पदार्थ की अवस्थाएँ - पदार्थ की सभी 5 अवस्थाएँ | padarth ki avastha

पदार्थ की अवस्थाएँ

पदार्थ अपने तीन अवस्था में होते हैं; जैसे-ठोस, द्रव एवं गैस।
ठोस अवस्था में कणों के बीच आकर्षण बल अत्यधिक होता है, गैस अवस्था में कणों के बीच आकर्षण बल सबसे कम होता है।
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गैस अवस्था में कणों के बीच रिक्त स्थान सबसे अधिक होता है, ठोस अवस्था में कणों के बीच रिक्त स्थान सबसे कम होता है। ठोस एवं द्रवों के कणों की तुलना में गैसों के कणों की गति तेज होती है और अत्यधिक रिक्त स्थानों के कारण गैसों का अन्य गैसों में विसरण बहुत तीव्रता से होता है।
पदार्थ के कणों में उपस्थित अन्तराण्विक आकर्षण बल के आधार पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती है :
  1. ठोस
  2. द्रव
  3. गैस

वैज्ञानिक प्रयोगों एवं खोजों के आधार पर पदार्थ की दो और अवस्थाएँ खोजी गई है-
  1. प्लाज्मा
  2. बोस-आइन्स्टीन-कन्डन्सेट (B.E.C.)
अत: पदार्थ की कुल 5 अवस्थाएँ ज्ञात है।
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ठोस अवस्था

  • यह पदार्थ की सबसे व्यवस्थित अवस्था है।
  • ठोस अवस्था में पदार्थ के अवयवी कणों के मध्य प्रबल अन्तराण्विक आकर्षण बल पाया जाता है जिसके कारण ठोस कण अत्यधिक नजदीक होते हैं एवं एक निश्चित ज्यामिति बनाते हैं।
  • ठोस का आकार, आयतन एवं घनत्व निश्चित होते हैं।
  • ठोस पदार्थ असम्पीड्य होते हैं।
  • ठोस की अवस्था ताप के कारण परिवर्तित होती है किन्तु दाब के कारण ठोस अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है इसलिए ठोस असम्पीड्य होते हैं। उदाहरण- बर्फ को ताप देने पर वह जल में परिवर्तित हो जाता है।
  • ठोस सामान्यतया कठोर होते हैं।
  • ठोसों में बहने का गुण नहीं पाया जाता है। (अपवाद-अक्रिस्टलीय ठोस जैसे काँच में बहने का गुण विद्यमान होता है, यह सामान्यतया धीरे-धीरे बहते हैं इस कारण इन्हें अतिशीतित द्रव अथवा आभासी ठोस कहा जाता है।)
  • ठोसों में उच्च अन्तराण्विक आकर्षण बल के कारण इनका गलनांक उच्च होता है। उदाहरण- पत्थर, बर्फ, पेन, चॉक, चीनी आदि।

ठोसों का वर्गीकरण :
ज्यामिति के आधार पर ठोस दो प्रकार के होते हैं:
  1. क्रिस्टलीय ठोस
  2. अक्रिस्टलीय ठोस
  1. क्रिस्टलीय ठोस : ऐसे ठोस जिनकी ज्यामिति संरचना निश्चित होती है, क्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं। उदाहरण: नमक, हीरा, बर्फ, ग्रेफाईट।
  2. अक्रिस्टलीय ठोस : ऐसे ठोस जिनकी ज्यामिति संरचना अनिश्चित होती है, अक्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं। उदाहरण : कोयला, काँच, रबर, प्लास्टिक आदि।

द्रव अवस्था

पदार्थ की वह अवस्था जिसमें तरलता का गुण होता है, द्रव अवस्था कहलाती है।

द्रव अवस्था के गुण
  • द्रव पदार्थों का आकार अनिश्चित होता है। यह पात्र पर निर्भर करता है।
  • द्रव पदार्थ का आयतन निश्चित होता है।
  • द्रव पदार्थ में अवयवी कणों के मध्य आकर्षण बल कम होता है अर्थात् कण दूर-दूर होते हैं।
  • द्रव असम्पीड्य होते हैं।
  • द्रव में बहने का गुण पाया जाता है।

श्यानता
  • द्रव की सतह तथा जिस सतह पर द्रव बह रहा है उनके मध्य घर्षण, श्यानता कहलाता है।
  • यदि कोई पदार्थ तीव्र गति से प्रवाहित होता है तो उसकी श्यानता कम होती है।
  • श्यानता तरलता पर निर्भर करती है।
  • α=1/तरल
अर्थात् तरलता बढ़ने पर श्यानता घटती है।

गैसीय अवस्था
  • गैसीय अवस्था में पदार्थ के कणों के मध्य अन्तराण्विक आकर्षण बल का मान कम होता है अर्थात् कण दूर-दूर होते हैं।
  • गैसीय पदार्थ का आकार अनिश्चित होता है।
  • गैसीय पदार्थ का आयतन अनिश्चित होता है।
  • उदाहरण : वायु, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि।
  • गैसें गर्म करने पर ठोस और द्रव की अपेक्षा अधिक फैलती है क्योंकि इनमें द्रव और ठोस की अपेक्षा अन्तराण्विक बल दुर्बल होते हैं।

प्लाज्मा

  • प्लाज्मा की खोज विलिमय क्रूक्स ने की।
  • प्लाज्मा का नामकरण इरविन लेग्इम्यूर ने किया था।
  • प्लाज्मा लेटिन भाषा के शब्द प्लाज्मिक से लिया गया है जिसका अर्थ है चमकता हुआ।
  • प्लाज्मा पदार्थ की चौथी अवस्था है।
  • यह ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली अवस्था है।
  • यह अवस्था आयनिक अवस्था होती है अर्थात् पदार्थ की एकमात्र अवस्था जिसमें आयन तथा इलेक्ट्रॉन परस्पर स्वतंत्र रहते हैं।
  • प्लाज्मा पदार्थ की एकमात्र अवस्था है जिसमें पूर्ण रूप से विद्युत का चालन होता है।
  • रेडियो तरंगों के लिए प्लाज्मा उत्तरदायी है।
  • उच्च ताप के कारण तारों पर भी प्लाज्मा अवस्था पाई जाती है।
  • निऑन बल्ब तथा CFL में प्लाज्मा का उपयोग किया जाता है।

बोस-आइन्स्टीन-कन्डेन्सेट (B.E.C.)

  • यह पदार्थ की 5वीं अवस्था है।
  • इसका नाम भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर सत्येन्द्र नाथ बोस एवं अल्बर्ट आइन्स्टीन के सम्मान में रखा गया।
  • यदि किसी गैस को परम शून्य ताप, अति उच्च दाब पर गर्म एवं उच्च वोल्टता प्रदान की जाती है तो प्राप्त अवस्था B.E.C. होती है।
  • आइन्स्टीन की द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण के आधार पर यह अवस्था प्राप्त होती है।
  • सन् 2001 में एरिक कर्नेल, उल्फगैंग केटरले एवं कार्ल.ई.वैमेन ने सर्वप्रथम B.E.C. अवस्था बनाई। इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पदार्थों में अवस्था परिवर्तन

ताप व दाब के आधार पर पदार्थों में अवस्था परिवर्तन संभव है।
गलन, हिमन, वाष्पन, संघनन, उर्ध्वपातन एवं निक्षेपण अवस्था परिवर्तन की प्रक्रियाएँ है।
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  • गलन : किसी पदार्थ की ठोस अवस्था का द्रव अवस्था में बदलना, गलन कहलाता है। उदाहरण- बर्फ का पानी में परिवर्तन।
  • हिमन : किसी पदार्थ की द्रव अवस्था का ठोस अवस्था में परिवर्तन, हिमन कहलाता है। उदाहरण- पानी का बर्फ बनना।
  • वाष्पन : किसी पदार्थ की द्रव अवस्था का गैसीय अवस्था में परिवर्तन होना, वाष्पन कहलाता है। उदाहरण- जल का वाष्प बनना।
  • संघनन : किसी पदार्थ की गैसीय अवस्था का द्रव अवस्था में परिवर्तन होना, संघनन कहलाता है। उदाहरण- जलवाष्प का जल में परिवर्तित होना।
  • उर्ध्वपातन/निक्षेपण (Leaching) : किसी गैसीय अवस्था का सीधा ठोस अवस्था में परिवर्तन होना, उर्ध्वपातन कहलाता है। उदाहरण: कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का ठोस कार्बन डाई ऑक्साइड (शुष्क बर्फ) में बदलना।
  • उर्ध्वपातन (Sublimation) : किसी पदार्थ की ठोस अवस्था का सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तन होना, उर्ध्वपातन कहलाता है। उदाहरण: कपूर, नौसादर, आयोडीन आदि।

1. पदार्थ की अवस्था पर तापमान परिवर्तन का प्रभाव
गर्म करने पर पदार्थ की अवस्था बदल जाती है। गर्म होने पर ये ठोस से द्रव और द्रव से गैस बन जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे पदार्थ हैं, जो द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना, ठोस अवस्था से सीधे गैस में और वापस ठोस में बदल जाते हैं।
  • गलनांक जिस तापमान पर ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है, वह इसका गलनांक कहलाता है।
  • क्वथनांक वायुमंडलीय दाब पर वह तापमान जिस पर द्रव उबलने लगता है, उसे इसका क्वथनांक कहते हैं।
  • वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा वायुमंडलीय दाब पर 1kg द्रव को उसके क्वथनांक पर गैस में बदलने के लिये जितनी ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे वाष्पीकरण की प्रस्तुत ऊष्मा कहते है।
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2. पदार्थ की अवस्था पर दाब परिवर्तन का प्रभाव
तापमान घटने से और दाब के बढ़ने से गैस द्रव में बदल जाती है।
ठोस (CO2) जब वायुमंडलीय दाब की माप 1 वायुमंडलीय (atm) हो, तो द्रव अवस्था में आए बिना सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है। अत: ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को शुष्क बर्फ (dry ice) कहते हैं।
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अतः पदार्थ की अवस्थाएँ यानी ठोस, द्रव और गैस दाब और तापमान के द्वारा तय होती है।
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