प्रेगनेंसी के लक्षण - प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण | pregnancy ke lakshan

प्रेगनेंसी के लक्षण

हो सकता है कि आपके पीरियड एक ही दिन की देरी से हों, या फिर तीन सप्ताह हो चुके हों या फिर आपको पहले ही लग रहा हो कि कोई गड़बड़ है या फिर आपने पीरियड न होने की वजह से अंदाजा लगा लिया हो। हो सकता है कि आपको गर्भधारण के स्पष्ट लक्षण दिखने लगे हों।
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हो सकता है कि आप पिछले छह महीनों से यही कोशिश कर रही थीं या हो सकता है कि आपने दो सप्ताह पहले गर्भनिरोधक के बिना संबंध स्थापित कर लिए हों या फिर आप अभी तक सक्रिय रूप से कोशिश न कर रही हों; चाहे परिस्थितियाँ कोई भी क्यों न हों, चाहे आप किसी भी हालात में यह पुस्तक पढ़ने बैठी हों; आप जरूर यही सोच कर हैरान हो रही होंगी क्या मैं गर्भवती हूं? चलिए, हम बताने में मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण

"मेरी मित्र ने कहा कि वह प्रेगनेंसीटेस्ट कराने से पहले ही जानती थी कि वह गर्भवती है। क्या मैं भी पहले इस तरह पता लगा सकती हूं?"
इसका सबसे सही तरीका तो यही है कि आपका प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आए। तभी पता लग पाएगा कि आप मां बनने वाली हैं या नहीं!कई महिलाओं को कई सप्ताह तक गर्भावस्था के लक्षण पता नहीं चलते और कई महिलाएं पहले ही जान जाती हैं कि वे मां बनने वाली हैं। यदि आपको भी किसी ऐसे लक्षण का अनुभव हो तो होम प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाने में देर न करें। यह किसी भी कैमिस्ट स्टोर से आसानी से मिल जाएगी।

प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण
  1. नरम वक्ष व निप्पल
  2. स्तनाग्रों का गहरापन
  3. गूज़ बम्प?
  4. धब्बे
  5. बार-बार शौच (मूत्र) जाने की इच्छा
  6. थकान
  7. उबकाई आना
  8. गंध के प्रति संवेदनशीलता
  9. फूलना या ब्लौटिंग
  10. तापमान बढ़ना
  11. पीरियड न होना

नरम वक्ष व निप्पल

आप जानती ही होंगी कि पीरियड से पहले किस तरह वक्षस्थल को छूने से भी पीड़ा होती है? गर्भधारण से पहले वक्षस्थल काफी नरम हो जाता है। कई महिलाओं में हल्के संवदेनशील, भरे-भरे, छूने पर दुखने वाले वक्ष, गर्भावस्था के लक्षण हो सकते हैं। एक बार गर्भावस्था आरंभ हो जाए तो वक्षों के आकार में बदलाव आने के साथ-साथ और भी कई तरह के परिवर्तन आते हैं।

स्तनाग्रों का गहरापन

निप्पलों के आसपास का काला हिस्सा और भी गहरा होने लगता है। गर्भावस्था के दौरान ऐसा होना स्वभाविक ही है। साथ ही इनका आकार भी बढ़ जाता है। त्वचा के रंग में बदलाव आने का अर्थ है कि आपके शरीर में प्रेगनेंसी हार्मोन्स ने अपना काम करना शुरू कर दिया है।

गूज़ बम्प?

नहीं, सचमुच नहीं, पर निप्पलों के आसपास वाले गहरे हिस्से पर हल्के गूमड़ से उभर आते हैं (मोंटगूमरी टयूबरकल्स)। दरअसल ये वे ग्रंथियां होती हैं जो तेल का स्राव करती हैं और आपके निप्पल व आसपास के हिस्से को तैलीय बना देती हैं। यह सब इसी बात की तैयारी है कि आपको अपने शिशु को स्तनपान कराना होगा। शरीर आने वाले समय के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।

धब्बे

जब भ्रूण गर्भाशय में अपनी जगह बनाता है तो कई महिलाओं को हल्का स्राव होता है। यह आपके पीरियड से कुछ दिन पहले हो सकता है, यह रंग में हल्का गुलाबी होता है (लाल नहीं)।

बार-बार शौच (मूत्र) जाने की इच्छा

आपको बार-बार शौच (मूत्र) की इच्छा होती है? गर्भधारण के दो-तीन सप्ताह के बाद आपको बहुत जल्दी-जल्दी शौच (मूत्र) के लिए जाना पड़ता है।

थकान

इतनी थकान महसूस होती है कि पूरा शरीर हार जाता है। ऊर्जा समाप्त हो जाती है और पूरे शरीर में आलस छाया रहता है। आपका शरीर आने वाले समय के लिए तैयार हो रहा है।

उबकाई आना

पहली तिमाही में उबकाई की वजह से भी बार-बार बाथरूम भागना पड़ सकता है। गर्भधारण के फौरन बाद, कई महिलाओं को उबकाई व उल्टी (मॉर्निंगसिकनेस) की शिकायत हो जाती है। वैसे आमतौर पर यह छठे सप्ताह के आसपास शुरू होती है।

गंध के प्रति संवेदनशीलता

नई गर्भवती महिलाओं की सूंघने की क्षमता काफी संवेदनशील हो जाती है। उन्हें हर अच्छी-बुरी गंध भी तेजी से पता लगने लगती है।

फूलना या ब्लौटिंग

ऐसा लगता है कि पेट में कुछ फूल रहा है? हालांकि बाद में तो शिशु की वजह से पेट फूल ही जाएगा, लेकिन आरंभ में इसका हल्का सा एहसास महसूस होता है।

तापमान बढ़ना

'बैसल बॉडी तापमान'। यदि आप खास बैसल बॉडी थर्मामीटर से सुबह का तापमान मापें तो आपको पता चलेगा कि शरीर का तापमान 1 डिग्री बढ़ गया है। यह गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ ही रहता है। हालांकि यह पक्का संकेत नहीं है लेकिन यह छोटा संकेत, उस बड़ी खबर का अंदाजा तो देता ही है।

पीरियड न होना

यदि हमेशा आपके पीरियड सही समय पर होते हैं और इस बार नहीं हुए हैं तो प्रेगनेंसी टेस्ट से पहले ही प्रेगनेंसी होने का अंदाजा लगा सकती हैं।

प्रेगनेंसी का पता लगाना

"मैं यह पक्का पता कैसे लगाऊं कि मैं गर्भवती हूं या नहीं?"
सबसे पहले तो अपने मन की बात सुनें। इसी से आपको कुछ-कुछ अंदाजा हो जाएगा। वैसे सही अंदाजे के लिए चिकित्सा विज्ञान तो है ही। इन दिनों कई तरह के टेस्ट से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आप गर्भवती हैं या नहीं?

होम प्रेगनेंसी टेस्ट :- आप इसे अपने बाथरूम में बड़े आराम से, पूरी गोपनीयता से कर सकती हैं। ये काफी झटपट होते हैं। कई तो ऐसे हैं, जिन्हें आप पीरियड मिस करने से पहले भी कर सकती हैं (हालांकि ज्यादा सही नतीजे तो पीरियड के बाद ही मिलेंगे)।

इसमें मूत्र में एच.सी.जी. हॉर्मोन की जांच होती है, जिसे प्लेसेंटा बनाता है। यह आपके खून में मिलने में देर नहीं करता। मूत्र में इसकी जांच होते ही आपको पॉजिटिव नतीजे मिल जाएंगे। ये संवेदनशील तो होते हैं, पर इतने भी नहीं! गर्भधारण के एक सप्ताह बाद आपके खून में एच.सी.जी. तो होता है पर टेस्ट में इसकी जांच नहीं हो पाती। यदि आप पीरियड से सात दिन पहले भी जांच करेंगी तो गर्भावस्था होने के बावजूद निगेटिव नतीजे आएंगे।
अगर पीरियड से चार दिन पहले जांच करेंगी तो 60 प्रतिशत तक सही नतीजे मिल सकते हैं। पीरियड वाले दिन जांच करेंगी तो 90 प्रतिशत सही नतीजे मिलेंगे और एक सप्ताह बाद यह 97 प्रतिशत हो जाएंगे। ज्यों-ज्यों समय बढ़ता जाएगा, नतीजे उतने ही साफ और स्पष्ट होते जाएंगे। चूंकि आपको इस टेस्ट की मदद से अपनी गर्भावस्था का पहले ही अंदाजा हो जाता है इसलिए आप पहले ही डॉक्टर या दाई की राय लेकर अपनी पूरी देखभाल शुरू कर सकती हैं। हालांकि इसके बाद मेडिकल टेस्ट हैं। पूरी जांच और रक्त ही जांच से सबकुछ पूरी तरह पक्का हो जाएगा।

रक्त जांच :- गर्भधारण के एक सप्ताह के बाद यदि रक्त की जांच कराई जाए तो उससे 100 प्रतिशत पता चल जाता है कि आप गर्भवती हैं या नहीं! इसमें रक्त में एच.सी.जी की सही मात्रा व स्तर का अनुमान लगा गर्भावस्था की तारीख भी बताई जा सकती है क्योंकि गर्भावस्था बढ़ने के साथ-साथ रक्त में एच.सी.जी.की मात्रा भी बढ़ती है। कई डाक्टर रक्त के साथ-साथ मूत्र की जांच के निर्देश भी देते हैं।

मेडिकल जांच :- हालांकि रक्त व मूत्र की जांच से गर्भावस्था का सही अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन गर्भाशय के आकार,योनि व सरविक्स के रंग या सरविक्स की बनावट में अंतर से भी गर्भावस्था की मेडिकल जांच हो सकती है।

एक हल्की रेखा
"जब मैंने घर में होम प्रेगनेंसी टेस्ट किया तो उसमें सिर्फ हल्की सी रेखा दिखाई दी। क्या मैं गर्भवती हूं।"
आपके रक्त या मूत्र में एच.सी.जी. का स्तर दिखने पर ही इस टेस्ट में पॉजिटिव नतीजे दिखाई देते हैं। यह आपके शरीर में तभी बनता है, जब आप गर्भवती होती हैं। टेस्ट में चाहे हल्की सी रेखा क्यों न आ रही हो, आप गर्भवती हैं।
आपको गाढ़ी की बजाय हल्की रेखा इसलिए दिखी होगी क्योंकि आप जो टेस्ट कर रही हैं, वे संवेदनशीलता के स्तर पर अलग-अलग होते हैं। गर्भावस्था में एच.सी.जी. का स्तर हर रोज बढ़ता है। यह भी देखना होगा कि गर्भधारण किए कितना समय बीत गया है। यदि आपने बहुत जल्दी जांच की है तो उसमें एच.सी.जी.का हल्का संकेत ही मिलेगा।
अपने प्रेगनेंसी टेस्ट की संवेदनशीलता जांचने के लिए पैकेट के पीछे दिए माप व मात्राओं को ध्यान से पढ़ें। इसमें मिली इंटापैशनलयूनिट पर लीटर की मात्रा जितनी कम होगी,टेस्ट उतना ही संवेदनशील होगा। 50 मिली की बजाय 20 मिली वाला टेस्ट आपको जल्दी और बेहतर नतीजे दे सकता है। ज्यादा मंहगे टेस्ट अधिक संवेदनशील होते हैं।
यह भी याद रखें कि गर्भावस्था में प्रतिदिन एच.सी.जी.का स्तर बढ़ेगा। यदि आप बहुत जल्दी टेस्ट कर रही हैं तो रेखा हल्की ही आएगी। दो दिन बाद फिर से देखें। आपका सारा शक दूर हो जाएगा।

प्रेगनेंसी के संभावित लक्षण

संकेत कब उभरते हैं अन्य संभावित कारण
योनि स्राव व गर्भाशय मुख के उत्तकों का रंग हल्का बैंगनी पड़ना पहली तिमाही मासिक चक्र पूरा न होना
सर्विक्स और गर्भाशय का मुलायम होना तकरीबन 6 हफ्ते मासिक चक्र में देरी
पेट के निचले हिस्से व गर्भाशय का फैलाव गर्भधारण के 8 से 12 सप्ताह के बाद फायब्रायड ट्यूमर
यूटेराइन आर्टरी पल्सेशन प्रारंभिक गर्भावस्था फायब्रायड, ट्यूमर गैस
भ्रूण की हलचल गर्भावस्था के 16-22 सप्ताह में प्रारंभ पेट में संकुचन

प्रेगनेंसी के सकारात्मक लक्षण

संकेत ये कब उभरते हैं अन्य संभावित कारण
अल्ट्रासाउंड की मदद से गैस्टेशनल सैक या भ्रूण देखना गर्भधारण के 4 से 6 सप्ताह बाद कोई नहीं
भ्रूण के दिल की धड़कन गर्भावस्था के 10-12 सप्ताह बाद कोई नहीं
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