया जाता है। मुफ्त नमूनों का वितरण घर-घर जाकर, सड़क पर या विशिष्ट व्यक्तियों को डाक द्वारा भी किया जाता है।

कूपन
कूपन एक तरह का प्रमाण पत्र होता है जिसके द्वारा उपभोक्ता को विशिष्ट वस्तु क्रय करने में उसके मूल्य में कुछ छूट दी जाती है या कुछ वस्तु का प्रलोभन दिया जाता है। यह कूपन अखबार में छपे होते हैं जिन्हें फुटकर विक्रेता के पास ले जाने पर मूल्य में छूट मिलती है या यह कूपन किसी अन्य वस्तु के अंदर रख दिए जाते हैं और एक निश्चित संख्या में एकत्रित होने पर कुछ नकद छूट मिल जाती है। फुटकर विक्रेता को कूपन के मूल्य का भुगतान उत्पादकर्ता द्वारा होता है।

प्रीमियम अथवा अधिमूल्य
जब किसी उत्पाद के क्रय के साथ कम मूल्य का अन्य उत्पाद मुफ्त में मिलता है तो वह प्रीमियम कहलाता है। उदाहरण के लिए बॉर्नविटा के साथ लंच बॉक्स, टूथपेस्ट के साथ ब्रश आदि। विक्रय संवर्धन का यह उपाय आजकल काफी प्रचलित है। इसका उद्देश्य पुराने उपभोक्ताओं को क्रय हेतु प्रोत्साहित करना है। प्रीमियम में दी जाने वाली वस्तु प्रायः काफी कम मूल्य की होती है। यह या तो पैकेट के अंदर रखी जाती है या पैकेट के बाहर वस्तु की सूचना मात्र छपी होती है।

धन वापसी प्रस्ताव
इस विधि के अंतर्गत उत्पादनकर्ता यह प्रस्ताव रखता है कि यदि कही गई समयावधि में उपभोक्ता को लाभ नहीं होगा तो उत्पादनकर्ता उपभोक्ता का धन वापस कर देगा। यह विधि बाजार में नए उत्पाद के परिचय हेतु लाभकारी है और इससे उपभोक्ता में उक्त उत्पाद हेतु विश्वास उत्पन्न होता है।

अस्थाई मूल्य छूट
इस विधि के अन्तर्गत वस्तु को उसके वास्तविक मूल्य से भी कम मूल्य में बेचा जाता है। जैसे साबुन खरीदने पर दो रूपये की छूट, चाय की खरीद पर 20 रूपये की छूट आदि। यह विधि एक ही उत्पाद के अन्य ब्रांडों के प्रति उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए अपनाई जाती है।

आदान-प्रदान योजना
इस योजना में पुराने उत्पाद के बदले नया उत्पाद कम कीमत में दिया जाता है। यह उन्नत उत्पाद की तरफ ध्यान आकर्षित करवाने का सबसे अच्छा तरीका है। जैसे आपने सुना होगा पुराने प्रेशर कुकर के बदले नए प्रेशर कुकर की खरीद पर पाँच सौ रुपये की छूट।

मेले और प्रदर्शनियां
विक्रय संवर्धन के लिए कई बार मेले एवं प्रदर्शनियों का उपयोग किया जाता है। इनका संचालन स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। वस्तुओं का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर उनके बारे में बताया जाता है और उचित छूट के साथ बेचा जाता है। जैसे दिल्ली के प्रगति मैदान में हर साल लगाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला।

ट्रेडिंग स्टाम्प
इस विधि के अंतर्गत जब भी उपभोक्ता कोई विशिष्ट उत्पाद खरीदता है तो विक्रेता उसे एक टिकट देता है जिसे क्रेता सुरक्षित रखता है। एक निश्चित समयावधि में टिकट की एक निश्चित संख्या जमा हो जाने पर उन्हें विक्रेता को लौटाकर कोई निश्चित मूल्य की वस्तु मुफ्त में ली जा सकती है।

खुरचें और उपहार जीतें
इस योजना के अन्तर्गत उपभोक्ता उत्पाद पर बने एक विशिष्ट निशान को खरोचता है और इस निशान के नीचे बने संदेश के अनुसार उसे उपहार का लाभ मिलता है। इस तरह निर्माणर्ता द्वारा उपभोक्ता को मुफ्त में उपहार, मूल्य में छूट या कहीं भ्रमण का अवसर दिया जाता है।

प्रतियोगिताएं
यह वस्तु से अप्रत्यक्ष रूप से परिचय कराने का एक तरीका है। इसके अंतर्गत उपभोक्ताओं को पैकिंग का ढक्कन, खाली डिब्बा, अंदर रखे गए कूपन आदि को संलग्न करने को कहा जाता है तथा उस वस्तु के संबंध में एक वाक्य भी लिखने को कहा जाता है, जैसे मुझे 'क' नामक चाय पसंद है क्योंकि ........।

निःशुल्क प्रशिक्षण
इसके विधि के अंतर्गत उत्पादक या वितरक उपभोक्ताओं को खरीदी गई वस्तु के उपयोग, देख-रेख, मरम्मत आदि के बारे में प्रशिक्षण देते हैं या प्रशिक्षण की व्यवस्था कराते हैं। ऐसा करने से उपभोक्ताओं को वस्तु क्रय करने हेतु प्रोत्साहन मिलता है। उदाहरण के लिए सिलाई-कढ़ाई के निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था।

व्यापार संवर्धन तकनीक
उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर अपनायी गयी संवर्धन विधियाँ तभी सफल हो सकती हैं जब उनमें थोक एवं फुटकर विक्रेताओं जैसे मध्यस्थ व्यापारियों को सम्मिलित किया जाए। मध्यस्थों के लिए अपनाए जाने वाले संवर्धन उपाय व्यापार संवर्धन कहलाते हैं। इसके अंतर्गत निम्नलिखित विधियाँ आती हैं

क्रय भत्ता छूट
इस विधि में एक निश्चित मात्रा अथवा मूल्य तक के उत्पाद को एक निश्चित समयावधि में क्रय करने वाले व्यापारी को क्रय भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता नकद अथवा बिल में कटौती के रूप में दे दिया जाता है। इससे वस्तु की लागत कम हो जाती है और व्यापारी अधिक लाभ कमा सकते हैं।

पुनः क्रय भत्ता
यह भत्ता तब दिया जाता है जब व्यापारी कोई वस्तु पहली बार खरीदता है। इस विधि से विक्रय कम नहीं होता क्योंकि एक व्यापारी द्वारा खरीद करने पर वह इस भत्ते का अधिकारी हो जाता है।

गणना एवं पुनः गणना
इस विधि में व्यापारी के स्टॉक की गणना योजना में सम्मिलित होने पर तथा बंद होने पर की जाती है। इन दोनों गणनाओं के बीच जितना माल बिकता है उसकी मात्रा या मूल्य पर कुछ रकम भत्ते के रूप में दी जाती है।

विक्रय प्रतियोगिताएं
यह विधि वितरकों, व्यापारियों और उनके कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयोग में लायी जाती है। इसके अंतर्गत जो भी विक्रेता कम्पनी के उत्पादों की बिक्री सर्वाधिक करता है, उसे नकद इनाम दिया जाता है।

प्रदर्शन और विज्ञापन भत्ता
इसके अंतर्गत व्यापारी को निमार्णकर्ता के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने हेतु भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता दुकान में प्रदर्शनी लगाने हेतु दी गई जगह पर निर्भर करता है।

व्यापारिक प्रीमियम
यह एक तरह का पुरस्कार है जो मध्यस्थों तथा विक्रेताओं को उनके द्वारा किए गए विक्रय में वृद्धि के अतिरिक्त प्रयासों के लिए दिया जाता है। प्रीमियम में दीवार घड़ियाँ, कुर्सियाँ, मेज, तश्तरी आदि दी जाती हैं।

अन्य उपाय
उत्पादक संस्थाएं विक्रय संवर्धन के कई अन्य उपाय भी अपनाती हैं, जैसे मध्यस्थों के विक्रय स्थलों का आधुनिकरण एवं मरम्मत, विक्रय स्थलों पर फैशन शो, दुकानों के लिए बोर्ड, ताख्तियाँ, कैलेंडर, पोस्टर, विक्रय साहित्य उपलब्ध कराना आदि।

विक्रय संवर्धन के लाभ और हानि

विक्रय संवर्धन विपणन का ऐसा भाग है जिसे यदि सही प्रकार से लागू किया गया तो वह कम फायदे वाली वस्तु से अधिक लाभ दिलवा सकती है या अधिक फायदे वाली वस्तु से हानि कर सकती है। इस भाग में आप विक्रय संवर्धन से होने वाले फायदे एवं नुकसान के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

विक्रय संवर्धन से लाभ

आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विक्रय संवर्धन विपणन का एक मुख्य अंग बन गया है। विक्रय संवर्धन से निम्नलिखित लाभ हैं-
  • विक्रय संवर्धन तकनीकों द्वारा उपभोक्ता को बाजार में उपलब्ध विभिन्न कम्पनियों के उत्पादों की विशेषताओं, अंतर और उनके बहु उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। उपभोक्ता इन्हीं जानकारियों के आधार पर उत्पाद खरीदता है जिससे वस्तु के क्रय में सफलता मिलती है।
  • विक्रय संवर्धन तकनीक कुछ नया या अलग करने के लिए प्रेरित करती है जिससे उपभोक्ता को महत्व मिले।
  • विक्रय संवर्धन द्वारा नए विचार और संचार के अवसर प्राप्त होते हैं। उपभोक्ताओं को उत्पादों के बारे में जानकारियां प्रदान करने हेतु विभिन्न संचार माध्यमों का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए आजकल किसी भी नए उत्पाद की जानकारी इंटरनेट या मोबाइल द्वारा प्रदान की जाती है।
  • विक्रय संवर्धन के द्वारा किसी एक वस्तु की नहीं अपितु उस वस्तु से संबंधित अन्य कई वस्तुओं की बिक्री बढ़ जाती है। जैसे किसी विशेष ब्रांड के टूथपेस्ट की बिक्री बढ़ने से उस ब्रांड के टूथब्रश की बिक्री का बढ़ना।
  • विक्रय संवर्धन द्वारा मौखिक प्रचार होता है। किसी वस्तु या विक्रेता के नियमित ग्राहक जब उस उत्पाद की विक्रय संवर्धन तकनीक से प्रभावित होते हैं तो वह स्वतः उसका मौखिक प्रचार करने लगते हैं।
  • विक्रय की एक जैसी दिनचर्या होने से फुटकर व्यापारी अपना उत्साह खोने लगते हैं। संवर्धन विधियों से वे सक्रिय रहते हैं तथा व्यापार में होने वाली नई गतिविधियों के बारे में उन्हें प्रशिक्षित, तैयार और पुनः व्यवस्थित किया जा सकता है। साथ ही साथ विक्रय संवर्धन द्वारा रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं और लोगों का जीवन स्तर सुधरता है।
  • विक्रय संवर्धन तकनीक द्वारा कम समय में उपभोक्ता के व्यवहार में प्रभावशाली परिवर्तन लाया जा सकता है।
  • विक्रय संवर्धन द्वारा सफलता और योगदान को आसानी से मापा जा सकता है।
  • विक्रय संवर्धन द्वारा किसी नए विचार या नए उत्पाद को सीमित समय में जाँचने का अवसर मिल जाता है। इससे यह पता चल जाता है कि उस वस्तु को स्थायी उपयोग की वस्तु बनाने के लिए अतिरिक्त धन और समय की आवश्यकता तो नहीं।
  • विक्रय संवर्धन एक लचीली प्रक्रिया है। यदि एक विधि से सफलता नहीं मिलती तो दूसरी विधि को तुरन्त अपना लिया जाता है।

विक्रय संवर्धन से हानि

विक्रय संवर्धन से जहाँ एक ओर उपभोक्ता और मध्यस्थों को फायदा होता है, वहीं दूसरी तरफ इससे कुछ हानियां भी हैं। विक्रय संवर्धन की कुछ सीमाएं हैं जो निम्नलिखित हैं-
  • उपभोक्ताओं में सामान्यतः यह धारणा रहती है कि मौसमी विक्रय संवर्धन गतिविधियों का ध्येय निम्न स्तर की वस्तुओं को बेचना है।
  • उत्पादों पर दी गयी छूट वास्तविक नहीं होती है क्योंकि उत्पादों का मूल्य पहले से ही बढ़ा हुआ होता है।
  • यह गतिविधियाँ कम अंतराल की होती हैं तो नतीजा भी कम अवधि का होता है। जैसे ही मुफ्त उपहार, कूपन आदि प्रस्ताव हटा दिए जाते हैं, उत्पादों की माँग भी जल्दी कम पड़ जाती है।
  • व्यापारियों द्वारा दिया गया व्यापारिक सहयोग संदेहास्पद रहता है। विक्रेता इसलिए सहयोग नहीं करता क्योंकि उसके पास उत्पाद के संग्रह हेतु पर्याप्त जगह नहीं होती या उसकी दुकान में उत्पाद ज्यादा नहीं बिकता या उसे लगता है कि उसे उसके परिश्रम अनुसार लाभ नहीं होगा।
  • विक्रय संवर्धन से बाजार में विभिन्न ब्रांडों के उत्पादों में एक तरह की संवर्धन स्पर्धा हो सकती है जिससे ब्रांड की छवि को नुकसान पहुँच सकता है।
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