Ram Shalaka Prashnavali | राम शलाका प्रश्नावली | श्रीराम शलाका प्रश्नावली

राम शलाका प्रश्नावली

राम शलाका प्रश्नावली जो राम चरित मानस की चौपाइयो के माध्यम से कार्य के परिणाम के बारे मे बताती है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित राम चरित मानस की इन नौ चौपाइयो का प्रयोग राम शलाका प्रश्नावली मे किया गया है। राम शलाका प्रश्नावली मे 225 कोष्टक है। इनका मूलांक 2+2+5=6 आता है। जो नव ग्रह का प्रतीक है। इसमे नौ चौपाई अलग अलग ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। गोस्वामी तुलसीदास का ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान है। ज्योतिष के बारे मे उन्होने विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला है।
Ram Shalaka Prashnavali
मानसानुरागी महानुभावों को श्री राम शलाका प्रश्नावली का विशेष परिचय देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उसकी महत्ता एवं उपयोगिकता से प्रायः सभी मानसप्रेमी परिचित होंगे। अतः नीचे उसका स्वरूपमात्र अंकित करके, उससे प्रश्नोत्तर निकालने की विधि तथा उसके उत्तर फलों का उल्लेख कर दिया गया है। श्री राम शलाका प्रश्नावली का स्वरूप निम्न प्रकार है :

राम शलाका प्रश्नावली (Ram Shalaka Prashnavali)
विद्वानों का मत है कि राम चरित मानस को ज्योतिष का मानस शास्त्र कहना अधिक उपयुक्त होगा। गोस्वामी ने मानव जाति के जीवन के सभी प्रश्नो का उत्तर रामायण मे स्पष्ट रूप से दिये है। राम शलाका प्रश्नावली मे गोस्वामी ने तीन-तीन चोपाई द्वारा फल को विभाजित कर अपने आत्म ज्ञान से सत, रज और तम का सन्देश दिया है।
इन नौ चोपाइयो मे से तीन मे कार्य मे सन्देह बताया गया है। जो कि शनि, राहु, केतु का फल बताती है।
राम शलाका प्रश्नावली मे तीन चौपाइया कार्यसिद्धि बताती है। जो चन्द्र, गुरु और शुक्र का फल दर्शाती है।
राम शलाका प्रश्नावली मे तीन चौपाइया कार्य मे अनिश्चिय की स्थिति बताती है। जो सूर्य, मंगल, बुध के गुणो को दर्शाती है।

नोट :
इस प्रश्नावली को कोई भी किसी भी धर्म का व्यक्ति अपने इष्टदेव का स्मरण करके प्रयोग कर सकता है।
गन्दे हाथो से, विना नहाये, जूते चप्पल पहन कर, बहुत जल्दी मे इस प्रश्नावली का कतई प्रशेग न करे।
एक ही प्रश्न को बार बार न पूछे। एक दिन मे एक व्यक्ति अलग अलग 3-4 से ज्यादा प्रश्नो का अर्थ नही निकाले।

ये चौपाइया इस प्रकार है :

सुन सिय सत्य असीम हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।
फल :- कार्य सिद्ध होगा।
(बालकाण्ड मे सीता द्वारा गौरीपूजन और गौरी का आर्शीवाद)

प्रविसि नगर कीजे सब काजा।
हृदय राखि कोसलपुर राजा।।
फल :- सफलता मिलेगी।
(सुन्दरकाण्ड मे हनुमान द्वारा लंका प्रवेश)

उधरें अन्त न होई निबाहू।
कालनेमि जिमि रावन राहु।।
फल :- सफलता मे सन्देह है।
(बालकाण्ड मे सत्संग वर्णन)

विधि बस सुजन कुसंगत परहीं।
फनि मनि निज गुन अनुसरहीं।।
फल :- सफलता मे सन्देह है।
(बालकाण्ड मे सत्संग वर्णन)

मुद मंगलमय संत समाजू।
जिमि जग जंगम तीरथ राजू।।
फल :- कार्य सिद्ध होगा।
(बालकाण्डार्गत शिव पार्वती संवाद)

होई है सोई राम रचि राखा।
को करि तरक बढ़ावहिं सापा।।
फल :- कार्य सिद्ध होने मे सन्देह है।
(बालकाण्ड मे संत समाज रूपी तीर्थ)

गरल सुधा रिपु करय मिताई।
गोपद सिंधु अनल सितलाई।।
फल :- कार्य सफल होगा।
(हनुमान के लंका प्रवेश)

वरुन कुबेर सुरेस समीरा।
रन सनमुख धरि काह न धीरा।।
फल :- सन्देह है।
(लंकाकाण्ड रावण मृत्यु पर मन्दोदरी विलाप)

सफल मनोरथ होहुं तुम्हारे।
राम लखनु मुनि भए सुखारे।।
फल :- कार्य सिद्ध होगा।
(बालकाण्ड मे पुष्पवाटिका मे पुष्प लाने पर विश्वामित्र का आर्शीवाद)

इस राम शलाका प्रश्नावली के द्वारा जिस किसी को जब कभी अपने अभीष्ट प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने की इच्छा हो. तो सर्वप्रथम उस व्यक्ति को भगवान श्रीरामचन्द्रजी एवं उनके साकार स्वरूप. भगवान श्री साईनाथ का चिन्तन और ध्यान करना चाहिए। तदनुसार पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वासपूर्वक मनसे अभीष्ट प्रश्न का चिन्तन करते हुए. प्रश्नावली के मनचाहे कोष्ठक में अँगुली या कोई शलाका रख देना चाहिए और उस कोष्ठक में जो अक्षर हो उसे अलग किसी कोरे कागज या स्लेट पर लिख लेना चाहिए। प्रश्नावली के कोष्ठक पर भी ऐसा कोई निशान लगा देना चाहिए जिससे न तो प्रश्नावली गंदी हो और न प्रश्नोत्तर प्राप्त होने तक कोष्ठक भूल जाय। अब जिस कोष्ठक का अक्षर लिख लिया गया है, उससे आगे बढ़ना चाहिए तथा उसके नवें कोष्ठक में जो अक्षर पड़े, उसे भी लिख देना चाहिए। इस प्रकार नवें अक्षर को क्रम से लिखते जाना चाहिए और तब तक लिखते जाना चाहिए, जब तक उसी पहले कोष्ठक के अक्षर तक अंगुली अथवा शलाका न पहुंच जाये। पहले कोष्ठक का अक्षर जिस कोष्ठक के अक्षर से नवां पड़ेगा, वहां तक पहुँचते पहुँचते एक चौपाई पूरी हो जायेगी, जो प्रश्नकर्ता के अभीष्ट प्रश्न का उत्तर होगी। यहाँ इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी किसी कोष्ठक में केवल 'आ' की मात्रा (।) और किसी किसी कोष्ठक में दो दो अक्षर हैं। अतः गिनते समय न तो मात्रा वाले कोष्ठक को छोड़ देना चाहिए और न दो अक्षरों वाले कोष्ठक को दो बार गिनना चाहिए। जहाँ मात्रा का कोष्ठक आवे वहां पूर्व लिखित अक्षर के आगे मात्रा लिख लेना चाहिए और जहाँ दो अक्षरों वाला कोष्ठक आवे वहाँ दोनों अक्षर एक साथ लिख लेना चाहिए।

अब उदाहरण के तौर पर इस रामशलाका प्रश्नावली से किसी प्रश्न के उत्तर में एक चौपाई निकाल दी जाती है। पाठक ध्यान से देखें। किसी ने भगवान श्रीरामचन्द्र जी एवं उनके साक्षात् स्वरूप भगवान श्री साईनाथ का ध्यान और अपने प्रश्न का चिन्तन करते हुए, यदि प्रश्नावली के * इस चिन्ह से संयुक्त 'म' वाले कोष्ठक में अंगुली या शलाका रखी है, तो वह ऊपर बताये क्रम के अनुसार अक्षरों को गिन गिनकर लिखता गया। फिर अन्त में उत्तर स्वरूप निम्न चौपाई बन जायेगी -
हो इ है सो ई जो रा म र चि रा खा।
को क रि त र क ब ढ़ा व हिं सा खा।।
यह चौपाई बाल काण्डान्तर्गत शिव और पार्वती के संवाद में सम्मिलित है। अतः प्रश्नकर्ता को इस उत्तर स्वरूप चौपाई से यह आशय निकालना चाहिए कि कार्य होने में संदेह है, अतः उसे भगवान पर छोड़ देना श्रेयस्कर है।

विधि

सबसे पहले अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए अपने सवाल को मन मे अच्छी तरह सोच ले। इसके बाद तालिका मे दिये गए किसी भी अक्षर पर आंख बंद कर क्लिक/स्पर्श करे। आपके द्वारा क्लिक/स्पर्श किए हुए प्रत्येक नौ वे अक्षर को जोड कर एक चौपाई बनेगी जो कि आपके प्रश्न का उत्तर होगी।

राम शलाका प्रश्नावली (Ram Shalaka Prashnavali)
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