वचन किसे कहते हैं - परिभाषा, भेद, उदाहरण, प्रयोग के नियम | vachan kise kahate hain

वचन

वचन का अर्थ होता है - बोली, लेकिन हिन्दी व्याकरणों में वचन संख्याबोधक होता है। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध होता हो, उसे वचन कहते हैं।

जैसे -
  • लड़का, लड़की, कुत्ता, घोड़ा, आप आदि। - एक का बोध
  • लड़के, लड़कियाँ, कुत्ते, घोड़े, आपलोग आदि। - अनेक का बोध

वचन की परिभाषा

वचन संज्ञा पदों का वह लक्षण है जो एक या अधिक का बोध कराता है। जिसके द्वारा किसी संज्ञा के एक या अनेक होने के, उनकी संख्या का बोध हो, उसे वचन कहते हैं।
vachan-kise-kahate-hain

वचन के भेद

हिन्दी में वचन के दो भेद के होते हैं-
  1. एकवचन
  2. बहुवचन

एकवचन
शब्द के जिस रूप से उसके एक होने का बोध होता है, उसे एकवचन वाला शब्द कहेंगे। जैसे- गोविन्द, लड़का, घोड़ा, कुत्ता, कलम, तोता, चाबी बहन, लड़की, शाखा, घड़ी, पुस्तक, मैं, तू, काला, आदि।
vachan-kise-kahate-hain
हिन्दी में निम्न संज्ञा शब्द सदैव एकवचन में ही प्रयुक्त होते हैं, जैसे- आग, वर्षा, जल, आकाश, घी, सत्य, सोना, चाँदी, मिठास, प्रेम, सुन्दरता, बचपन, प्रत्येक, भीड़

विशेष
  • व्यक्तिवाचक संज्ञा, भाववाचक संज्ञा तथा द्रव्यवाचक संज्ञा शब्द सदैव एकवचन में ही प्रयुक्त होते हैं।
  • समूहवाची शब्द भी एकवचन में ही प्रयुक्त होते हैं- पुलिस, भीड़, जनता।

बहुवचन
शब्द के जिस रूप से उसके दो या दो से अधिक होने का बोध होता है, उसे शब्द का बहुवचन रूप कहा जाता है। जैसे- लड़के, घड़ियाँ, पुस्तकें, हम, काले, तोते, चाबियाँ आदि।
vachan-kise-kahate-hain
हिन्दी में निम्न शब्द सदैव बहुवचन ही होते हैं, अत: वाक्य में उनका प्रयोग बहुवचन में ही होता है। जैसे- आँसू, होश, दर्शन, हस्ताक्षर, प्राण, भाग्य, समाचार, लोगं, हाल-चाल, नियम

बहुवचन बनाने के नियम

बहुवचन दो प्रकार के बनते हैं- विभक्ति रहित और विभक्ति सहित।
एकवचन बहुवचन विभक्ति रहित बहुवचन विभक्ति सहित
लड़का लड़के लड़कों
बालक बालके बालकों
गाय गायें गायों

एकवचन बहुवचन
एक घोड़ा दो घोड़े
एक लड़का कई लड़के

एकवचन शब्दों का बहुवचन रूप में प्रयोग

विशेष -

(i) आदर और सम्मान के लिए
आदरणीय व्यक्ति हेतु प्रयुक्त 'आप' शब्द तथा किसी संज्ञा शब्द के साथ जी, साहब, महोदय, प्रयुक्त होने पर वह संज्ञा बहुवचन की तरह प्रयुक्त होती है।
जैसे -
  • आप कब आये?
  • पिताजी आज आ रहे हैं।
  • गाँधीजी देश के लिए कई बार जेल गये।
  • मन्त्री महोदय आज जोधपुर आ रहे हैं।

(ii) अहंकार प्रकट करने के लिए
मैं, मेरा, मुझे, मैंने के स्थान पर हमारा, हमें, हम, हमने का प्रयोग।
  • लड़का बोला, हमने कच्ची गोलियाँ नहीं खाई हैं।
  • यह हमारा शहर है, मैंने कहा।

(ii) अभिमान प्रकट करने के लिए
'हम देश के लिए प्राण दे देंगे।' सैनिक बोला

(iv) लोकव्यवहार के लिए
तू के स्थान पर 'तुम', भगवान हेतु 'तू'

(v) विशेष शब्द
दर्शन, हस्ताक्षर, समाचार, प्राण, बाल, लोग

(vi) समुदायवाचक शब्द
अध्यापकगण, अधिकारी वर्ग

पहचान
प्रायः संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण शब्द के वचन की पहचान उसके रूप से हो जाती है किन्तु कई बार उसके वचन की पहचान वाक्य में प्रयुक्त क्रिया के आधार पर होती है।
जैसे -
  • हाथी आ रहा है। (एकवचन)
  • हाथी आ रहे हैं। (बहुवचन)

  • सिपाही घर जा रहा है। (एकवचन)
  • सिपाही घर जा रहे हैं। (बहुवचन)

  • लड़के ने आम खाया। (एकवचन)
  • लड़के आम खा रहे हैं । (बहुवचन)

वचन बदलने के नियम

हिन्दी में शब्द कभी विभक्तिरहित प्रयुक्त होते हैं तो कभी विभक्ति सहित। फलतः उनके बहुवचन रूपों में परिवर्तन देखा जाता है, जैसे-लड़के जा रहे हैं। लड़कों ने जाने का कार्यक्रम बनाया है।
अत: वचन बदलने के नियमों का दो रूपों में अध्ययन करना होगा-
  1. विभक्ति रहित बहुवचन बनाने के लिए
  2. विभक्ति सहित बहुवचन बनाने के नियम

1. विभक्ति रहित संज्ञाओं के बहुवचन बनाने के नियम

(अ) आकारान्त पुल्लिंग संज्ञाओं के अन्तिम 'आ' के स्थान पर 'ए' करके
लड़का-लड़के पंखा-पंखे
रास्ता-रास्ते भाला-भाले
घड़ा-घड़े बच्चा-बच्चे
अपवाद- निम्न शब्दों में उक्त नियम लागू नहीं होता है,
जैसे -
  • सम्बन्ध सूचक शब्दों में- चाचा, मामा, पापा, नाना, काका
  • पदसूचक शब्दों में- दारोगा, पंडा, ओझा
  • निम्न आकारान्त तत्सम शब्दों में भी यह नियम लागू नहीं होता है- कर्ता, अभिनेता, देवता, पिता, भ्राता, माता, राजा, युवा, योद्धा [राजा, नेता के साथ परसर्ग लगाने पर बहुवचन रूप बदल जाते हैं-राजाओं, नेताओं]

(आ) निम्न अकारान्त, इकारान्त, ईकारान्त, उकारान्त और ऊकारान्त पुल्लिंग शब्दों के दोनों वचनों के रूप समान रहते हैं
बालक, मकान, कवि, मुनि, योगी, साधु

(इ) अकारान्त स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अन्त में 'आ' के स्थान पर 'ऐं' करके
रात-रातें गाय-गायें
सड़क-सड़कें भैंस-भैंसें
किताब-किताबें नहर-नहरें
आँख-आँखें बात-बातें
बहन-बहनें मूंछ-मूंछे
कमीज-कमीजें दीवार-दीवारें

(ई) इकारान्त स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अन्त में 'याँ' जोड़कर
तिथि-तिथियाँ समिति-समितियाँ
पंक्ति-पंक्तियाँ निधि-निधियाँ
लिपि-लिपियाँ नीति-नीतियाँ
संधि-संधियाँ गति-गतियाँ

(उ) ईकारान्त स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अन्त में 'ई' के स्थान पर 'इयाँ' लगाकर
रोटी-रोटियाँ लड़की-लड़कियाँ
दवाई-दवाइयाँ घोड़ी-घोड़ियाँ
नदी-नदियाँ टोपी-टोपियाँ
मछली-मछलियाँ स्त्री-स्त्रियाँ

(ऊ) 'या' से अन्त होने वाली स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अन्त में 'या' के स्थान पर 'याँ' लगाकर
चिड़िया-चिड़ियाँ बुढ़िया-बुढ़ियाँ
कुटिया-कुटियाँ गुड़िया-गुड़ियाँ
डिबिया-डिबियाँ

(ए) आकारान्त, उकारान्त, ऊकारान्त, औकारान्त स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अन्त में 'एँ' जोड़कर
कथा-कथाएँ माता-माताएँ
लता-लताएँ आत्मा-आत्माएँ
कविता-कविताएँ माला-मालाएँ
वस्तु-वस्तुएँ धेनु-धेनुएँ
धातु-धातुएँ वधू-वधुएँ
ऋतु-ऋतुएँ गौ-गौएँ

विशेष- ऊकारान्त शब्दों की 'ऊ' की मात्रा भी 'उ' की हो जाती है।

2. विभक्ति सहित संज्ञाओं के बहुवचन के नियम

(अ) अकारान्त तथा आकारान्त विभक्ति सहित संज्ञाओं के 'अ' तथा 'आ' के स्थान पर ओं' लगाकर
घर-घरों बन्दर-बन्दरों
मूर्ख-मूर्खों लड़का-लड़कों
घोड़ा-घोड़ों बूढ़ा-बूढ़ों
राजा-राजाओं लता-लताओं
माता-माताओं योद्धा-योद्धाओं

(आ) उकारान्त तथा ऊकारांत शब्दों के अन्त में 'ओं' लगाकर, ऐसी स्थिति में 'ऊ' का 'उ' हो जाता है
गुरु-गुरुओं साधु-साधुओं
भालू-भालुओं चाकू-चाकुओं
डाकू-डाकुओं वधू-वधुओं
हिन्दू-हिन्दुओं

(इ) इकारान्त तथा ईकारान्त वाले शब्दों के अन्त में 'यों' लगाकर, ऐसी स्थिति में 'ई' की मात्रा 'इ' हो जाती है
रात्रि-रात्रियों मुनि-मुनियों
व्यक्ति-व्यक्तियों गाड़ी-गाड़ियों
नदी-नदियों लड़की-लड़कियों

(ई) सम्बोधक कारक के रूप में अकारान्त, आकारान्त, उकारान्त शब्दों में 'अ', 'आ' के स्थान पर 'ओ' हो जाता है
बालक-बालको! छात्र-छात्रो!
बच्चा-बच्चो!

(उ) सम्बोधन कारक के रूप में इकारान्त या ईकारान्त शब्दों के अन्त में 'यो' लग जाता है तथा 'ई' की मात्रा 'इ' हो जाती है
पति-पतियो! मुनि-मुनियो!
पत्नी-पत्नियो! लड़की-लड़कियो!
भाई-भाइयो!

(ऊ) सम्बोधन कारक के रूप में उकारान्त, ऊकारान्त शब्दों के अन्त में 'यो' लग जाता है तथा 'ऊ' की मात्रा 'उ' हो जाती है
साधु-साधुओ! वधू-वधुओ!

विशेष
1. कुछ शब्दों के साथ जन, गण, वृंद, वर्ग, हर लगाकर बहुवचन बनाया जाता है,
जैसे-
  • जन- मुनिजन, साधुजन, गुरुजन, प्रजाजन, भक्तजन
  • गण- कविगण, शिक्षकगण, मंत्रिगण
  • वृंद- छात्रवृन्द, लेखकवृन्द
  • वर्ग- संन्यासिवर्ग, युवावर्ग, मंत्रिवर्ग
  • हर- खेतिहर
  • मण्डल/परिषद्- मंत्रिमण्डल, मंत्रिपरिषद्

2. जिन शब्दों के अन्त में सेना, दल, जाति प्रयुक्त होते हैं उनका प्रयोग सदा एक वचन में ही होता है
  • शत्रु सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया।
  • पर्वतारोहियों का दल आज आगे नहीं बढ़ सका।

3. शब्द-युग्मों का बहुवचन बनाने के लिए केवल अंतिम शब्द में ही परिवर्तन होता है,
जैसे-
  • ओलावृष्टि में बहुत भेड़-बकरियाँ मर गईं।
  • बच्चे गाय-भैंसें लेकर चराने जा रहे हैं।

4. परसर्ग (विभक्ति) से युक्त शब्दों के बहुवचन रूप
  • (i) आकारांत पुल्लिंग शब्द परसर्ग रहित होने पर बहुवचन में एकारांत हो जाते हैं- घोड़ा दौड़ रहा है, घोड़े दौड़ रहे हैं।
  • (ii) आकारांत पुल्लिंग शब्द परसर्ग सहित होने पर एकवचन एकारांत किन्तु बहुवचन में ओकारांत हो जाते हैं; जैसे-घोड़ा चना खा रहा है, घोड़े ने चना खाया, घोड़ों ने चना खाया।
  • (iii) कुछ अकारांत शब्दों में चाहे वे किसी लिंग के हो उनके साथ परसर्ग होने पर बहुवचन में 'ओं' लगता है- घर-घरों (में), बात-बातों (में)
  • (iv) कुछ आकारान्त या उकारान्त शब्दों में चाहे वे किसी लिंग के हो साथ में परसर्ग विभक्ति होने पर बहुवचन में 'ओं' लगता है राजा-राजाओं (ने, को, से), साधु-साधुओं (ने, को, से), लता-लताओं (का) पशु-पशुओं (के लिए), किन्तु ईकारान्त शब्दों में यों लगता है-आदमी-आदमियों (ने), नदी-नदियों (में)

यहाँ विभक्ति रहित और विभक्ति सहित बहुवचन बनाने के विभिन्न नियमों की चर्चा की जाएगी।

एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम

पुल्लिंग शब्दों के बहुवचन


(1) आकारांत पुल्लिंग संज्ञा के 'आ' को 'ए' में बदलने से बहुवचन होता है।
जैसे -
  • एकवचन - लड़का, कमरा, घोड़ा, कुत्ता, सोफा, पहिया, पूआ।
  • बहुवचन - लड़के, कमरे, घोडे, कुत्ते, सोफे, पूए।

कुछ ऐसे शब्द हैं -
मेला, केला, चेला, गमला, ताला, मसाला, बकरा, बछड़ा, कपड़ा, भेंडा, जूता, छाता, रास्ता, कुरता, आरा, काँटा, बेटा, पराँठा, अँगूठा, चना, खिलौना, गन्ना, पंखा, चरखा, चश्मा. तारा. चौराहा, आदि।

अब विभक्ति रहित या विभक्ति सहित उपर्युक्त संज्ञा-शब्दों को वाक्य-प्रयोग की दृष्टि से देखें-
  1. एकवचन (विभक्ति रहित) - लड़का दौड़ता है। कमरा साफ है।
  2. बहुवचन (विभक्ति रहित) - लड़के दौड़ते हैं। कमरे साफ हैं।
लेकिन, एकवचन में विभक्ति का प्रयोग हो तो ऐसे आकारांत पुल्लिग शब्द एकारांत हो जाते है। जैसे -

एकवचन (विभक्ति सहित) - एक लड़के ने, एक कमरे में, एक सोफे पर, एक बच्चे को, एक पृए के लिए रोते देखा।
उपर्युक्त वाक्यों में 'ने' और 'में' आदि विभक्तियाँ हैं। ऐसे शब्दों का प्रयोग बहुवचन में विभक्ति के साथ करना हो, तो इस प्रकार करें

बहुवचन (विभक्ति सहित) - लड़कों ने, कमरों में, सोफों पर, बच्चों को, पूओं के लिए रोते देखा।
अपवाद - लेकिन कुछ आकारांत पुल्लिंग संज्ञा दोनों वचनों में विभक्ति रहित एक ही रूप में प्रयुक्त होते हैं। जैसे - बाबा, दादा, नाना, काका, चाचा, मामा, पिता, कर्ता, दाता, योद्धा, युवा, राजा, आदि।
  • एकवचन - उसका एक मामा है। मामा ने कहा- मैं राजा हूँ।
  • बहुवचन - उसके दो मामा हैं। दोनों मामा ने कहा- हमलोग राजा हैं।
नोट -

(क) ऐसे शब्दों का प्रयोग इस प्रकार न करें
  • एकवचन - दादे ने, नाने से, मामे की - गलत प्रयोग।
  • बहुवचन - दादाओं ने, नानाओं से, मामाओं की - गलत प्रयोग।
लेकिन संस्कृत के आकारांत शब्दों के अंत में 'ओ' लगाकर विभक्ति सहित बहुवचन बनाए जाते है।
जैसे -
राजाओं ने, राजाओं को, राजाओं के लिए राजाओं से, योद्धा के लिए

(ख) विभक्ति रहित या विभक्ति सहित आकारांत पुंलिंग संज्ञा- शब्दों के एकवचन एवं बहुवचन के प्रयोग में सावधानी रखें।
  • एकवचन - लड़का खाता है। लड़के को खिलाओ। लड़के ने कहा।
  • बहुवचन - लड़के खाते हैं। लड़कों को खिलाओ। लड़कों ने कहा।

(2) एकवचन आकारांत पुल्लिग संज्ञाओं को छोड़कर अन्य स्वरों (अ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ओ, औ) से अंत होने वाले शब्द दोनो वचनो में एक ही रूप में रहते हैं और वचन की पहचान वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से होती है।
जैसे -
  • एकवचन - बालक पढ़ता है। कवि कहता है। भाई आया।
  • बहुवचन - (दो) बालक पढ़ते हैं। (सभी) कवि कहते हैं।
ऐसे कुछ शब्द हैं - बालक, नर, घर, कवि, ऋषि, मुनि, स्वामी, सिपाही, गुरु, कृपालु, भालू, डाकू. दूबे, चौबे, कोदो, रासो, जौं, गौ, सरसों आदि। इनका विभक्ति सहित बहुवचन रूप होगा -
  • बालक - बालकों ने, बालकों को, बालकों से आदि।
  • कवि - कवियों ने, कवियों को, कवियों से आदि।
  • सिपाही - सिपाहियों ने, सिपाहियों को, सिपाहियों से आदि।
  • गुरु - गुरुओं ने, गुरुओं को, गुरुओं से आदि।
  • डाकू - डाकुओं ने, डाकुओं को, डाकुओं से आदि।
  • चौबे - चौबों ने, चौबों को, चौबों से आदि।

(3) एकवचन पुंल्लिग शब्दों के 'आँ' को 'एँ' में बदलने से विभक्ति रहित बहुवचन बनता है।
जैसे -
रोआँ-रोएँ, धुआँ-धुएँ, कुआँ-कुएँ।
विभक्ति सहित बहुवचन का रूप होगा - रोओं, धुओं, कुओं आदि।
  • एकवचन - मुझे एक कुआँ है। उस कुएँ का पानी मीठा है।
  • बहुवचन - मुझे दो कुएँ हैं। उसे कुओं का पानी मीठा है।

स्त्रीलिंग शब्दों के बहुवचन

(1) एकवचन आकारांत स्त्रीलिंग संज्ञा के अंतिम 'आँ' को 'एँ' में बदल देने से बहुवचन बनता है।
  • एकवचन - गाय, पुस्तक, झील, लाल, बहन, आँख।
  • बहुवचन - गायें, पुस्तकें, झीलें, लालें, बहनें, आँखें।

ऐसे कुछ शब्द हैं-
आह, राह, मेज, मंजिल, दाल, खाल, मूंछ, पूँछ, फसल, गजल, रात, बात, आफत, आदत, जान, खान, लाश, घास, नहर, लहर, खबर, कलम, जोंक, आदि।
  • एकवचन - यह गाय मेरी है। इसकी एक आँख आ गयी है।
  • बहुवचन (विभक्ति रहित)- ये गायें मेरी हैं। इनकी आँख आ गयी हैं।
  • बहुवचन (विभक्ति सहित) - इन गायों की आँखों में लाली आ गयी है।

(2) एकवचन आकारांत, उकारांत एवं ऊकारांत स्त्रीलिंग संज्ञा के अंत में एँ जोड़ने से बहुवचन बनता है।
जैसे -
  • एकवचन - लता, शाखा, भाषा, समस्या ऋतु, बहु।
  • बहुवचन - लताएँ, शाखाएँ, भाषाएँ, समस्याएँ, ऋतुएँ, बहुएँ।

ऐसे कुछ शब्द हैं-
घटना, रचना, सूचना, कामना, इच्छा, शिक्षा, दीक्षा, परीक्षा, माला, ज्वाला, पाठशाला, बालिका, अध्यापिका, परिचारिका, वस्तु, धान, हवा, दवा, वार्ता, कविता, विशेषता, क्रिया, संख्या, विद्या आदि।
  • एकवचन - वृक्ष की लता को मत तोड़ो। मैं एक भाषा जानता हूँ।
  • बहुवचन (विभक्ति रहित) - ये लताएँ कमजोर हैं। मैं दो भाषाएँ जानता हूँ
  • बहुवचन (विभक्ति सहित) - वृक्ष की लताओं को मत तोड़ो। संस्कृत अनेक भाषाओं की जननी है। लेकिन आकारांत भाववाचक संज्ञा के बहुवचन रूप प्राय: नहीं होते है।
जैसे-
मुझे राम की मित्रता पर गर्व है।
मुझे राम और श्याम की मित्रता पर गर्व है।

ऐसे कुछ शब्द हैं
दया, माया, छाया, वेदना, वंदना, याचना, घृणा, करुणा, कल्पना, क्षमा, गरिमा, महिमा, कालिमा, शत्रुता, मूर्खता, एकता, दासता, हिंसा, अहिंसा, आशा, निराशा आदि।

(3) एकवचन स्त्रीलिंग संज्ञा के अंतिम ई या इ को इयाँ तथा या को याँ में बदल देने से बहुवचन बनता है।
जैसे-
  • एकवचन - तिथि, लड़की, मिठाई, कठिनाई, चिड़िया।
  • बहुवचन - तिथियाँ, लड़कियाँ, मिठाइयाँ, कठिनाइयाँ, चिड़ियाँ।

ऐसे कुछ शब्द हैं
गाड़ी घंटी, ताली, मंडी, पकौड़ी, कचौड़ी, चूड़ी, पूड़ी, नारी, साड़ी, उपाधि, समाधि, जाति, चपाती, नारंगी, सारंगी, रीति, नीति, घड़ी, छड़ी, डोली बोली, थाली, गाली, साली, प्याली, रोटी, बेटी, झाड़ी, नारी, तिजोरी, कमजोरी, डिबिया, कुटिया, गुड़िया, बच्ची, बूढी आदि।
  • एकवचन - गलत रीति का विरोध करें। मुझे एक मिठाई दो।
  • बहुवचन (विभक्ति रहित) - ये रीतियाँ गलत हैं। मुझे दो मिठाइयाँ दो।
  • बहुवचन (विभक्ति सहित) - उन रीतियों को समझें। उन मिझाइयों को दो।

वचन से संबद्ध कुछ विशेष बातें

(1) कुछ स्त्रीलिंग या पुल्लिग एकवचन में शब्दों में गण, वर्ग, जन, जाति, वन्द, लोग आदि शब्द लगाने से भी बहुवचन बनता है।
जैसे -
  • गण - पाठकगण, छात्रगण, नेतागण, मंत्रिगण आदि।
  • वर्ग - शासकवर्ग, अधिकारीवर्ग, शोषकवर्ग, शोषितवर्ग आदि।
  • जन - वृद्धजन, स्त्रीजन, भक्तजन, गुरुजन आदि।
  • जाति - मनुष्यजाति, स्त्रीजाति, पुरुषजाति, मानवजाति आदि।
  • वृन्द - नारीवृन्द, शिक्षकवृन्द, पाठकवृन्द आदि।
  • लोग - आपलोग, डॉक्टरलोग, विद्यार्थीलोग आदि।
  • एकवचन - मैं इस पुस्तक के एक पाठक से मिला। यह बड़े घर की नारी है। प्रत्येक मनुष्य समस्याग्रस्त है।
  • बहुवचन - हजारों पाठकगण इस पुस्तक से प्रभावित हैं। यह सभा नारीवृन्द के लिए है। मनुष्य जाति संकट में है।

(2) आदर दिखाने के लिए कभी-कभी एकवचन संज्ञा का प्रयोग बहुवचन जैसा होता है।
जैसे -
  • दादी जी आयीं।
  • उसकी माँजी आयीं।
  • मेरे पिताजी लम्बे हैं।
  • एक गुरुजी आ रहे हैं।

(3) कुछ पुल्लिग संज्ञाएँ सदा बहुवचन में प्रयुक्त होती हैं। जैसे - आँसू, अक्षत, दर्शन, ओंठ, प्राण, लोग, बाल, दाम, भाग्य, आदि।
  • आपके दर्शन हुए।
  • उनके आँसू बहे।
  • उनके प्राण निकले।
  • मेरे ओंठ खुले।
  • अक्षत पड़े।
  • मोहन के भाग्य खुले।
  • इसके कितने दाम हैं। 
  • सोहन के बाल पके।

(4) सके विपरीत - हर, हरएक, प्रत्येक, कोई, जनता, वर्फ, आग आदि शब्दों का प्रयोग सदा एकवचन में होता है।
  • हर व्यक्ति यही करेगा।
  • यहाँ प्रत्येक व्यक्ति आया।
  • हर एक लड़का यही कहेगा।
  • कोई आ रहा है।

(5) विदेशज भाषा के जो शब्द हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, उनके बहुवचन रूप हिन्दी व्याकरण के अनुसार बनाए जाते हैं।

(क) अंग्रेजी शब्द - फ्रूट, पेंसिल, डॉक्टर, स्कूल, आदि को अंग्रेजी के अनुसार क्रमशः - फीट, पेंसिल्स, डॉक्टर्स, स्कूल्स न लिखें।

इनका बहुवचन में प्रयोग होता है।
  • ये पेंसिल नयी हैं। (विभक्ति रहित)
  • उन पेंसिलों को रखो। (विभक्ति सहित)
  • मेरे निकट दो डॉक्टर रहते हैं। (विभक्ति रहित)
  • उन डॉक्टरों से मेरी पहचान है। (विभक्ति सहित)

(ख) उर्दू शब्द (अरबी-फारसी) - कागज, मकान, वकील आदि।
अरबी - फारसी के नियमों से इन्हें क्रमशः कागजात, मकानात, वकालत न लिखें।

इनका बहुवचन में प्रयोग होता है। 
  • यहाँ कई प्रकार के कागज मिलते हैं। (विभक्ति रहित)
  • मुझे सभी कागजों को दिखलाएँ। (विभक्ति सहित)
  • आज दो वकील आये। (विभक्ति रहित)
  • दोनों वकीलों को बुलाओ। (विभक्ति सहित)

(6) द्रव्यवाचक संज्ञा का प्रयोग प्रायः एकवचन में होता है, लेकिन द्रव्य के प्रकारों का बोध कराना हो, तो बहुवचन में प्रयोग किया जा सकता है।
जैसे -
  • मेर पास थोड़ा बहुत सोना है। (विभक्ति रहित)
  • अफ्रीका में कई तरह के सोने मिलते हैं। (विभक्ति सहित)
  • उस तेली के पास बहुत तेल है। (विभक्ति रहित)
  • वहाँ कई तरह के तेल मिलते हैं। (विभक्ति सहित)

वचन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

'वर्षा' शब्द का उचित बहुवचन चुनिए
  • वर्षाएँ
  • वर्षाओं
  • वर्षा
  • वर्षागण
वर्षा

निम्न में से कौनसा शब्द बहुवचन नहीं है
  • दर्शन
  • हस्ताक्षर
  • जनता
  • बाल
जनता

'आँसू' का बहुवचन क्या होगा?
  • आँसू
  • आँसुएँ 
  • आँसुओं
  • उपर्युक्त में से कोई नहीं
आँसू

'भारतीय' शब्द का बहुवचन है
  • भारतीयों
  • भारतिओं
  • भारतियों
  • उपर्युक्त में से कोई नहीं 
भारतीयों

निम्नलिखित में से कौनसा शब्द एकवचन नहीं है
  • हवा
  • वर्षा
  • आग
  • समाचार
समाचार

निम्न में से कौनसा शब्द सदैव बहुवचन में प्रयुक्त होता है
  • माता
  • प्राण
  • लड़का
  • किताब
प्राण

निम्न में से कौनसा शब्द सदैव एकवचन में प्रयुक्त नहीं होता है
  • जनता
  • आग
  • होश
  • वर्षा
होश

निम्न में से कौन-सा कथन अनुचित है
  • भाववाचक संज्ञाएँ सदैव एक वचन में प्रयुक्त होती हैं।
  • पानी, दूध, आग शब्द सदैव बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं।
  • घातु का बोध कराने वाली जातिवाचक संज्ञाएँ एकवचन ही रहती हैं।
  • दर्शन, भाग्य, बातें शब्द सदैव बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं।
पानी, दूध, आग शब्द सदैव बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं।

निम्न में से किस क्रमांक में संबोधन का सही रूप है
  • सज्जनों!
  • प्यारे बच्चों!
  • भाइयो!
  • देशवासियों!
भाइयो!

किस क्रमांक के संज्ञा शब्द सदैव एकवचन में ही प्रयुक्त होते हैं
  • घी, भीड़ा, समाचार
  • लोग, नियम, आकाश
  • चाँदी, मिठास, बचपन
  • आग, वर्षा, प्राण
चाँदी, मिठास, बचपन

किस शब्द का बहुवचन रूप सही नहीं है?
  • दवाई = दवाईयाँ
  • रुपया = रुपये
  • वधू = वधुएँ वधुओं
  • चिड़िया = चिड़ियाँ
दवाई = दवाईयाँ

किस वाक्य में वचन सम्बन्धी अशुद्धि है?
  • पर्वतारोहियों का दल आगे नहीं बढ़ सका।
  • बच्चे गायें, भैंसें लेकर चराने जाते हैं।
  • ओलावृष्टि में बहुत भेड़-बकरियाँ मर गई।
  • शत्रु सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया।
ओलावृष्टि में बहुत भेड़-बकरियाँ मर गई।

'आगरा' का बहुवचन होता है
  • आगरे
  • आगरों
  • आगरें
  • बहुवचन नहीं होता
बहुवचन नहीं होता

निम्नलिखित शब्दों में एकवचन है
  • आकाश
  • गुरुजन
  • युवावर्ग
  • खेतिहर
आकाश

FAQ :

वचन किसे कहते हैं? vachan kise kahate hain
क्रिया के जिस रूप से एकत्व या अनेकत्व का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। अर्थात् शब्द के जिस रूप से उसके एक अथवा अनेक होने का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।

वचन के कितने भेद होते हैं? vachan ke kitne bhed hote hain
वचन के दो भेद होते हैं - एकवचन, बहुवचन।

'भारतीय' शब्द का बहुवचन है?
भारतीयों
और नया पुराने